KVK के हड़ताल का तीसरा दिन: न समाधान मिला, न संवाद समस्याएं जस की तस, विदेश दौरे पर गए कुलपति

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KVK  रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित समस्त कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के अधिकारी-कर्मचारी अपनी वेतन विसंगति, अपूर्ण वेतन भुगतान और वैधानिक सेवा-लाभों की बहाली की मांग को लेकर जारी अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल सह धरना-प्रदर्शन के तृतीय दिवस में प्रवेश कर चुके हैं।

समस्‍याएं जस की तस

अनिश्चितकालीन हड़ताल के तीन दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ समस्याओं के निराकरण के लिए कोई ठोस, लिखित या समयबद्ध पहल नहीं किया गया है। न तो किसी प्रकार का समाधान प्रस्तुत किया गया, और न ही संघ से वार्ता के लिए कोई औपचारिक प्रयास किया गया। परिणामस्वरूप, KVK अधिकारियों/कर्मचारियों की समस्याएँ आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई हैं।

संघ स्मरण कराना चाहता है कि 16 से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय कामबंद हड़ताल के दौरान भी विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट, वैधानिक और समयबद्ध समाधान का अवसर दिया गया था। लेकिन प्रशासनिक निष्क्रियता, टालमटोल व जिम्मेदारी से बचने के रवैये के कारण कर्मचारियों को विवश होकर आंदोलन को 23 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन स्वरूप देना पड़ा।

संघ पुनः यह दोहराता है कि समस्याओं के निराकरण से संबंधित सभी वैधानिक पत्र, दिशा-निर्देश एवं न्यायालयीन आदेश पूर्व से ही उपलब्ध हैं, जिनका अनुपालन सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय प्रशासन का दायित्व है। इसके बावजूद निरंतर विलंब, टालमटोल एवं संवादहीनता कर्मचारियों को आंदोलन के लिए विवश कर रही है।

वार्ता विफल, प्रशासन उदासीन

अनिश्चितकालीन हड़ताल के प्रथम दिवस कुलपति स्तर पर हुई भेंट-वार्ता में भी संघ को कोई लिखित मौखिक अथवा समयसीमाबद्ध आश्वासन प्राप्त नहीं हुआ। समस्याओं के समाधान को कभी राज्य शासन, तो कभी वित्तीय प्रक्रियाओं से जोड़कर टाल दिया गया, जबकि सभी वैधानिक निर्देश, केन्द्रीय पत्र एवं न्यायालयीन आदेश पूर्व से से ही उपलब्ध हैं।

केन्द्रीय निर्देशों एवं न्यायालयीन आदेशों की अनदेखीः

संघ ने पुनः स्पष्ट किया है कि-

ICAR के मूल दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल 75% (Pay-DA-HRA) का अंश परिषद द्वारा एवं शेष 25% दायित्त्व मेजबान विश्वविद्यालय का है,

भारत सरकार के कृषि मंत्रियों एवं सचिव स्तर के पत्र स्पष्ट हैं,

तथा माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के आदेश एवं विश्वविद्यालय के स्वयं के अनुपालन पत्र भी विद्यमान हैं,

इसके बावजूद वेतन एवं सेवा-लाभों का भुगतान न किया जाना न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना के समान है

कुलपति महोदय का विदेश भ्रमण कर्मचारियों में रोष

संघ अत्यंत पीड़ा के साथ यह भी उल्लेख करता है कि जहाँ एक ओर KVK के अधिकारी/कर्मचारी विगत लगभग 18 माह से वेतन व वैधानिक लाभों से वंचित होकर गंभीर आर्थिक व मानसिक संकट झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुलपति महोदय का आगामी विदेश भ्रमण के लिए प्रस्थान कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। इस स्थिति ने आंदोलनरत कर्मचारियों में गहरा असंतोष एवं आक्रोश उत्पन्न किया है।

किसानों एवं कृषि तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव

KVK आंदोलन का सीधा प्रभाव किसानों, कृषि विस्तार सेवाओं एवं राज्य की कृषि व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन का निष्क्रिय रवैया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

संघ का स्पष्ट रूख

आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं अनुशासित है।

कर्मचारियों के सम्मान, आजीविका एवं वैधानिक अधिकारों पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं।

अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण उत्पन्न होने वाली समस्त शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं प्रसारगत अव्यवस्थाओं की पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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संघ विश्वविद्यालय प्रशासन से पुनः मांग करता है कि तत्काल, स्पष्ट, लिखित एवं समयबद्ध निर्णय लेकर KVK अधिकारियों कर्मचारियों के पूर्ण वेतन भुगतान एवं समस्त वैधानिक सेवा-लाभों की बहाली सुनिश्चित की जाए, ताकि आंदोलन समाप्त हो सके और किसानों को पुनः निर्बाध सेवाएँ प्राप्त हो सकें

chatur postFebruary 25, 2026
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