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Labour law2025 लेबर कानून में क्रांतिकारी बदलाव: काम के घंटे, वेतन भुगतान की तारीख से लेकर ग्रेच्युटी तक, जानिए- क्‍या है नया नियम

Labour law2025 न्यूज डेस्क। देश में पुराने कानूनों और नियमों के बदलाव में जुटी केंद्र की मोदी सरकार ने लेबर कानून में बड़ा बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसक बदलाव का नोटिफिकेशन 31 दिसंबर को जारी कर दिया गया है। अभी इस पर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया चल रही है।

28 के स्थान पर अब केवल चार कानून

केंद्र सरकार ने देश में लागू 28 लेबर कानूनों को समाप्त करके केवल 4 कानून लागू करने का फैसला किया है। नए लागू होने वाले लेबर कोड में मजदूरी संहिता Wage Code (2019), औद्योगिक संबंध संहिता Industrial Relations Code (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता Social Security Code (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों संहिता (2020) शामिल है।

क्या है इन कानूनों में

इन चारो कानूनों में कर्मचारियों के लिए वेतन, पीएफ, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा social Security से स्वास्थ्य तक के नियमों के साथ हैं। ऐसा माना जा रहा है कि नए साल में इन सभी कानूनों को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

नए कानून में कैसे होगी वेतन की गणना

सैलरी पैकेज के बारे में वेतन संहिता (Central) नियम, 2025 के ड्राफ्ट में न्यूनतम मजदूरी minimum wage को निर्धारित करने, गणना करने और संशोधित करने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत न्यूनतम मजदूरी दैनिक आधार पर तय होगी और फिर एक Standard formula स्टैंडर्ड फॉर्मूला का प्रयोग करके इसे प्रति घंटा और मासिक वेतन में बदला जाएगा।

केंद्र तय करेगा न्यूनतम मजदूरी दर

न्यूनतम मजदूरी minimum wage की गणना एक सामान्य कामकाजी वर्ग के परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगी। इनमें भोजन, कपड़े, घर का किराया, ईंधन, बिजली, शिक्षा, Medical expenses मेडिकल खर्च और अन्य बुनियादी जरूरतें शामिल हैं। कुल मिलाकर केंद्र सरकार Central government की तरफ से एक राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी National minimum wage तय की जाएगी, कोई भी राज्य इसके नीचे का आंकड़ा तय नहीं कर सकेगी।

सप्ताह में केवल 48 घंटे काम

नए कानून में सप्ताह में अधिकतम 48 काम के घंटे तय किए गए हैं, जबकि वेतन की गणना 8 घंटे के कार्य दिवस के आधार पर होगी। इसके अलावा रात की पाली के लिए वेतन की गणना भी खास तरीके से होगी। ये प्रावधान मैन्युफैक्चरिंग Manufacturing, सर्विस, लॉजिस्टिक्स Logistics और आईटी सेक्टर्स के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां 24 घंटे काम होता है। महिला कर्मचारियों को सहमति और अनिवार्य सुरक्षा के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है।

50 प्रतिशत से ज्यादा कटौती नहीं

नए कानूनों के तहत कर्मचारियों को समय पर वेतन दी जाएगी। कटौतियों पर सख्त लिमिट सेट की गई हैं। किसी भी वेतन अवधि में कुल कटौतियां कर्मचारी के वेतन के 50 प्रतिशत या इससे कम हो सकती हैं, इससे अधिक नहीं। यानी सैलरी में सिर्फ बेसिक-पे Basic Pay, डीए  और अन्य भत्ता शामिल होगा और ये सभी घटक कुल सैलरी या सीटीसी Cost to Company का अधिकतम 50 प्रतिशत होगा। बाकी 50 प्रतिशत हिस्से में एचआरए HRA, बोनस, कमीशन, पीएफ, ओवरटाइम Overtime और अन्य शामिल होंगे। अगर ये अलाउंस तय सीमा से ज्यादा हो जाते हैं तो अतिरिक्त राशि खुद ही सैलरी में जुड़ जाएगा।

कटौती से पहले देनी होगी सूचना

अब कर्मचारी के वेतन में कटौती लगाने से पहले उचित प्रक्रिया का पूरा पालन करना होगा, जिसमें संबंधित कर्मचारी को सूचित करना, उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना शामिल होगा। इसके साथ ही नए कानून के तहत अनुसूचित और अनियमित रोजगार के बीच के अंतर को खत्म किया गया है। वेतन संहिता अनौपचारिक श्रमिकों, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों और फिक्स्ड टर्म एंप्लाई समेत सभी कर्मचारियों पर लागू होगी। इसके चलते गिग वर्कर्स Gig workers और प्लेटफॉर्म वर्कर्स Platform workers को भी पहली बार कानूनी पहचान मिलेगी। उन्हें पीएफ, बीमा, पेंशन जैसे सामाजिक सुरक्षा social Security लाभ मिल सकेंगे।

एक साल की सर्विस पर ग्रेच्युटी की पात्रता

नए कानून के तहत अब ग्रेच्युटी Gratuity पाने के लिए 5 साल का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि एक साल की सर्विस पर ही ग्रेच्युटी दिया जाएगा। यह ग्रेच्युटी फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स Contract workers को भी मिलेगा। इन कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के बराबर ही सभी फायदे जैसे छुट्टी, चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा भी दी जाएंगी।

ओवर टाइम और बोनस को लेकर नियम

इस प्रावधान से आय की सुरक्षा में सुधार और कांट्रेक्ट एग्रीमेंट पर अत्यधिक निर्भरता कम होने की उम्मीद है। नए नियमों में कम या विलंब से वेतन भुगतान Salary payment, बिना पैसे के ओवरटाइम Overtime या बोनस से इनकार करने से संबंधित दावे दर्ज करने के लिए भी प्रावधान किया गया है। एक अन्य महत्वपूर्ण नियम ये है कि वेतन रजिस्टर Salary register और एम्पलाई रिकॉर्ड Employee Records में लिंग और वेतन संबंधी जानकारी विस्तार दर्ज होगी, जिससे भेदभाव की पहचान करना और उसे चुनौती देना आसान होगा।

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