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Laxmi Verma  इन 7 दिग्‍गजों को पछाड़ कर लक्ष्‍मी वर्मा कैसें बनीं राज्‍यसभा की प्रत्‍याशी?: जानिए- कौन-कौन थे दावेदार? क्‍या रहा समीकरण?    

Laxmi Verma  रायपुर। छत्‍तीसगढ़ में सत्तारुढ़ भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए लक्ष्मी वर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने इस वर्ष को महतारी गौरव वर्ष के रुप में मनाने की घोषणा की है। ऐसे में कर्मी समाज से आने वाली लक्ष्‍मी वर्मा को प्रत्याशी बनाए जाने को नारी शक्ति और ओबीसी समीकरण को साधने की कोशिश के रुप में देखा जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात यह भी कि महिला शक्ति के दम पर ही भाजपा ने प्रदेश की सत्ता में वापसी की है। 2023 के विधानसभा चुनाव में महतारी वंदन योजना गेमचेंजर साबित हुआ था।

मुख्यमंत्री की पसंद पर लगी मुहर

भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पसंद बताया जा रहा है। जानकारों की राय में राष्ट्रीय नेतृत्व ने लक्ष्मी वर्मा के नाम की घोषणा करके यह संदेश दिया है कि राज्य के विषय में होने वाले फैसलों मुख्यमंत्री विष्‍णुदेव साय की पकड़ बेहद मजबूत है।

सात दावेदरों में से तीन का पैनल भेजा गया था दिल्ली

भाजपा से राज्यसभा की टिकट के सात दावेदरों की सूची बनी थी। इनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल, सरोज पांडेय, भूपेंद्र सवन्नी, किरण बघेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी और निर्मल का नाम शामिल था। प्रदेश संगठन ने इनमें से तीन नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा था, इनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी शामिल थे।

समाज में सक्रिय भूमिका

लक्ष्‍मी वर्मा राजनीति के साथ ही कुर्मी समाज में भी सक्रिय हैं। 2000 से 2006 तक वे मनवा कुर्मी क्षत्री समाज छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला महामंत्री रहीं। 2006 से 2008 तक प्रदेश संगठन मंत्री मनवा कुर्मी छत्रीय समाज और 2008 से 2010 तक छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी प्रदेश महिला अध्यक्ष रहीं। वतर्मान में वे अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा महिला राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

लक्ष्मी वर्मा का सफरनामा

बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक के ग्राम मुड़पार की निवासी लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक सफर 1990 से भाजपा प्राथमिक सदस्यता के साथ शुरू हुआ। वर्तमान में वे खमतराई संतोषीनगर में रहती हैं। 2000 में वे सांसद रमेश बैस की सांसद प्रतिनिधि रहीं। 2001 में उन्हें प्रदेश महिला मोर्चा की कार्यसमिति की सदस्य बनाया गया। 2010 में उन्हें पार्टी की पंचायती राज प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्य समिति (2010 से 2014 तक) के साथ-साथ महिला मोर्चा कार्य समिति का सदस्य (2010 से 2022 तक) नियुक्ति किया गया। 2021 से 2025 तक पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं। इसी दौरान गरियाबंद संगठन प्रभारी प्रदेश प्रवक्ता की भी जिम्मेदारी दी गई।

लक्ष्‍मी वर्मा चुनावी सफर

लक्ष्मी वर्मा 1994 में रायपुर नगर पालिका निगम में वार्ड नंबर 07 से पार्षद निर्वाचित हुईं। 2010 में रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष बनीं। 2024 से वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य हैं।

छत्‍तीसगढ़ में कर्मी समाज की स्थिति

राज्य में कुर्मी समाज बड़ा वोट बैंक है। यह राज्य के ओबीसी वर्ग में पांचवीं बड़ी आबादी है। क्वांटिफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में राज्य में ओबीसी की कुल आबादी 1 करोड़ 25 लाख 07 हजार 169 बताई गई है। 30,05,661 की आबादी के साथ साहू सबसे बड़ी जनसंख्या है। 22 लाख 67 हजार 500 की आबादी वाला यादव सामज दूसरे और निषाद समाज तीसरे नंबर पर है। निषाद समाज की जनसंख्या 11 लाख 91 हजार 818 बताई गई है। 8 लाख 98 हजार 628 के साथ कुशवाहा समाज चौथे और 8 लाख 37 हजार 225 की संख्या के साथ कुर्मी पांचवें नंबर पर हैं।

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