Multi-year tariff  बिजली की मल्टी ईयर टैरिफ की अधिसूचना जारी: जानिए- कौन-कौन आएगा दायरे में

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2025-12-19 | 04:24h
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Multi-year tariff रायपुर। छत्तीसगढ़ में विद्युत की मल्टीव ईयर टैरिफ को लेकर छत्तीसगढ़ राज्यन विद्युत नियामक आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अनुसार टैरिफ के निर्धारण और वित्तीय वर्ष 2028-27 से वित्तीय वर्ष 2029-30 के लिए धारा 32 (3) के अनुसार एसएलडीसी की शुल्क और प्रमारों के लिए लागू होंगे, और यह तब तक प्रभावी रहेंगे, जब तक कि इन विनियमों को नवीन विनियमों द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जाता है।

2.1 ये विनियम टैरिफ और प्रभारों से अपेक्षित राजस्व के निर्धारण के लिए और टैरिफ और प्रभारों से अपेक्षित राजस्व के निर्धारण की कार्यप्रणाली और प्रक्रिया छत्तीसगढ़ राज्य में कार्यस्त निम्नलिखित व्यक्तियों पर लागू होंगे:

(क) राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी (STU) केंद्रों

(ख) सभी उत्पादन केंद्र, जो सीधे या राज्य व्यापार लाइसेंसधारियों के माध्यम से राज्य के वितरण लाइसेंसधारियों को दीर्घकालिक समझौते के तहत बिजली आपूर्ति करते हैं, सिवाय उन उत्पादन केंद्रों के, जो केन्द्रीय आयोग के क्षेत्राधिकार के अधीन हैं और राज्य में स्थित ऐसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन केंद्रों को छोड़कर, जिनके टैरिफ का निर्धारण, आयोग द्वारा प्रासंगिक विनियमों और आदेशों के तहत किया जाता है :

परंतु यह कि ये विनियम, उन सभी मामलों में भी लागू होंगे, जहां किसी उत्पादन कंपनी के पास उसे आवंटित एकीकृत खान (खानों) से उसके निर्दिष्ट अंतिम उपयोग वाले एक या अधिक उत्पादन स्टेशनों के लिए कोयले की आपूर्ति की व्यवस्था है, जिसका Tariff, अधिनियम की धारा 62 सहपठित धारा 86 के तहत आयोग द्वारा निर्धारित किया जाना अपेक्षित है।

(ग) सभी अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी,

(घ) सभी वितरण लाइसेंसधारी; और

(ई) राज्य भार प्रेषण केंद्र (SLDC):

परंतु यह कि इन विनियमों में किसी प्रावधान के अभाव में, आयोग, आयोग द्वारा निर्धारित अवधि के लिए केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (शुल्क की निबंधन एवं शर्ते) विनियम, 2024 के अंतर्गत विनिर्दिष्ट मानदंडों द्वारा निर्देशित होगा।

2.2. ये विनियम निम्नलिखित पर लागू नहीं होंगे :

(i) स्टैंड-अलोन जनरेटर : परंतु यह कि, धारा 63 के अंतर्गत आने वाले स्टैंडअलोन जनरेटर Standalone generator या कोई भी उत्पादन स्टेशन जो सहायक सेवाओं के रूप में कार्य करते हैं, जो लाइसेंसधारी और / या उपभोक्ताओं को अपनी बिजली की आपूर्ति के प्रयोजन के लिए शेड्यूलिंग, ऊर्जा मीटरिंग या लेखांकन के लिए एसआईडीसी की सेवाएं लेते हैं या नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र या ऐसे अन्य प्रयोजन के लिये, जैसा कि आयोग द्वारा समय-समय पर अधिदेशित किए जा सकते हैं, उन्हें इन विनियमों के तहत निर्दिष्ट शुल्क और प्रभार का भुगतान करना होगा।

(ii) ऐसे उत्पादन स्टेशन और पारेषण प्रणाली, जिनका टैरिफ, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित प्रतिस्पर्धी बोली दिशानिर्देशों के अनुसार प्रतिस्पर्धी बोली की पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित किया गया है तथा जिसे विवेकपूर्ण जांच के बाद अधिनियम की धारा 63 के अंतर्गत आयोग द्वारा अपनाया गया है।

2.3. इन विनियमों के अंतर्गत सभी कार्यवाहियां, सीएसईआरसी CSERC (कार्य संचालन) विनियम, 2009 और उसके अंतर्गत अधिनियमों के संशोधन द्वारा शासित होंगी।

3. परिभाषाएं : इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, –

3.1. “लेखा विवरण से अभिप्रेत है प्रत्येक वर्ष के लिए, निम्नलिखित विवरण, अर्थात-

कंपनी अधिनियम में निहित प्रपत्र या आवश्यकता के अनुसार तैयार किया गया बैलेंस शीट, लाभ और हानि खाता और नकदी प्रवाह विवरण, वैधानिक लेखा परीक्षकों द्वारा विधिवत प्रमाणित हो;

चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा विधिवत प्रमाणित समाधान विवरण, जो कंपनी के रूप में इकाई के कुल व्यय, राजस्व, परिसंपत्तियों और देनदारियों तथा आयोग द्वारा विनियमित प्रत्येक व्यवसाय और अन्य / अनियमित व्यवसाय संचालनों के लिए अलग-अलग व्यय, राजस्व, परिसंपत्तियों और देनदारियों के बीच समाधान दर्शाता है:

परंतु यह कि, यदि लाइसेंस शर्तों के अनुसार प्रत्येक लाइसेंस प्राप्त व्यवसाय के लिए और वित्तीय वर्ष 2026-27 के बाद प्रत्येक विनियमित व्यवसाय के लिए अलग-अलग लेखा विवरण प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो उत्पादक कंपनी या लाइसेंसधारी या एसएल. डीसी द्वारा दायर याचिकाओं को आयोग द्वारा याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद खारिज किया जा सकता है:

परंतु यह और कि जब तक एसएलडीसी  को राज्य एजेंसी के रूप में पृथक रूप से स्थापित नहीं किया जाता है, तब तक छत्तीसगढ़ राज्य बिजली पारेषण कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) के अंतर्गत पृथक इकाई के रूप में एसएलडीसी के लिए पृथक लेखा पुस्तकें सीएसपीटीसीएल द्वारा संधारित एवं प्रमाणित की जाएंगी,

3.2. “अधिनियम” से अभिप्रेत है बिजली अधिनियम, Electricity Act 2003 (2003 का 36) या उसमें किए गए कोई संशोधन या उसके बाद के कोई अधिनियमिति;

3.3. “अतिरिक्त पूंजीकरण” से अभिप्रेत है परियोजना के वाणिज्यिक संचालन की तिथि के बाद किए गए या किए जाने वाले अनुमानित पूंजीगत व्यय, जिसे आयोग द्वारा विवेकपूर्ण जांच के बाद स्वीकार किया गया है, जो विनियमन 19 के प्रावधानों के अध्यधीन है,

3.4. “समग्र राजस्व आवश्यकता” या “एआरआर” से अभिप्रेत है लाइसेंस प्राप्त और / या विनियमित व्यवसाय से संबंधित लागत, जिसे इस विनियमन के अनुसार, आयोग द्वारा निर्धारित टैरिफ और प्रभारों से वसूलने की अनुमति है;

3.5. “आवंटन मैट्रिक्स” में इस विनियमन के अध्याय 7 में विनिर्दिष्ट तत्व शामिल होंगे;

3.6. एकीकृत खान (खानों) के संबंध में “वार्षिक लक्ष्य मात्रा” या “एटीक्यू” से अभिप्रेत है ऐसी एकीकृत खान (खानों) से एक वर्ष के दौरान निकाले जाने वाले कोयले की मात्रा, जो खनन योजना में विनिर्दिष्ट मात्रा के 85 प्रतिशत के अनुरूप है,

परंतु यह कि, यदि कोयले की एकीकृत खदान (खदानें), खनन योजना के अनुसार कोयले की आपूर्ति के लिए तैयार है, किन्तु उत्पादन कंपनी के कारण से नहीं, बल्कि अन्य कारणों से इसमें बाधा उत्पन्न होती है, तो आयोग, वार्षिक लक्ष्य मात्रा में छूट दे सकता है।

3.7. “आवेदक” से अभिप्रेत है ऐसे लाइसेंसधारी या उत्पादन कंपनी, जिसने इस विनियमन और अधिनियम के अनुसार टैरिफ निर्धारण या ट्रक-अप के लिए याचिका दायर की है;

3.8. “लेखा परीक्षक” से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 139 या धारा 148 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य कानून के प्रावधानों के अनुसार, किसी उत्पादन कंपनी या ट्रांसमिशन लाइसेंसधारी या वितरण लाइसेंसधारी या एसएलडीसी द्वारा नियुक्त लेखा परीक्षक,

3.9. किसी उत्पादन केंद्र के मामले में किसी अवधि के संबंध में “उत्पादन केंद्र में सहायक ऊर्जा खपत” या “एयूएक्स” से अभिप्रेत है उत्पादन केंद्र के सहायक उपकरणों द्वारा खपत की गई ऊर्जा की मात्रा, जैसे कि संयंत्र और मशीनरी के संचालन के लिए उपयोग किए जा रहे उपकरण, जिसमें उत्पादन केंद्र का रिवचयार्ड और उत्पादन केंद्र के भीतर ट्रांसफार्मर की हानियां शामिल हैं, जिसे उत्पादन केंद्र की सभी इकाइयों के जनरेटर टर्मिनलों पर उत्पादित सकल ऊर्जा के योग के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है:

परंतु यह कि, सहायक ऊर्जा खपत में, उत्पादन स्टेशन पर आवासीय कॉलोनी और अन्य सुविधाओं को बिजली आपूर्ति के लिए उपभोग की गई ऊर्जा और उत्पादन स्टेशन पर निर्माण कार्यों के लिए उपभोग की गई ऊर्जा शामिल नहीं होगीः

परंतु यह और कि, पुनरीक्षित उत्सर्जन मानकों के अनुपालन के लिए सहायक ऊर्जा खपत, सीवेज उपचार संयंत्र और बाहरी कोयला हैंडलिंग संयंत्र (जेटी और संबंधित बुनियादी ढांचे) पर अलग से विचार किया जाएगा;

3.10. कोयला आधारित ताप बिजली उत्पादन स्टेशन के मामले में किसी अवधि के संबंध में “उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली के लिए सहायक ऊर्जा खपत” या “एयूएक्सई” से अभिप्रेत है इस विनियमन (एयूएक्सई) के मुख्य खंड के अंतर्गत सहायक ऊर्जा खपत के अतिरिक्त, कोयला आधारित ताप बिजली उत्पादन स्टेशन के उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली के सहायक उपकरण द्वारा खपत की गई ऊर्जा की मात्रा है; तथापि, “एयूएक्सई”, की गणना के प्रयोजन के लिए ईसीआर पर विचार नहीं किया जाएगा और ऊर्जा प्रभार पर इसके प्रभाव को, ईसीआर के माध्यम से पूरक टैरिफ के द्वारा निपटाया जाएगा,

3.11. उप-स्टेशन के मामले में किसी अवधि के संबंध में “उप-स्टेशन में सहायक ऊर्जा खपत” या “एयूएक्सएस” से अभिप्रेत है उप-स्टेशन की प्रकाश व्यवस्था, बैटरी चार्जिंग और सहायक उपकरणों के लिए खपत की गई ऊर्जा की मात्रा, जिसमें आवासीय कॉलोनी में खपत की गई ऊर्जा को छोडकर उप-स्टेशन के नियंत्रण कक्ष में खपत शामिल है,

3.12. “विलंबित भुगतान अधिभार की आधार दर से अभिप्रेत है भारतीय स्टेट बैंक की एक वर्ष के लिए उधार दर पर आधारित निधियों की सीमांत लागत, जो वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल माह से लागू होगी, जिसमें अवधि तथा पांच प्रतिशत की दर निहित है, और उधार दर आधारित निधियों की उपलब्धता के अभाव में, कोई अन्य व्यवस्था, जो प्रतिस्थापित किया जाये, जिसे केंद्र सरकार द्वारा, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट किया जाये, लागू होंगीः

परंतु यह कि, यदि चूक की अवधि, दो या अधिक वित्तीय वर्षों में आती है, तो विलंबित भुगतान अधिभार की दर, अलग अलग वर्षों में पडने वाली अवधि के लिए अलग अलग गणना की जाएगी।

3.13. “बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां” या “बीईएसएस परियोजना” से अभिप्राय होगा, उपयोगित पद्धति एवं तकनीकी प्रणालियों (प्रणालियो)/परियोजना, जो इलेक्ट्रोकेमिकल बैटरी जैसे कि (एसिड, लिवोन, ठोस अवस्था बैटरी, फ्लो बैटरी आदि) सुविधा उपलब्ध करती है कि बिजली के रूप में रासायनिक ऊर्जा भंडारण और संग्रहीत ऊर्जा को प्राप्त कर सके, जिसमें सहायक सुविधाएं (उदाहरण के लिए, ग्रिड समर्थन) शामिल हैं, किन्तु इन्हीं तक सीमित नहीं हैं;

3.14. “हितग्राही (लाभार्थी)” :

(क) किसी उत्पादन केंद्र के संबंध में अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति, जो स्टेशन द्वारा उत्पादित बिजली, वार्षिक नियत प्रभार और / या ऊर्जा प्रभार का भुगतान करके बिजली कय करता है;

(ख) पारेषण प्रणाली के संबंध में अभिप्रेत है दीर्घकालिक एवं मध्यमकालिक खुली पहुंच उपभोक्ता, जो कि छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग (छत्तीसगढ़ में राज्यान्तरिक खुली पंहुच) विनियम, 2011, समय-समय पर यथा संशोधित, में परिभाषित है, तथा इसमें ऐसे वितरण लाइसेंसधारी शामिल हैं, जिनका एसटीयू/पारेषण लाइसेंसधारी के साथ पारेषण सेवा अनुबंध है;

(ग) वितरण तार व्यवसाय के संबंध में, आपूर्ति कंपनी या लाइसेंसधारी या उपभोक्ता, जैसी भी स्थिति हो;

(घ) खुदरा आपूर्ति व्यवसाय के संबंध में, उपभोक्ता (ड.) एसएलडीसी के संबंध में, उत्पादन कंपनी या लाइसेंसधारी या खुले पहुंच उपभोक्ता, जो बिजली के पारेषण के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली का उपयोग करते हैं और / या बिजली के संचालन के लिए राज्य में लाइसेंस की वितरण प्रणाली का उपयोग करते हैं, जैसी भी स्थिति हो, और / या शेड्यूलिंग और वास्तविक समय ग्रिड संचालन, राज्य ऊर्जा लेखांकन, पूल खाते के संचालन आदि से संबंधित एसएलडीसी की सेवाओं का लाभ उठाते हैं,

3.15. “पूंजीगत लागत” से अभिप्रेत है पूंजीगत लागत, जो कि यथास्थिति, उत्पादन केंद्र या पारेषण या वितरण प्रणाली के संबंध में विनियम 18 में तथा एकीकृत खानों के संबंध में विनियम 54 में परिभाषित है,

3.16. “पूंजी निवेश योजना” में विनियम 7 में यथा विनिर्दिष्ट तत्व शामिल होंगे,

3.17. “कानून में परिवर्तन” से अभिप्रेत है निम्नलिखित में से किसी भी घटना का घटित होना है :

(1) भारतीय कानून का अधिनियमन, प्रवृत्त करना, अंगीकृत करना, प्रख्यापित करना, संशोधन, उपांतरण या निरसन; या

(2) किसी विद्यमान भारतीय कानून को अंगीकृत करना, संशोधित करना, उपान्तरण करना, निरसन करना या पुनः अधिनियमित करना;

(3) किसी सक्षम न्यायालय, न्यायाधिकरण या भारतीय सरकारी संस्था द्वारा भारतीय कानून की व्याख्या में परिवर्तन, जो ऐसी व्याख्या के लिए कानून के अंतर्गत अंतिम प्राधिकारी है; या

(4) किसी सक्षम वैधानिक प्राधिकारी द्वारा, परियोजना के लिए उपलब्ध या प्राप्त किसी सहमति या अनुमति या अनुमोदन या लाइसेंस की किसी शर्त या अनुबंध में परिवर्तन,

(5) भारत सरकार और किसी अन्य संप्रभु सरकार के बीच किसी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौते या संधि में परिवर्तन या प्रवृत्त करना, जिसका इन विनियमों के तहत विनियमित उत्पादन स्टेशन या लाइसेंसधारियों या एसएलडीसी पर प्रभाव पड़ता हो,

3.18. “आयोग” से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा 82 की उप-धारा (1) में निर्दिष्ट छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग;

3.19. “नियंत्रण अवधि” से अभिप्रेत है आयोग द्वारा निर्धारित बहु-वर्षीय अवधि, जो 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2030 तक है; 3.20. “कट-ऑफ तिथि” से अभिप्रेत है एकीकृत खदानों के मामले को छोड़कर परियोजना के वाणिज्यिक संचालन की तिथि से छत्तीस महीने के बाद समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन :

chatur postDecember 19, 2025
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