Naxal Front रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। इस बीच 9 जून की सुबह नक्सलियों ने सुकमा में बड़ी घटना को अंजाम दे दिया है। कोंटा क्षेत्र में पुलिस की सर्चिंग पार्टी नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम की चपेट में आ गई। इस सर्चिंग पार्टी का नेतृत्व एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे कर रहे थे। टीम में एसडीओपी भानुप्रताप चंद्राकर और थानेदार सोनल ग्वाल समेत कई जवान आ गए।
विस्फोट की चपेट में आने से गंभीर रुप से घायल हुए आकाश राव शहीद हो गए। वहीं, बाकी लोगों का ईलाज चल रहा है। सरकार की तरफ से जारी बयान के अनुसार अन्य घायलों की स्थिति खबरे से बाहर बताई जा रही है। नक्सल मोर्चे पर शहीद होने वाले आकाश राव तीसरे एडिशनल एसपी हैं। इससे पहले वर्ष 2000 और 2011 में दो एएसपी शहीद हुए थे। वहीं, 2009 में एक एसपी भी शहीद हो चुके हैं।
छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त कराने के लिए अब तक सैकड़ों जवानों और अफसरों ने शहादत दी है। इनमें एसपी (आईपीएस) वीके चौबे भी शामिल हैं। घटना 2009 की है, तब वीके चौबे राजनांदगांव जिला के एसपी थे। मोहला-मानपुर में नक्सल गतिविधियों की सूचना पर जवानों के साथ निकली पुलिस पार्टी को नक्सलियों ने रास्ते में ही घेर लिया। इस घटना में एसपी चौबे समेत 29 जवान शहीद हो गए थे।
एएसपी भास्कर दीवान नक्सल मोर्चे पर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के साल ही शहीद हुए थे। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बना था, उसी साल तीन फरवरी को 2000 में भास्कर दीवान शहीद हुए थे। भास्कर दीवान बिलासपुर के रहने वाले थे। घटना नारायणपुर में हुई थी, तब नारायणपुर अलग जिला नहीं था बल्कि बस्तर जिला का हिस्सा था। वहां बढ़ती नक्सली घटनाओं को देखते हुए सरकार ने नारायणपुर में एसडीओपी के बाद एडिशनल एसपी की पदस्थापना की। नक्सलियों ने तीन फरवरी को विस्फोट करके पुलिस की गाड़ी उड़ा दी। इस घटना में भास्कर दीवान के साथ 24 जवान शहीद हो गए थे।
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद नक्सल मोर्चे पर शहीद होने वाले राजेश पावर पहले एएसपी हैं। राजेश पवार गरियाबंद में पदस्थ थे। नक्सलियों की बैठक की सूचना पर घेराबंदी करने निकले एएसपी राजेश पवार और पुलिस पार्टी का मुठभेड़ हो गया। इस घटना में राजेश पावर समेत 11 जवान शहीद हो गए थे।