Naxalite surrender रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर बढ़ते दबाव का असर नक्सली संगठन पर दिखने लगा है। नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी की सदस्य और कुख्यता नक्सली कमांडर सुजाता ने सरेंडर कर दिया है। कौन है सुजाता, कौन है सुजाता का पति और सुजाता की क्रुरता की तुलना किससे होती है, आइए हम विस्तार से बताते हैं….
सुजाता की उम्र करीब 62 साल है। एक करोड़ रुपए से अधिक की इनामी सुजाता 42 साल से नक्सली संगठन में सक्रिय थी। छत्तीसगढ़ के साथ ही कई राज्यों की पुलिस उसकी तलाश में थी। सेंट्रल जांच एजेंसी एनआईए की भी वांटेड की सूची में सुजाता का नाम शामिल है।
सुजाता नक्सलियों के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के सदस्य किशन जी की पत्नी है। किशन जी को 2011 में सुरक्षबलों ने मार गिराया था। सुजाता के आत्मसमर्पण को नक्सल मोर्चे पर सरकार और सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
सुजाता सेंट्रल कमेटी की सदस्य के रुप में दक्षिण सब जोनल कमेटी की इंचार्ज है। वह लंबे समय तक बस्तर में सक्रिय रही। बीते 20 वर्षों के दौरान सुरक्षाबलों पर हुए कई बड़े हमलों में सुजाता का नाम आया। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश व ओडिशा पुलिस की भी मोस्टवांटेड की सूची में शामिल है।
पुलिस अफसरों के अनुसार सुजाता खुद के खुंखार नक्सली है। हिड़मा जैसे खुंखार नक्सलियों को उसी ने ट्रेनिंग दिया है। सुजाता को बेहद की क्रूर माना जाता है, इसी वजह से उसकी तुलना चंदन तस्कर विरप्पन से भी किया जाता है। सूत्रों के अनुसार सुजाता ज्यादातर समय बस्तर में ही रही है।
2024 में सुजाता की गिरफ्तारी की खबर उड़ी थी। बताया जाता है कि सुजाता अक्टूबर 2024 में इलाज के लिए तेलंगाना गई थी, तभी उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई, लेकिन सुजाता ने खुद ही बयान जारी कर अपनी गिरफ्तारी का खंडन किया था।
नक्सल मामलों के जानकार पुलिस अफसरों के अनुसार सुजाता के सरेंडर करने से नक्सली संगठन और कमजोर पड़ जाएगा। पहले ही नक्सलियों के महासचिव बसवराजू को छत्तीसगढ़ पुलिस ढेर कर चुकी है। इस साथ दूसरे भी बड़े नक्सली लीडर मारे गए हैं। इसका असर नक्सली संगठन और उनकी गतिविधियों पर पड़ेगा।
पुलिस अफसरों के अनुसार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में पुलिस और केंद्रीय बलों ने नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रखा है। इस साल सौ से ज्यादा नक्सलियों को फोर्स ने ढेर किया है। इनमें बड़े लीडर भी शामिल है। बताया जा रहा है कि इससे नक्सली संगठन में भगदड़ की स्थित बनी हुई है। हर महीने दर्जनों नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। सुजाता के सरेंडर की वजह भी छत्तीसगढ़ के इसी दबाव को माना जा रहा है।
बस्तर के बाद अब छत्तीसगढ़ के दूसरे हिस्सों में भी नक्सलियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। दो दिन पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने ओडिशा बार्डर से लगे गरियाबंद जिला में 10 नक्सलियों को मार गिराया है। इसमें ओडिशा कमेटी का सचिव भी शामिल है।