PMLA न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तरफ से दाखिल याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों को चुनौती दी थी। इस मामले में पूर्व सीएम की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की।
ईडी के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तरफ से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई करने से मना कर दिया। बत दें कि इससे पहले बघेल और उनके पुत्र चैतन्य ने एक याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में पूर्व सीएम ने अग्रिम जमानत और चैतन्य ने जमानत की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर भी सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने जमानत और अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट जाने का आदेश दिया था।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तरफ से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच में सुनवाई हुई। दोनों जजों की पीठ ने कहा कि पीएमएलए के प्रवधानों में कोई खामी नहीं है। बैंच ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को ऐसा लग रहा है कि प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है तो वे हाईकोर्ट जा सकते हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ईडी की तरफ से इस मामले में बार-बार पूरक चालान पेश किए जाने पर आपत्ति की। उन्होंने कहा कि ईडी कुछ महीनों के अंतराल पर पूरक चालान पेश कर देती है इससे ट्रायल में देर होती है। सिब्बल के इस तर्क पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आगे की जांच आरोपी के पक्ष में भी हो सकती है, शर्त यह है कि इसका दुरुपयोग न हो।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के इकलौते पुत्र को 18 जुलाई को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। चैतन्य अभी रिमांड पर जेल में हैं। चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपनी गिरफ्तारी का भी डर सताने लगा है। इसे देखते हुए उन्होंने पिछले सप्ताह अग्रीम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। चैतन्य की तरफ से भी जमानत याचिका लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत और अग्रीम जमानत पर सुनवाई करने से मना कर दिया था।