PMSG-MBY  तीन पैरा के Letter में पावर कंपनी ने पहले पैरा में दिया सलाह दूसरे में आदेश और तीसरे में धमकी: मामला पहुंचा चेयरमैन डॉ. रोहित यादव तक

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2025-12-11 | 13:04h
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PMSG-MBY  रायपुर। छत्‍तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी ने पावर कंपनियों के स्‍टाफ पर रुफ टॉप सोलर प्‍लांट लगाने का दबाव बढ़ा दिया है। इसके लिए कंपनी ने कंपनी के कर्मचारियों को बिजली बिल पर मिलने वाली विशेष रियायत भी बंद कर दी गई है। इसके खिलाफ कंपनी के स्‍टाफ में रोष बढ़ गया है। छत्‍तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्‍त कर्मचारी- अधिकारी संघ ने इसको लेकर कंपनी के चेयरमैन डॉ. रोहित यादव को एक पत्र लिखा गया है।

विद्युत सेवानिवृत्‍त कर्मचारी अधिकारी संघ के प्रदेश महमंत्री पुनारद राम साहू ने यह पत्र लिखा है। इसमें उन्‍होंने कहा है कि विद्युत कंपनी के सभी नियमित अधिकारी / कर्मचारियों को अपने आवासीय परिसर में रूफटाप सोलर पावर प्‍लांट स्थापित करने की सलाह दी जाती है। तृतीय पैरा में उल्लेखित है कि समस्त कर्मचारी PMSG-MBY योजना के अंतर्गत निम्न में से किसी एक विकल्प का चयन करते हुए रूफटाप सोलर प्‍लांट की स्थापना किया जाना सुनिश्चित करें ।

अंतिम पैरा में उल्लेखित है कि समस्त अधिकारी / कर्मचारियों से अनुरोध है कि 3 माह के भीतर अपने परिसरों में रूफटाप सोलर प्‍लांट स्थापित करें अन्यथा पावर कंपनी की तरफ से दी जा रही बिजली बिल में विशेष रियायत की सुविधा को स्थगित किए जाने पर विचार किया जाएगा ।

महोदय, पत्र की भाषा स्वतः ही अन्र्तविरोधी/असंगत (contraductory) है, द्वितीय पैरा में सलाह दिया गया  है अर्थात मानने अथवा न मानने के लिए कोई बाध्यता नहीं हैं। तृतीय पैरा में सुनिश्चित करें, उल्लेखित है अर्थात आदेश है।

अंतिम पैरा में उल्लेखित है कि विशेष रियायत की सुविधा को स्थगित किए जाने पर विचार किया जाएगा – यह धमकी जैसा है।

महोदय, उक्त आदेश की भाषा पूरी तरह कानून की अवधारणा के विपरीत प्रतीत होता है जिसमें सलाह भी दिया जा रहा है, आदेश भी दिया जा रहा है और धमकी भी दी जा रही है।

संघ की जानकारी अनुसार देश के प्रधानमंत्री द्वारा घोषित सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम जनता के लिए स्वैच्छिक हैं, इसे किसी कानून द्वारा देश के किसी आम नागरिक, केंद्र सरकार व अधीनस्थ निगम मंडलों के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है। इसके तहत कियान्वयन के लिए जिम्मेदार विभागों / एजेंसी द्वारा देश के सभी क्षेत्रों के नागरिकों अर्थात बिजली उपभोक्ताओं को (कर्मचारी अधिकारी भी शामिल) योजना का लाभ लेने प्रोत्साहित कर इसके लिए प्रेरित करने की मंशा है न कि किसी केन्द्र/राज्य/ संस्थाचारियों को इसके लिए बाध्यकारी बनाया गया है।

ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए इस तरह के आदेश जारी करना न केवल सरकार की भावना के विपरीत है साथ ही इसकी वैधानिकता पर भी प्रश्न चिन्ह उपस्थित करता है।

संदर्भित पत्र कमांक 02 में द्वारा उपरोक्त आदेश के हवाले पंजीयन न कराए जाने वाले अधिकारियों /कर्मचारियों को पावर कंपनी द्वारा दी जा रही बिजली बिल में विशेष रियायत की सुविधा को नवंबर 2025 के खपत पर जारी होने वाले देयक जो कि 1 दिसंबर 2025 से जारी होंगे से स्थगित किया जाएगा ।

महोदय, संघ की जानकारी के अनुसार डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी के मैदानी कार्यालयों द्वारा या ईआईटीसी द्वारा SAP के बिलिंग माड्‌यूल में परिवर्तन कर अक्टूबर के खपत पर ही विशेष रियायत बंद कर दिया गया है, जो कि आदेश की स्पष्ट अवहेलना होने से आपत्तिजनक है और कार्यवाही योग्य है ।

महोदय, संघ की जानकारी अनुसार संदर्भित आदेश कंपनी के बोर्ड आफ डायरेक्टर द्वारा अनुमोदित नहीं है, ऐसी स्थिति में नीति में एकतरफा परिवर्तन कैसे किया जा सकता है।

महोदय, पावर कंपनी के कर्मचारियों अधिकारियों को बिजली खपत पर मिलने वाली सुविधा पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश विद्युत मंडल द्वारा फिन्ज बेनिफिट के तहत विद्युत खपत पर विशेष रियायत के उद्देश्य से निर्णय लेकर आदेश पारित किए गए थे जो कि लागू है, जिसे कंपनी द्वारा स्वतः ही समाप्त नहीं किया जा सकता है। ऐसी सुविधा अन्य अनेक प्रदेशों व संस्थानों द्वारा प्रदत्त है ।

महोदय, पावर कंपनी के कर्मचारियों अधिकारियों को प्रदान की जाने वाली सुविधा में बढोतरी या कमी होल्डिंग कंपनी ही कर सकती है, होल्डिंग कंपनी के ट्रांसमिशन कंपनी में विलय होने के बाद ऐसे निर्णय ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा ही लिए जा सकते हैं क्योंकि ये सुविधा तीनो ही कंपनी के अधिकारियों / कर्मचारियों को पूर्ववर्ती समय से प्राप्त है।

और तो और पावर कंपनी के आवासगृहों में रहने वाले कर्मचारियों अधिकारियों के विद्युत खपत में दी जा रही विशेष छूट समाप्त कर दिया गया है जबकि कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को आवंटित आवासगृहों में किसी भी प्रकार को छेड़छाड़ करने का अधिकार संबंधित रहवासी कर्मचारी को है ही नही। यदि कंपनी की मंशा वास्तव में सरकार के निर्णयों को लागू करने की है तो उसे सर्वप्रथम तीनों कंपनियों के सभी कार्यालयों, सब स्टेशनों, आवास गृहों में स्वयं से लगाया जाना चाहिए। ज्ञातव्य हो कि मुख्य अभियंता, प्रशिक्षण (प्रशि. एवं अनु.) कार्यालय में लगे सोलर प्‍लांट का अवलोकन करने की कृपा करेंगे जो कि वहां बैठक तकनीकी दक्ष जिम्मेदारों की अनदेखी से रखरखाव के अभाव में मृतप्राय है, ऐसी जानकारी मिली है।

महोदय, संघ आपका ध्यान Madhya Pradesh Reorganisation Act 2000 के बिन्दु कमांक 69 में उल्लेखित प्रावधान की ओर आकृष्ट करना चाहता है, जिसके तहत

“Provided that the conditions of service applicable immediatly before the appointed day in the case of any person deemed to have been allocated to the state of Madhya Pradesh or to the state of Chhattisgarh under Section 68 shall not be varied to his disadvantaged except with the previous approval of the Central government.”

इस क्रम, विद्युत अधिनियम 2003 के बिन्दु कमांक 133 (2) में उल्लेखित प्रावधान पर भी आपका ध्यानाकृष्ट करना चाहते हैं –

“Provided that such terms and conditions on the transfer shall not in any way be less favourable than those which would have been applicable to them if there had been no such transfer under the transfer scheme.”

इसके अतिरिक्त हम आपका ध्यान “छत्तीसगढ शासन उर्जा विभाग के द्वारा 31.03.2010 द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल अंतरण योजना नियम, 2010 जारी अधिसूचना के कंडिका अंतरिती कंपनी में कार्मिकों का संविलियन के (ङ)” की ओर भी आकृष्ट करना चाहेंगे, जिसमें उल्लेखित है कि “अधिनियम और इस योजना के प्रावधानों के अध्यधीन रहते हुए, अंतरिती, इस योजना के अंतर्गत अंतरिती, का अंतरित कर्मचारियों की सेवाशर्तों में संशोधन करने या प्रशासित करने वाली, नया विनियम निर्मित करने के लिए सशक्त होगा तथापित उनकी सेवाशर्तों, वेतन भत्ते तथा अन्य आर्थिक परिलाभ जिसमें पेंशन, सेवाएं प्रसुविधाएं (अंतिम अधिलाभ) आदि सम्मिलित हैं नियत तिथि के पश्चात किसी भी परिस्थिति में उक्त अंतरण के ठीक पूर्व उनके लिए लागू सेवा शर्तों से कम स्तर की नहीं होगी।”

स्पष्ट है कि उपरोक्त संदर्भित आदेश, उपरोक्त उल्लेखित तथ्यों के आलोक में डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने, अन्य कंपनियों के कर्मचारियों / अधिकारियों पर लागू न होने के बावजूद लागू किए जाने से अवैधानिक श्रेणी में हैं, जिसे तत्काल निरस्त कर विवाद का पटाक्षेप करते हुए स्वस्थ मन व अंत:करण से प्रधानमंत्री की योजना का प्रभावशाली ढंग से आम उपभोक्ताओं (कर्मचारियों अधिकारियों, पेंशनरों सहित) को प्रोत्साहित करने का कार्य किया जाना चाहिए जिससे कर्मचारियों अधिकारियों सहित आम उपभोक्ताओं के मन में भयादोहन न होने पाए और न ही सरकार के प्रति विपरीत धारणा ही बने। यदि कंपनी प्रबंधन आवश्यक समझे तो इस योजना के प्रचार प्रसार प्रोत्साहन के कार्य में पेंशनरों से भी सहयोग लिया जा सकता है, जिसके लिए हम तत्पर हैं ।

chatur postDecember 11, 2025
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