Power रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में बिजली की दरें तय करने के लिए चल रही जनसुनवाई में आज बिजली कंपनियों के कर्मचारी, अधिकारी और इंजीनियरों के संगठन शामिल हुए। संगठनों ने कंपनी प्रबंधन की फैसलों और कार्यों पर जमकर निशाना साधा।
छत्तीसगढ़ रिटायर्ड इंजीनियर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि पावर कंपनी प्रबंधन विद्युत नियामक आयोग को ही कुछ नहीं समझता है। आयोग के आदेशों की अनदेखी और अवहेलना करता है। एसोसिएशन की तरफ से आयोग के समक्ष पेश हुए पीएन सिंह ने सबसे पहले पेंशन ट्रस्ट का मुद्दा उठाया।
इंजीनियर पीएन सिंह ने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट में 21,741 करोड़ होना चाहिए था परंतु उस समय ट्रस्ट के पास लगभग 6600 करोड़ था। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के पुनर्गठन के समय उत्तरवर्ती कंपनियों पर लगभग 1894 करोड़ ट्रस्ट का बकाया था जो बढ़कर लगभग 15,200 करोड़ हो गया है। विद्युत वितरण कंपनी लगभग 6500 करोड़ के लिए टैरिफ में वृद्धि की बात कर रही है परंतु ग्रेच्युटी एंड पेंशन फंड ट्रस्ट के बकाया राशि के संबंध में कोई कंपनी कुछ नहीं कह रही है।
ग्रेच्युटी एवं पेंशन फंड ट्रस्ट के घाटे में जाने के पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल अभियंता संघ ने अपने 11. 07.2018 द्वारा आयोग से निवेदन किया था कि इस स्थिति में सुधार किया जाए।
आयोग ने वर्ष 2019-20 के टैरिफ आदेश में स्वयं के रेग्युलेशन का उल्लंघन कर कंपनियों को ग्रेच्युटी एवं पेंशन फंड ट्रस्ट में कम राशि जमा करने के लिए आदेशित किया, जिसकी वजह से 200 करोड़ से अधिक की राशि उस वर्ष कम जमा हुई।
छत्तीसगढ़ राज्य रिटायर्ड पॉवर इंजीनियर्स-आफीसर्स एसोसियेशन ने रिव्यू पिटीशन 51/2019 दायर की, जिसकी सुनवाई में विलंब के कारण निष्फल / बेकार (Infructuous) हो गया जबकि आवेदन का निराकरण छः माह में कर दिया जाना चाहिए था।
इन तमाम वजहों से ग्रेच्युटी एवं पेंशन फंड ट्रस्ट में निर्धारित राशि का मात्र 30 प्रतिशत है, जिसे 100 प्रतिशत की स्थिति में लाने का निवेदन है।
कंपनीकरण के बाद 10 वर्षों में 2085 करोड़ ग्रेच्युटी एवं भविष्य निधि फंड ट्रस्ट (G&PF) की संचित निधि से रू. 2085 करोड़ भुगतान के लिए खर्च हुए। यह सब होल्डिंग कंपनी के परिपत्र दिनांक 24.04.2010 के विरुद्ध हुआ। ग्रेच्युटी एवं भविष्य निधि फंड (G&PF) को सेल्फ सफीशियेंट (Self sufficient) बनाने की जगह उसे और कमजोर किया गया। ग्रेच्युटी एवं भविष्य निधि फंड से इस तरह निकली राशि का वर्षवार विवरण निम्नानुसार है-
| वर्ष 2010-11 | (-) 6 करोड़ |
| वर्ष 2011-12 | (-) 95 करोड़ |
| वर्ष 2012-13 | (-) 98 करोड़ |
| वर्ष 2013-14 | (-) 165 करोड़ |
| वर्ष 2015-16 | (-) 28 करोड़ |
| वर्ष 2017-18 | (-) 136 करोड़ |
| वर्ष 2018-19 | (-) 571 करोड़ |
| वर्ष 2019-20 | (-) 478 करोड़ |
| वर्ष 2020-21 | (-) 250 करोड़ |
| वर्ष 2021-22 | (-) 258 करोड़ |
| 2085 करोड़ |
उपरोक्त राशि ब्याज सहित (Carying cost) ग्रेच्युटी एवं भविष्य निधि फंड ट्रस्ट को वापस की जाये, कुछ राहत मिल सकेगी।
घाटे में डूबी हुई विद्युत कंपनियां 250 करोड़ खर्च करके नया रायपुर में नया मुख्यालय बनाने के लिए पैसा मांग रही है। इस योजना में पूरा खर्च 500 करोड़ होगा और यह सभी आम उपभोक्ताओं से वसूल होगा। राज्य शासन के कर्मचारियों को शहर नया रायपुर ले जाने के लिए बस की सुविधा प्राप्त है अगर यही सुविधा विद्युत कंपनी के कर्मचारियों को दी गई तो इसका खर्च आम उपभोक्ताओं से अलग से वसूल होगा। कम से कम 20 बसे प्रतिदिन लगेगी, जो खर्च / घाटा बताया जा रहा है उसकी भरपाई के लिए विद्युत दरें कम से कम 50 प्रतिशत बढ़ जाएगी।
अभी तो यह बताया ही नहीं गया है कि इस भवन के साज-सज्जा में कितना खर्च होगा। जो मॉडल दिखाया गया है, उसमें कॉच का बहुत उपयोग बताया गया है। इससे बिजली का खर्च कम से कम वर्तमान खर्च का दुगना हो जाएगा। 11 मंजिल भवन में लिफ्ट भी लगेगी, इससे भी बिजली का खर्च बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि यह बताया गया है कि गुढ़ियारी के आफिस डंगनिया में स्थानांतरित किए जाएंगे लेकिन गुढ़ियारी की जमीन का क्या होगा यह स्पष्ट नहीं है। हमने सुना है कि वहां हाउसिंग बोर्ड अपनी तरफ से व्यवसायिक परिसर बनाएगा। विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 132 में कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए की गई व्यवस्था जो सम्पत्तियों पर आधारित है, वह समाप्त हो जाएगी। पंजाब में पॉवर कंपनी की सम्पत्ति बेचने के प्रस्ताव पर आंदोलित कर्मचारियों की वजह से यह प्रक्रिया रूकी हुई है। बिदाई के कगार पर बैठे तीनों कंपनियों के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स ने अपने इस अविवेकपूर्ण निर्णय से सभी का भविष्य खतरे में डाल दिया है। अतः इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
पीएन सिंह ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित ने तीन कंपनियों को ठेका दिया है। इसकी पहली शर्त यह थी कि स्मार्ट मीटर सबसे पहले शासकीय विद्युत कनेक्शन में लगाए जाएंगे। स्मार्ट मीटर लगाने के पीछे एक कारण यह भी था कि शासकीय विद्युत कनेक्शन का देयक लंबी अवधि तक लंबित रहता है। अभी तक शासकीय कनेक्शनों में पूरे स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं। स्मार्ट मीटर लगाने के लिए आयोग ने एसओपी बनाने के लिए रेग्युलेशन में निर्देश दिए थे। करीब-करीब 55 प्रतिशत अशासकीय विद्युत कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लग चुके हैं परंतु एसओपी तब बनी जब करीब-करीब 25 लाख मीटर लग चुके थे।
लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में जनवरी 2026 तक स्थिति निम्नानुसार है –
स्वीकृत स्मार्ट मीटर 5962115
कुल स्थापित स्मार्ट मीटर 3384390
शासकीय विद्युत कनेक्शन जोकि 1.5 लाख से कम है वहां केवल 30 प्रतिशत स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। स्मार्ट मीटर के लिए जो भुगतान करना है एकल फेस मीटर के लिए 80 से 90 के बीच में है। इन मीटर्स का उपयोग नहीं हुआ है लेकिन करीब 200 करोड़ का भुगतान ठेकेदार हो गया है।
पुराने मीटर के वाचन, बिलिंग एवं कलेक्शन का भुगतान हो रहा है। साथ ही स्मार्ट मीटर के ठेकेदारों को भी करीब रू. 200 करोड़ हो चुका है। इस दोहरे खर्च को कौन वहन करेगा।
स्मार्ट मीटर के भुगतान में केवल मीटर का किराया ही नहीं है। इसमें मीटर का किराया, वाचन, बिलिंग, कलेक्शन तथा उसे छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के खाते में जमा करना भी है। बिना काम के भुगतान हेतु कौन जिम्मेदार है। छत्तीसगढ़ में 20 लाख बी.पी.एल. उपभोक्ता तथा 10 लाख सामान्य उपभोक के बिल 100 से भी कम रहते हैं, इस तरह करीब 30 लाख उपभोक्त यहां स्मार्ट मीटर लगाने का क्या मतलब। बीपीएल उपभोक्ता के देयक भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
भारत सरकार शीघ्र ही एक योजना लागू करने जा रही है, उसमें बी.पी.एल. प्रधानमंत्री आवास एवं मुख्यमंत्री आवास योजना वाले घरों पर सोलर पेनल 2 किलोवॉट के लगने वाले है। इससे इनके यहां लगे स्मार्ट मीटर बेमतल जाएंगे। 8000 के मीटर का अनावश्यक खर्च कौन भरेगा। कम से कम इतना त ही सकता है कि शेष बचे बीपीएल व छोटे उपभोक्तओं के यहां इस खर्च योजना को स्थगित कर दिया जाए।