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रायपुर में नारी शक्ति का ‘महा-संग्राम’: जन आक्रोश पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब, सीएम साय बोले- “महिला विरोधी है कांग्रेस का डीएनए”

रायपुर भाजपा महिला मोर्चा जन आक्रोश रैली

रायपुर (छत्तीसगढ़): राजधानी की सड़कों पर आज एक अलग ही मंजर देखने को मिला। मौका था भाजपा महिला मोर्चा द्वारा आयोजित ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ का। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध में स्वर बुलंद करने वाले विपक्षी दलों के खिलाफ छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति ने हुंकार भरी। हजारों की संख्या में जुटी महिलाओं ने न केवल रायपुर की सड़कों पर पैदल मार्च किया, बल्कि कांग्रेस के पुतले का दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का प्रहार: “विपक्ष को रास नहीं आ रहा महिला नेतृत्व”

इनडोर स्टेडियम से शुरू हुई इस विशाल रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करके कांग्रेस और इण्डी गठबंधन ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है।

“कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि साधारण परिवार की महिलाएं सदन में पहुंचें। उन्हें गांधी परिवार के अलावा किसी अन्य महिला का नेतृत्व स्वीकार्य नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने महिलाओं को 33% आरक्षण देकर उन्हें उनका हक दिया है, जिसे रोकने का पाप कांग्रेस ने किया है।” — विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

खबर के प्रमुख बिंदु (Key Highlights)


नेताओं ने क्या कहा?

1. किरण देव (प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा): “प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प 2047 तक भारत को विकसित बनाना है, और यह महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। कांग्रेस महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक समझती है।”

2. डॉ. सरोज पाण्डेय (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष): “नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोकना देश की आधी आबादी के अधिकारों पर डकैती डालने जैसा है। आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं अपने अपमान का बदला लेने के लिए सड़कों पर हैं।”

3. अरुण साव (डिप्टी सीएम): “कांग्रेस की मानसिकता महिलाओं को चारदीवारी में कैद रखने की है। जब-जब महिलाओं के सशक्तिकरण की बात आती है, कांग्रेस गद्दारी करती है।”


क्यों महत्वपूर्ण है यह विरोध प्रदर्शन?

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो छत्तीसगढ़ में महिला वोटर्स एक बड़ा निर्णायक कारक हैं। भाजपा इस मुद्दे के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह महिलाओं के प्रति अधिक संवेदनशील है। पदयात्रा में लक्ष्मी रजवाड़े, तोखन साहू, केदार कश्यप और अजय चंद्राकर जैसे दिग्गजों की मौजूदगी दर्शाती है कि पार्टी इस मुद्दे को आगामी चुनावों तक जीवित रखना चाहती है।

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