रायपुर। राजधानी रायपुर की सघन आबादी और जमीन की बढ़ती कमी को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। अब शहर के बीचों-बीच बिजली सप्लाई के लिए विशालकाय और बदसूरत दिखने वाले हाईटेंशन टावरों के बजाय स्लीक और सुंदर ‘मोनो पोल‘ (Mono Pole) नजर आएंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर ऊर्जा विभाग ने इसका सफल परीक्षण रायपुर के मेटल पार्क (सिलतरा) में किया है।
‘शोले‘ स्टाइल ड्रामों पर लगेगा ब्रेक
अक्सर खबरें आती हैं कि कोई व्यक्ति अपनी मांगें मनवाने या शराब के नशे में हाईटेंशन टावर पर चढ़ जाता है। पुराने टावरों में सीढ़ियां और पकड़ने की जगह होने के कारण उन पर चढ़ना आसान होता था। लेकिन 100 फीट ऊंचे ये मोनो पोल चिकने (Smooth Surface) हैं। इन पर बिना विशेष उपकरणों के चढ़ना नामुमकिन है, जिससे ‘टावर ड्रामों’ और बड़ी दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी।
| विशेषता | पुराना टावर | नया मोनो पोल |
|---|---|---|
| जमीन की जरूरत | 2000 वर्गफीट तक | मात्र 50 वर्गफीट |
| सुरक्षा | चढ़ना आसान (खतरनाक) | चढ़ना नामुमकिन (सुरक्षित) |
| दिखावट | भारी और बदसूरत | स्लीक और आधुनिक |
| उपयोगिता | खुले मैदानों के लिए | सघन शहरी क्षेत्रों के लिए बेस्ट |
2000 vs 50 वर्गफीट: जमीन की महा-बचत
पुराने ईएचटी (EHT) टावर लगाने के लिए करीब 1 से 2 हजार वर्गफीट जमीन की जरूरत होती थी, जिसे लेकर अक्सर शहरी इलाकों में विवाद होता था।
- नया बदलाव: मोनो पोल के लिए महज 50 वर्गफीट जमीन पर्याप्त है।
- फायदा: इससे न केवल पारेषण लाइनों का विस्तार आसान होगा, बल्कि सड़क चौड़ीकरण जैसे प्रोजेक्ट्स में भी बाधा नहीं आएगी।
8 करोड़ की लागत और भविष्य की तैयारी
मेटल पार्क सिलतरा में 250 मीटर लंबी लाइन को 132/33 केवी के उपकेन्द्र से जोड़कर ऊर्जीकृत कर दिया गया है। ट्रांसमिशन कंपनी ने कैपिटल इंवेस्टमेंट प्लान के तहत 8 करोड़ रुपये की लागत से इसे तैयार किया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला के अनुसार, आने वाले समय में रायपुर के अन्य सघन इलाकों में भी इसी तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
तकनीकी और विजुअल मजबूती
ये पोल न केवल कम जगह घेरते हैं, बल्कि देखने में भी किसी आधुनिक पिलर की तरह सुंदर लगते हैं। सघन औद्योगिक क्षेत्र उरला-सिलतरा में इसका सफल संचालन यह साबित करता है कि अब छत्तीसगढ़ का पावर सेक्टर आधुनिक वैश्विक मानकों को अपना रहा है।
क्या है मोनो पोल तकनीक?
साधारण शब्दों में कहें तो मोनो पोल (Mono Pole) एक विशाल, एकल (Single) खंभा होता है, जिसे स्टील या गैल्वेनाइज्ड लोहे से बनाया जाता है। यह बिजली के पुराने ‘लैटिस टावरों’ (चार पैरों वाले लोहे के ढांचे) का आधुनिक और स्मार्ट विकल्प है।
इसकी 4 मुख्य विशेषताएं जो इसे अलग बनाती हैं:
- एकल संरचना (Single Structure): पुराने टावरों की तरह इसमें चार पैर नहीं होते, बल्कि यह एक ही मजबूत खंभे पर टिका होता है। इसी कारण यह बहुत कम जगह घेरता है।
- स्लीक डिजाइन: यह नीचे से चौड़ा और ऊपर की तरफ पतला होता है। इसकी डिजाइन ऐसी होती है कि तेज हवा और तूफान के दबाव को आसानी से झेल सके।
- आधुनिक पारेषण (Transmission): इसके जरिए 132/33 केवी जैसी अति-उच्च दाब (High Tension) की लाइनें सुरक्षित रूप से खींची जा सकती हैं।
- ट्यूबलर डिजाइन: यह अंदर से खोखला लेकिन बेहद मजबूत होता है। इसकी सतह इतनी चिकनी होती है कि सुरक्षा के लिहाज से इस पर चढ़ना लगभग नामुमकिन है।
“रायपुर जैसे तेजी से बढ़ते स्मार्ट शहर में जहां सड़कों का चौड़ीकरण एक बड़ी चुनौती है, वहां ये मोनो पोल ‘गेम चेंजर’ साबित होंगे। पुराने टावरों को शिफ्ट करना नामुमकिन होता था, लेकिन मोनो पोल को कम जगह और कम समय में स्थापित किया जा सकता है।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) – मोनो पोल तकनीक
उत्तर: पुराने टावर (लैटिस टावर) चार पैरों वाले विशाल लोहे के ढांचे होते हैं जो 1000 से 2000 वर्गफीट जगह घेरते हैं। इसके विपरीत, मोनो पोल एक एकल (Single) खंभा होता है, जो मात्र 50 वर्गफीट जगह में लग जाता है।
उत्तर: हाँ, मोनो पोल उच्च श्रेणी के स्टील से बने होते हैं और इनका ट्यूबलर डिजाइन इन्हें तेज हवा और आंधी के दबाव को झेलने में सक्षम बनाता है। ये सुरक्षा के लिहाज से अधिक बेहतर हैं क्योंकि इनकी चिकनी सतह के कारण इन पर अनाधिकृत रूप से चढ़ना कठिन है।
उत्तर: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने इसका पहला सफल प्रयोग रायपुर के मेटल पार्क (सिलतरा) स्थित 132/33 केवी सब-स्टेशन की नई लाइन विस्तार में किया है।
उत्तर: घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में बिजली लाइनों के विस्तार के लिए अब बड़े भूखंडों की आवश्यकता नहीं होगी। इससे सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों में बाधा कम आएगी और शहर की सुंदरता भी बनी रहेगी।
उत्तर: पारेषण कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों और औद्योगिक इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर मोनो पोल ही लगाए जाएंगे ताकि कम जगह में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

