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Raipur कैशलेस हेल्थ स्कीम व पेंशन फंड समेत इन विषयों को आयोग के सामने उठाएगा विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन

Raipur कैशलेस हेल्थ स्कीम व पेंशन फंड समेत इन विषयों को आयोग के सामने उठाएगा विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन

Raipur  रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पेंशनर्स एसोसिएशन की गुरुवार को राजधानी रायपुर में बैठक हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्य अभियंता सुधीर रेंगे संरक्षक सदस्य व प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने संबोधित किया। प्रदेश से आए हुए 65 प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में शामिल हुए। आज की कार्यक्रम का संचालन व संबोधन प्रदेश सचिव, सुधीर नायक ने किया।  

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के समक्ष एसोसिएशन की तरफ से रखे जाने वाले मांगें व सुझाव पर चर्चा हुई।  

1. विद्युत रियायत (50% Electricity Rebate) की बहाली

• तथ्य: विद्युत कर्मियों को दी जाने वाली छूट उनकी सेवा शर्तों (Service Conditions) का हिस्सा रही है। इसे बंद करना उनके मनोबल और आर्थिक स्थिति पर चोट है।

• तर्क: देश के कई अन्य राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब) में विद्युत कर्मियों को रियायती दरों पर बिजली दी जाती है। यह कंपनी के कुल राजस्व का बहुत छोटा 000,1% हिस्सा है, लेकिन कर्मचारियों की कार्यकुशलता के लिए अनिवार्य है।

• मांग: नियामक आयोग पावर कंपनियों को निर्देशित करे कि पूर्व की भांति 50% विद्युत रियायत तत्काल बहाल की जाए। पेंशनर को rooftop solar panel लगाने के अनिवार्यता को समाप्त कर 25% विद्युत रियायत पूर्व की भांति विद्युत बहाल करें,,

2. कैशलेस हेल्थ स्कीम (विडाल कंपनी) की विफलता विडाल कंपनी का 100% एजी ऑडिट अनिवार्य किया जाए,,

• तथ्य: ‘विडाल’ कंपनी को 3 साल का टेंडर दिया गया है, लेकिन वर्तमान में यह केवल ‘री-इम्बर्समेंट’ मॉडल पर चल रहा है, न कि वास्तविक ‘कैशलेस’ पर। कर्मचारियों को तमाम अस्पतालों में एडमिशन लेते समय और बाद के बिलों में आपातकाल में भारी भुगतान स्वयं करना पड़ रहा है।

• तर्क: यदि कंपनी प्रीमियम का भुगतान कर रही है, तो सेवा 100% कैशलेस होनी चाहिए। अधूरी सेवा से ‘टैरिफ’ में दिखाया गया 100% सीजीएचएस रेट पर ही अस्पताल से इलाज हेतु अनुबंध हो ‘Employee Cost’ का खर्च व्यर्थ जा रहा है।

• मांग: आयोग आदेश दे कि टेंडर की शर्तों का कड़ाई से पालन हो और ‘No-Zero-Cash’ पॉलिसी लागू की जाए। विफल रहने पर टेंडर निरस्त कर नई पारदर्शी व्यवस्था की जाए।

3. पेंशन फंड में नियमित अंशदान और दंड का प्रावधान,,

4. पेंशन फंड में विद्युत नियामक आयोग द्वारा टैरिफ निर्धारण पर आयोग के माननीय अध्यक्ष एवं जूरी से निवेदन है कि 30% पेंशन ट्रस्ट की ग्रांट में बढ़ोतरी हो,,

• तथ्य: पेंशनरों का भविष्य असुरक्षित है क्योंकि कंपनियां नियमित रूप से पेंशन ट्रस्ट में अपना अंशदान (Contribution) जमा नहीं कर रही हैं।

• तर्क: सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के अनुसार पेंशन ‘कर्मचारी का अंतिम सेवा में प्रतिफल  अधिकार’ है। कंपनियों द्वारा फंड का उपयोग अन्य परिचालन कार्यों में करना वित्तीय अनियमितता है।

• मांग: आयोग टैरिफ आदेश में यह स्पष्ट प्रावधान करे कि पेंशन फंड का अंशदान ‘प्राथमिकता’ (Escrow Account के माध्यम से) पर जमा हो। डिफॉल्ट करने वाली कंपनी के प्रबंधन पर भारी जुर्माना या व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाए।

5. सोलर पैनल स्थापना: स्वैच्छिक बनाम अनिवार्य

• तथ्य: विद्युत कर्मियों को निजी तौर पर सोलर लगाने हेतु बाध्य करना अनुचित है, विशेषकर जब वे कंपनी के पेंशनर हो, अथवा कर्मचारी विद्युत आवास में रह रहे हो रहे हों।

• तर्क: नेट मीटरिंग और सोलर लक्ष्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी पावर कंपनी की है। कर्मचारियों के आवासों पर सोलर लगाना ‘Capital Expenditure’ (CAPEX) का हिस्सा होना चाहिए।

• मांग: कर्मियों पर सोलर का आर्थिक बोझ न डाला जाए। पावर कंपनियां ‘Rooftop Solar’ योजना के तहत अपने खर्च पर सोलर लगाएं, जिससे भविष्य में टैरिफ का बोझ भी कम होगा।

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6, अन्य राज्यों की तर्ज पर अन्य सुविधाएं

• तर्क: ‘One Nation, One Grid’ के दौर में सुविधाएं भी समान होनी चाहिए। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारतीय राज्यों में रिस्क अलाउंस और अन्य प्रोत्साहन बेहतर हैं।

• मांग: नियामक आयोग अन्य प्रगतिशील राज्यों की पावर कंपनियों की ‘Best Practices’ का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उन्हें लागू करने हेतु समयबद्ध दिशा-निर्देश जारी करे।

सुनवाई के लिए प्रो-टिप (Pro-Tip):

आयोग के सामने यह जरूर कहें कि: “एक संतुष्ट और सुरक्षित कर्मचारी ही उपभोक्ताओं को 24×7 निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली सुनिश्चित कर सकता है, जो आयोग का मुख्य उद्देश्य है।”

7. औद्योगिक क्षेत्र का और बड़े उपभोक्ताओं का बकाया विद्युत दायक शक्ति के साथ उपभोक्ताओं से वसूल किया जाए जिस प्रकार सुनाई दे रहा है कि 6हजार करोड़ रूपया डूबत खाते में है,,

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    इसके लिए जिम्मेदार लोगों अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें एवं इसकी ,भरपाई राज्य शासन स्वयं अपने मध में से करें, ना की विद्युत के उपभोक्ताओं पर अकारण Vidyut tariff बोझ बढ़कर विद्युत उपभोक्ताओं  से 6 हजार करोड़ के बोझ के bill वसूल किया जाए,,

8. पूर्व में स्वीकृत पेंशनर एसोसिएशन के आवेदन पर विचार पुनः विचारकर,हेड ऑफिस में पेंशनरों के कार्यालय खोलने के लिए भवन का आवंटन करें, ताकि प्रदेश से आने वाले पेंशनर के बैठने की व्यवस्था हो सके और उन्हें अपने कार्य के लिए यहां वहां भटकना न पड़े,, आज की प्रादेशिक बैठक में उपरोक्त निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

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