
RDSS रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली की अधोसंरचना (Infrastructure) विकास की केंद्र सरकार की आरडीएसएस Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) को लेकर ढेरों शिकायतें मिल रही हैं। योजना के तहत हो रहे कामों की गुणवत्ता से लेकर उपकरणों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।
आरडीएसएस को लेकर शिकायतें
छत्तीसगढ़ आरडीएसएस के तहत बिलासपुर, राजनांदगांव, कोरबा समेत कई जिलों में गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं। समय पर काम पूरा नहीं किया जा रहा, साथ ही ट्रांसफॉर्मर व सब स्टेशन के निर्माण में लगाए जा रहे उपकरणों के अमानक मिलने की भी जानकारी सामने आई है।
RDSS ठेकेदार पर जुर्माना
योजना में अधूरे काम और उपकरणों के अमानक पाए जाने पर पुणे की कंपनी पर पेनाल्टी लगाते हुए नोटिस भी जारी कर दिया है।
आरडीएस में हो रहे हैं ये काम
आरडीएसएस के तहत सब स्टेशन, नए ट्रांसफॉर्मर, केबल लगाने, लाइन विस्तार समेत अन्य कार्य किए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर लगाना भी इसी योजना का दूसरा पार्ट है। इसके लिए केन्द्र सरकार से सात हजार करोड़ से अधिक का आवंटन जारी किया गया है।
दो साल बाद भी पूरा नहीं हुआ काम
आरडीएसएस के लिए जिला स्तर पर टेंडर जारी किया गया था। सब स्टेशन, ट्रांसफॉर्मर लगाने समेत अन्य कार्यों को पूरा करने के लिए एजेंसियों को समय भी दिया गया था। बताते हैं कि 24 माह का समय बीत जाने के बाद भी कई एजेंसियों ने अब तक काम पूरा नहीं किया है।
RDSS काम को लेकर लगातार शिकायतें
अफसरों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से एजेंसियों के कामकाज को लेकर शिकायतें मिलने लगी हैं। बिलासपुर, राजनांदगांव में काम की गुणवत्ता स्तरहीन पाई गई है। यहां तक कि बिजली उपकरण भी अमानक पाए गए हैं।
उपकरण वापास
बिलासपुर में पुणे की एजेंसी को काम मिला है। वहां लगाए गए अमानक उपकरणों को वापस कर दिया गया है। वहां अभी भी 30 फीसदी काम बचा है।
नोटिस का नहीं मिला संतोजनक उत्तर
अफसरों ने बताया कि पिछले दिनों अधिकारियों की टीम ने बिलासपुर पहुंचकर आरडीएसएस के कामों की जांच शुरू की। गड़बड़ी मिलने पर एजेंसी पर पेनाल्टी लगाया गया है। साथ ही नोटिस जारी किया गया है। जवाच संतोषजनक नहीं पाए जाने पर एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
चीफ इंजीनियर जामुलकर ने की शिकायतों की पुष्टि
इस योजना को लेकर मिल रही शिकायतों की प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता एम. जामुलकर ने पुष्टि की है। एक समाचार पत्र के साथ बातचीत के दौरान इंजीनियर जामुलकर ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच पड़ताल की जा रही है। समय पर काम पूरा नहीं करने और गड़बड़ी मिलने पर एजेंसी पर पेनाल्टी लगाया गया है। साथ ही नोटिस भी जारी किया गया है।
मटेरियल भी सब स्टैंडर्ड
चीफ इंजीनियर के अनुसार मटेरियल की जांच में कुछ स्थानों पर सब स्टैंडर्ड मिले हैं। 70 फीसदी काम हो चुके हैं। बचे हुए 30 फीसदी काम में स्टैंडर्ड के मटेरियल लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी गड़बड़ी करने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्री कान्ट्रेक्ट के संबंध में कहा कि आपस में एग्रीमेंट कर कान्ट्रेक्ट देने का प्रावधान है।
टेंडर लेकर एजेंसी ने पेटी कान्ट्रेक्ट दिया
आरडीएसएस का टेंडर मिलने के बाद कुछ एजेंसियों ने किसी अन्य की पेटी कान्ट्रेक्ट दे दिया, जबकि ऐसा प्रावधान नहीं है। इसके चलते योजना के काम की गुणवत्ता स्तरहीन पाई जा रही है। काम छोड़ दिए जाने के बाद भी संबंधित एजेंसियों पर न तो जुर्माना लगाया गया और न ही उनकी सुरक्षा निधि जब्त की।
FAQ
Q आरडीएसएस का फुलफार्म क्या है ?
A आरडीएसएस यानी Revamped Distribution Sector Scheme। हिंदी में इसे पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना कहते हैं।
Q क्या है आरडीएसएस योजना व उद्देश्य ?
A यह केंद्र सरकार (भारत सरकार) की एक योजना है। इस योजना का उद्देश्य देश की सभी डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना है।
Q आरडीएसएस में छत्तीसगढ़ में किस तरह की शिकायतें?
A आरडीएसएस में निर्माण से लेकर उपकरणों की क्वालिटी स्तर की नहीं होने की शिकायतें हैं।






