Religious Freedom Bill  छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने वाला कानून विधानसभा में पारित:  7 से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा 

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Religious Freedom Bil  रायपुर। बहुप्रतिक्षित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को विधानसभा ने गुरुवार पारित कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति में सदन ने विधेयक को पारित कर दिया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को सदन में पेश करते हुए इसमें किए गए प्रवधानों की जानकारी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है।

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक की खास बातें  

0 घर वापसी को नहीं मना जाएगा धर्मांतरण

0 केवल विवाह के लिए धर्मांतरण मान्य नहीं

0 दो या दो से अधिक लोगों तो माना जाएगा सामूहिक धर्मांतरण

0 धर्म परिवर्तन करने और कराने वाले दोनों को देनी होगी सूचना

0 धर्मांतरण कराने वालों को करनी होगी संपत्ति की घोषणा 

0 सार्वजनिक सूचना का होगा प्रकाशन, दावा अपत्ति के लिए 30 दिन

0 अवैध धर्मांतरण की जांच 30 दिनों में करनी होगी पूरी

0 धर्मांतरण के 21 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र लेना जरुरी

0 आवेदन के 90 दिन बाद धर्मांतरण तो अमान्य

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के जरिये विष्णुदेव साय सरकार ने धर्मांतरण को रोकने का हर संभव प्रयास किया है। इस कानून के लागू होने के बाद प्रत्येक धर्मांतरण के लिए पूर्व सूचना और पंजीयन अनिवार्य हो जाएगा, यहां तक की धर्मपरिवर्तन कराने वालों को भी न केवल पंजीयन करना होगा बल्कि हर साल अपनी संपत्ति की घोषणा करनी होगी। इस कानून में न्यूनतम सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। इसी तरह न्यूनतम 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपए तक अर्थदंड की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

घर वापसी की भी प्रक्रिया तय

पैतृक धर्म या आस्था में वापस लौटने के पहले या बाद में सक्षम प्राधिकारी  को सूचना देना होगा। इसके बाद उस व्यक्तिा का पूर्व में जारी धर्मांतरण प्रमाणपत्र रद्द करने का आदेश जारी किया जाएगा। ऐसे में मामले जिनमें धर्मांतरण का प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है, उसमें वापस लौटने का ओदश जारी कर उसका प्रकाशन किया जाएगा।

अंतरधार्मिक विवाह की सूचना अनिवार्य

अलग- अलग धर्म के महिला और पुरुष के बीच विवाह की स्थिति में इसकी सूचना 60 दिन पहले देनी होगी। विवाह कराने वाले को भी इसकी सूचना देनी होगी। कानून में केवल विवाह के उद्देश्य से किए जाने वाले धर्मांतरण अवैध  माना गया है।

धर्मांतरित को मुआवजा का भी प्रावधान

कानून में प्रलोभन देकर या जबरन धर्मांतरण की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति के लिए मुआवजा का भी प्रावधान किया गया है। यह राशि अधिकतम 10 लाख रुपए तक हो सकती है।

प्रलोभन देकर धर्मांतरण पर 10 वर्ष तक की सजा

प्रलोभन, महिमामंडन और षडयंत्र पूर्वक धर्मांतरण का दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 7 और अधितमत 10 साल की सजा और पांच लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। प्रार्थी के नाबालिक मानसिक रुप से कमजोर, एससी एसटी की स्थिति में 10 से 20 साल तक की सजा और न्यूनतम 10 लाख जुर्माना हो सकता है।

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कब से लागू होगा धर्मांतरण रोकने वाला कानून

विधानसभा से पारित विधेयक को मंजूरी के लिए राजभवन भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा।

विधेयक पेश किए जाने पर विपक्ष की आपत्ति

कांग्रेस ने इस विधेयक को सदन में पेश किए जाने पर आपत्ति की। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित इसलिए इसे पेश करने की बताय प्रवर समिति को भेज देना चाहिए। इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रस्तुत करने पर रोक नहीं है। गृहमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से कहीं कोई स्टे नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि इस पर नए  कानून न बनाए जाए। राज्य सरकार चाहे तो कानून बना सकती है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई गंभीर चर्चा होती है तो विपक्ष के लोग बहिर्गमन, बहिष्कार करके जाते हैं। इसे पलायन कहा जाना चाहिए।

chatur postMarch 19, 2026
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