भारत

जानिए- उप राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार से क्‍या है कनेक्‍शन

सलवा जुडूम आंदोलन

Salwa Judum न्‍यूज डेस्‍क। उप राष्‍ट्रपति पद के लिए केंद्र में सत्‍तारुढ़ एनडीए और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्‍लॉक ने अपने- अपने प्रत्‍याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। गुरुवार 21 अगस्‍त को उप राष्‍ट्रपति पद के लिए नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख है।

राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्‍मीदवार सीपी राधाकृष्‍णन ने बुधवार को अपना नामांकन जमा कर दिया है। इंडिया ब्‍लाक के उम्‍मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी गुरुवार को नामांकन दाखिल करेंगे।

इस बीच उप राष्‍ट्रपति पद के इन दोनों उम्‍मीदवारों में से एक का छत्‍तीसगढ़ के सलवा जुडूम आंदोलन से कनेक्‍शन सामने आया है। इसकी वजह से सलवा जुडूम आंदोलन फिर एक बार चर्चा में आ गया है।    

जानिए- क्‍या था सलवा जुडूम आंदोलन

सलवा जुडूम आंदोलन छत्‍तीसगढ़ के नक्‍सल प्रभावित बस्‍तर संभाग में 2005 में शुरू हुआ था। इस आंदोलन की शुरुआत नक्‍सलवाद के विरोध में हुआ था। इस आंदोलन का उद्देश्‍य नक्‍सल हिंसा का विरोध करना और बस्‍तर में शांति स्‍थापित करना था।

Salwa Judum महेंद्र कर्मा ने किया नेतृत्‍व

2005 में जब बस्‍तर में सलवा जुडूम आंदोलन शुरू हुआ तब प्रदेश में डॉ. रमन सिंह के नेतृत्‍व वाली भाजपा सरकार थी। इसके बावजूद सलवा जुडूम की अगुवाई बस्‍तर टाइगर के नाम से प्रसिद्ध कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने की।

मधुकर राव भी सलवा जुडूम का नेतृत्‍व करने वालों में शामिल थे। इसकी वजह से दोनों नेता नक्‍सलियों की हीट लिस्‍ट में आ गए थे। मधुकर राव का दिल का दौरा पड़ने की वजह से निधन हो गया, जबकि महेंद्र कर्मा की नक्‍सलियों ने झीरम घाटी में हत्‍या कर दी।

Salwa Judum से निकले महेश गागड़ा जैसे नेता

डॉ. रमन सिंह की सरकार में मंत्री रहे महेश गागड़ा भी इसी सलवा जुडूम की देन थे। गागड़ा बीजापुर में सलवा जुडूम में आंदोलन में शामिल थे।

B. Sudarshan Reddy सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को विपक्ष ने बनाया उप राष्‍ट्रपति पद का उम्‍मीदवार

जानिए- उप राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार से क्‍या है कनेक्‍शन

इंडिया ब्‍लाक के प्रत्‍याशी बी. सुदर्शन रेड्डी की वजह से सलवा जुडूम आंदोलन फिर चर्चा में है। सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्‍त जज हैं। सुदर्शन ने ही 2011 में सलवा जुडूम को बैन किया था और एसपीओ पर रोक लगाई थी। दरअसल, सलवा जुडूम आंदोलन के जरिये मानव अधिकारों का उल्‍लघंन किए जाने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिसकी सुनवाई सुदर्शन की कोर्ट में हुई थी।

Back to top button