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Samadhan पावर कंपनी के पेंशनरों का दर्द:  गैरों पे करम, अपनों पे सितम… ये ठीक नहीं

Samadhan रायपुर। गैरों पर करम, अपनों पर सितम…गीतकार साहिर लुधियानवी का यह गाना बीते दो दिनों से पावर कंपनी के पेंशनर्स गुनगुना रहे हैं। पेंशनर्स का यह दर्द बिजली वितरण कंपनी की मुख्‍यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना (एमबीबीएस)  की वजह से छलक रहा है।

पावर कंपनी के पेंशनर्स का क्‍या है दर्द

दरअसल, बिजली वितरण कंपनी ने एमबीबीएस योजना के तहत प्रदेश के लगभग 29 लाख बकायादारों का 757 करोड़ रुपए का बकाया माफ कर दिया है। इधर, पेंशनर्स से वसूली की जा रही है। उन्‍हें बकाया राशि जमा करने के लिए नोटिस पर नोटिस जारी किया जा रहा है।

10 साल पहले सेवानिवृत्‍त हुए पेंशनरों से रिकवरी

पावर कंपनी ने अपने करीब 1900 से ज्‍यादा पेंशनर्स से रिकवरी कर रही है। पेंशनर्स पर आरोप है कि उन्‍होंने बिजली पर पात्रता से ज्‍यादा रियायत ले ली है। इन पेंशनर्स पर 6 से 8 करोड़ रुपए का बकाया है। कंपनी की तरफ से नोटिस जारी होने के बाद कई पेंशनर्स ने राशि जमा भी कर दिया है।

टैरिफ पर सुनवाई के दौरान भी उठा था मुद्दा

टैरिफ पर विद्युत नियामक आयोग में जन सुनवाई के दौरान भी पेंशनर्स से वसूली का मुद्दा उठा था। आयोग को बताया गया कि नियमानुसार दो साल से ज्‍यादा पुराना वसूली नहीं की जा सकती है, लेकिन कंपनी प्रबंधन 10 साल पहले सेवानिवृत्‍त हुए कर्मियों से वसूली कर रही है।

जिम्‍मेदार कौन

पावर कंपनी के अफसरों और कर्मचारियों को बिजली बिल में 50 प्रतिशत की छूट मिलती है। सेवानिवृत्‍त होने के बाद यह छूट 25 प्रतिशत हो जाती है।

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आरोप है कि लगभग 1900 कर्मचारी सेवानिवृत्‍त होने के बाद भी 50 प्रतिशत छूट लेते रहे। पेंशनर्स का कहना है कि बिल कंपनी जारी करती है, ऐसे में छूट को कम करने की जिम्‍मेदारी कंपनी की थी।

जब 757 करोड़ माफ हो सकता है तो 8-9 करोड़ क्‍यों नहीं

सवाल उठ रहा है कि जब कंपनी 28 लाख से ज्‍यादा उपभोक्‍ताओं का 757 करोड़ माफ कर सकती है तो पेंशनर्स का 8-9 करोड़ क्‍यों नहीं कर सकती। इस मामले में पेंशनर्स कंपनी प्रबंधन को पत्र लिखकर आग्रह करने की तैयारी में हैं।

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