Sanvida रायपुर। देश आज महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्र को स्मरण करने के साथ दशहरा मना रहा है। इधर, अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मी भी गांधी के रास्ते पर चलते हुए काम का बहिष्कार किया। संविदा कर्मियों के अनुसार उनके आंदोलन की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली सेवा प्रभावित हुई है।
संविदा कर्मियों का आंदोलन टालने के लिए 26 सितंबर को छत्तीसगढ़ संविदा विद्युत कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल और कंपनी प्रबंधन के प्रतिनिधि के बीच सहायक श्रमायुक्त की उपस्थिति में बैठक हुई थी। इसमें संघ की कंपनी के सक्षम अधिकारी के साथ द्विपक्षीय वार्ता कराने की बात हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसकी वजह से संविदा कर्मचारी संघ में नाराजगी है।
संविदा बिजली कर्मियों ने कंपनी प्रबंधन पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। कंपनी प्रबंधन की तरफ से मांगों के संदर्भ में किसी भी तरह की पहल नहीं किए जाने से खफा संविदा कर्मी बुधवार को अचानक सामूहिक अवकाश के साथ हड़ताल पर चले गए।
इससे पहले 2024 में संविदा कर्मियों ने आंदोलन किया था। तब 12 अगस्त 2024 को कंपनी प्रबंधन और संघ के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक के बाद 30 अगस्त 2024 को प्रबंधन की तरफ से आवश्यक कार्यवाही विवरण जारी किया गया। इसमें संघ की सभी मांगों पर सकारात्मक विचार था, इसे देखते हुए आंदोलन स्थतिग कर दिया गया।
विद्युत संविद कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरिचरण साहू और महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने बताया कि अगस्त 2024 में कंपनी प्रबंधन की तरफ से मिले सकारात्मक और ठोस आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था, लेकिन सालभर बाद भी हमारी मांगों पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। ऐसे में हमें विवश होकर फिर से आंदोलन करना पड़ रहा है।
संघ ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर रखा है। पहले चरण में 19 सितंबर को सभी क्षेत्रीय कार्यालयों ज्ञापन सौंपा गया। दूसरे चरण में कल सामूहिक अवकाश और आज ड्यूटी का बहिष्कार किया गया।
संघ के अनुसार आंदोलन के तीसरे चरण में 09 अक्टूबर को प्रदेशभर के संविदा बिजली कर्मी बिजली कंपनी मुख्यालय के गेट के सामने आम सभा के साथ प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भी कंपनी की तरफ से कोई पहल नहीं किया गया तो 18 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
संविदा कर्मियों ने की तरफ से कंपनी प्रबंधन के सामने चार मांगें रखी गई है। इसमें संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, मृत्यु होने पर परिवार को 25 लाख का मुआवजा और अनुकंपा नियुक्ति, संविदा कर्मियों की तीसरी मांग महंगाई और मकान भत्ता को लेकर है। वर्तमान में देय एकमुश्त वेतन में महंगाई भत्ता और मकान भत्ता प्रदान किया जाए। संविदा कर्मचारियों की मांग है कि राष्ट्रीय अवकाश के दिन ड्यूटी करने पर अतिरिक्त भुगतान की पात्रता प्रदान की जाए।