
रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन (Chhattisgarh Karmachari Adhikari Federation) ने स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) के अधिकारियों को एक मांग पत्र सौंपा है। इस ज्ञापन में फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने राज्य के सभी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों (Higher Secondary Schools) में भी शनिवार को प्रातःकालीन पाली (Morning Shift) में शाला संचालन की अनुमति प्रदान करने की पुरजोर वकालत की है।
इसके साथ ही, फेडरेशन ने स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (School Rationalization) और संकुल व्यवस्था (Cluster Management System) के नए नियमों के अनुरूप प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की समय-सारिणी (School Time-Table) में पूर्ण रूप से एकरूपता (Uniformity) सुनिश्चित करने की अत्यंत संवेदनशील मांग उठाई है। कर्मचारी संगठन का मानना है कि इस महत्वपूर्ण सुधार से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता (Educational Quality) में अभूतपूर्व सुधार होगा, बल्कि प्रशासनिक विसंगतियां भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।
क्या है पूरा मामला और क्यों उठी यह मांग? (Background & Context)
दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्कूलों का युक्तियुक्तकरण (Rationalization Process) किया है। इस नई संकुल स्तरीय व्यवस्था (Cluster Level System) के लागू होने के बाद, जमीनी स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब प्रदेश के अधिकांश प्राथमिक विद्यालय (Primary Schools) और पूर्व माध्यमिक या माध्यमिक विद्यालय (Middle Schools) प्रशासनिक रूप से उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के साथ पूरी तरह संबद्ध (Integrated) होकर संचालित हो रहे हैं।
हालांकि, इस एकीकरण के बाद भी एक व्यावहारिक समस्या (Practical Problem) जस की तस बनी हुई है। विभिन्न स्तरों के इन विद्यालयों के लिए विभाग द्वारा अलग-अलग समय-सारिणी (Different School Timings) निर्धारित की गई है। इस विसंगति के कारण रोजाना सुबह से लेकर शाम तक शैक्षणिक, प्रशासनिक और प्रबंधकीय स्तर पर अनेक जटिल और व्यावहारिक कठिनाइयां (Operational Difficulties) सामने आ रही हैं। अलग-अलग समय होने की वजह से संकुल केंद्रों के प्रभारियों और शिक्षकों को समन्वय स्थापित करने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
शिक्षकों और प्राचार्यों पर बढ़ता अतिरिक्त कार्यभार (Workload of Staff)
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने अपने ज्ञापन में इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया है कि वर्तमान समय में विद्यालयों के प्राचार्य (Principals), व्याख्याता, शिक्षक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी (Non-Teaching Staff) केवल कक्षाओं में नियमित शिक्षण कार्य (Regular Teaching Work) तक ही सीमित नहीं हैं। इसके विपरीत, उन्हें सरकार की विभिन्न महत्वाकांक्षी विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन (Scheme Implementation), विस्तृत ऑनलाइन डेटा एंट्री (Online Portal Work), छात्रवृत्ति, गणवेश वितरण, मध्यान्ह भोजन के अभिलेखों का संधारण (Maintenance of Records), निरंतर होने वाली परीक्षाओं के संचालन संबंधी दायित्वों (Examination Duties) तथा जटिल वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों (Financial & Administrative Duties) का भी पूरी तरह निर्वहन करना पड़ता है।
इसके अलावा, संकुल स्तरीय समन्वय (Cluster Level Coordination) और समय-समय पर आयोजित होने वाली पालक-शिक्षक बैठकों (Parent-Teacher Meetings – PTM) जैसी अन्य अनेक शासकीय जिम्मेदारियों का बोझ भी उन्हीं के कंधों पर है। जब एक ही परिसर या संकुल के भीतर अलग-अलग समय-सारिणी लागू होती है, तो इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों का समन्वित, सुचारू और प्रभावी संचालन (Smooth Operation) बुरी तरह प्रभावित होता है। शिक्षकों का एक बड़ा हिस्सा प्रशासनिक उलझनों में ही फंसा रह जाता है, जिससे उनके मूल अध्यापन कार्य पर भी इसका असर पड़ता है।
शनिवार को सुबह पाली में स्कूल लगाने के बड़े फायदे (Benefits of Saturday Morning Shift)
फेडरेशन का एक बहुत ही व्यावहारिक और तार्किक तर्क (Rational Argument) यह है कि यदि शनिवार को उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों का संचालन भी अनिवार्य रूप से प्रातःकालीन पाली (Saturday Morning Shift) में किया जाए, तो इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई (Students Studies) पर कोई भी विपरीत या प्रतिकूल प्रभाव (Adverse Impact) नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, इस छोटे से बदलाव से स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग को कई अभूतपूर्व लाभ मिलेंगे, जो इस प्रकार हैं:
- ■ प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त समय: शनिवार दोपहर के बाद का समय विद्यालयों को लंबित प्रशासनिक कार्यों, शैक्षणिक समीक्षा (Academic Review) और संकुल स्तरीय बैठकों (Cluster Meetings) के लिए मिल जाएगा।
- ■ आगामी सप्ताह की मजबूत प्लानिंग: शिक्षकों को विभागीय प्रतिवेदन तैयार करने, अभिलेखों को अपडेट करने और आगामी सप्ताह की शैक्षणिक योजना (Weekly Lesson Planning) को सुव्यवस्थित ढंग से संपादित करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध होगा।
- ■ कार्यकुशलता में भारी वृद्धि: समय में एकरूपता आने से विद्यालय प्रबंधन की कार्यकुशलता (Work Efficiency), प्रशासनिक दक्षता (Administrative Competency) और अंततः शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार (Remarkable Improvement) दर्ज किया जाएगा।
- ■ मानसिक तनाव से मुक्ति: शिक्षकों और प्राचार्यों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी, जिससे वे सोमवार से नए उत्साह के साथ छात्रों को पढ़ा सकेंगे।
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फेडरेशन ने अपने ज्ञापन के अंत में यह दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है कि छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग के आला अधिकारी, जनगणना संचालन निदेशक (Director of Census Operations) और राज्य शासन कर्मचारियों के इस बहुमूल्य योगदान का पूरा सम्मान करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि लाखों शिक्षकों और विद्यार्थियों के व्यापक हित को देखते हुए इन जायज मांगों पर बेहद शीघ्र और सकारात्मक निर्णय (Positive Decision) लिया जाएगा, जिससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा मिल सके।







