
Sharab Ghotala रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कथित शराब घोटाला में ईडी ने अपनी नई चार्जशीट में कई चौकाने वाले नए खुलासे किए हैं। ईडी की इस चार्जशीट में बिग बॉस गैंग के साथ पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम आया है।
कौन-कौन था बिग बॉस ग्रुप में
ईडी की ताजा चार्जशीट में सनसनीख़ेज़ खुलासा हुआ है। इसमें जो चैट्स के स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, वे यह साबित करते हैं कि पूर्वर्ती सरकार के घोटालेबाजों का एक खतरनाक बिग बॉस ग्रुप था। इस ग्रुप में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पुत्र चैतन्य बघेल, उनके मित्र पुष्पक समेत कई अधिकारी और नेता थे।
क्या करता था यह ग्रुप
ईडी की चार्जशीट के अनुसार यह ग्रुप षड्यंत्र और दुष्प्रचार का बड़ा अड्डा था, खास कर ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ जो इनके दबाव में नहीं आते थे। जहां कांग्रेस का दावा था कि ये लोग एक दूसरे को जानते तक नहीं। ग्रुप चैट से सिद्ध होता है, ना केवल जानते थे बल्कि मनगढ़ंत, झूठी कहानियां गढ़कर दुष्प्रचार करते थे।
Sharab Ghotala पूरे राज्य को हाईजैक करने की साजिश
चार्जशीट में साफ लिखा है कि वरिष्ठ अधिकारी (अनिल टूटेजा, अरुण पति त्रिपाठी, सौम्या चौरसिया आदि), राजनेता (अनवर ढेबर, कावासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पुत्र चैतन्य भघेल और उनके मित्र पुष्पक आदि) और ठेकेदार/डिस्टिलरी मालिक मिलकर अवैध कमीशन वसूली और नकली-अनअकाउंटेड शराब बेचने का पूरा तंत्र चला रहे थे। यह कोई मामूली खेल नहीं था, हज़ारों करोड़ रुपये का सीधा घोटाला था। इनकी पूरे राज्य को हाईजैक करने की साज़िश थी।
डायरी के जरिये ब्लैकमेल
ईडी ने स्पष्ट किया है कि किस तरह ये लोग षड्यंत्र रचते थे और एक विवादित आईपीएस की ‘प्रसिद्ध कल्पनायो पर आधारित डायरी’ को भी अपने एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे। बिग बॉस गैंग ने इसी डायरी को अपना टूल बनाकर अधिकारियों के ख़िलाफ़ षड्यंत्र रचने का काम किया।
जो नहीं झुकते उन पर बनाते थे दबाव
इस सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ को हर स्तर पर तबाह करने का काम किया। चाहे जनता की मेहनत की कमाई की लूट हो या पूरे सरकारी तंत्र को भ्रष्ट करना। जो ईमानदार अधिकारी झुके नहीं उन्हें अपमानित और प्रताड़ित करने में इस सिंडिकेट ने सारी हदें पार कर दी। इससे ना केवल राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की छवि धूमिल हुई बल्कि करोड़ों छत्तीसगढ़ वासियों के मन में भी बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
पहली बार आया भूपेश बघेल का नाम
ईडी की चार्जशीट में पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम आया है। चैतन्य बघेल के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में पूर्व सीएम भूपेश बघेल पर पर आरोप लगाया है। आरोप है कि उनके कार्यकाल में कथित शराब सिंडिकेट चलाया गया।
बंसल के बयान के आधार पर लगे आरोप
ईडी ने भूपेश बघेल के परिवार के करीबी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने खुलासा किया कि पूर्व सीएम ने उनसे कहा था कि अनवर ढेबर जो कथित सिंडिकेट का सरगना है उन्हें सामान (नकदी का कोड शब्द) भेजेगा, जिसे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाना होगा।
करीब 960 करोड़ रुपए पहुंचा रामगोपाल तक
ईडी का आरोप है कि करीब 960 करोड़ रुपए अलग समय पर कांग्रेस कार्यालय पहुंचाए गए। इस तथ्य की पुष्टि पार्टी कार्यालय में कोषाध्यक्ष के सहायक के बयान से भी हुई है, जिसने नकदी प्राप्त होने की बात स्वीकार की। एजेंसी ने भूपेश बघेल के पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया पर भी आरोप लगाए हैं कि उन्होंने इस सिंडिकेट से आने वाले पैसों को मैनेज करने में भूमिका निभाई। चौरसिया को पहले कोयला लेवी केस में गिरफ्तार किया गया था और अभी वह जमानत पर बाहर हैं। विशेष लोक अभियोजक सौरभ पांडेय ने कहा, पूर्व सीएम बघेल का नाम ताजा अभियोजन शिकायत में इसलिए आया है क्योंकि पिछली चार्जशीट के बाद जांच में नए तथ्य सामने आए हैं।
Sharab Ghotala ‘चैट्स और कबूलनामों का सिलसिला’
ईडी की अभियोजन शिकायत, जो रायपुर की अदालत में दाखिल की गई है, उसमें सौम्या चौरसिया और रिटायर्ड आईएएस अफसर अनिल टुटेजा के बीच हुई कथित चैट्स के अंश शामिल हैं। टुटेजा पर भी सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप है। इन चैट्स में चौरसिया ने अनवर ढेबर को यह निर्देश भेजे बताए गए हैं कि पप्पू बंसल के साथ अकाउंटिंग की जानकारी साझा न करें। आरोप है कि चैतन्य बघेल ने ही चौरसिया को बताया था कि बंसल बिक्री और हिसाब-किताब को लेकर पूछताछ कर रहे हैं, जिसके बाद उन्होंने यह संदेश आगे पहुंचाया।
दो साल में 960 करोड़ रुपए का किया लेन-देन
चार्ज शीट में ईडी ने दावा किया है कि बंसल ने अपने बयान में कहा है कि उसने शराब मामले में दो साल में लगभग 960 करोड़ रुपए का लेन-देन किया। इनमें से 80-100 करोड़ रुपए केके श्रीवास्तव को दिए गए, बाकी 860 880 करोड़ रुपए राजीव भवन में रामगोपाल को सौंपे गए।
देवेंद्र का कबूलनामा
ईडी ने शिकायत में कहा कि यह रकम राजीव भवन में अग्रवाल के एक सहायक देवेंद्र डाडसेना को मिलती थी। डाडसेना 11 और 14 जुलाई को ईडी के सामने पेश हुए, चैतन्य की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले। उन्होंने माना कि वे रामगोपाल अग्रवाल की ओर से पप्पू बंसल से पैसा लेते
पूरा मामला पप्पू के बयान पर : चैतन्य के वकील
चैतन्य के वकील फैजल रिजवी ने ईडी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, पूरा मामला सिर्फ पप्पू बंसल के बयान पर आधारित है। पप्पू बंसल को छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू और इंडी द्वारा गिरफ्तारी का खतरा था, इसलिए उन्होंने खुद को बचाने के लिए बयान दिया। उन्होंने कहा, मई में छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू ने पप्पू बंसल के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी कराया, कुछ हफ्तों बाद उन्होंने राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के सामने जाकर बयान दिया जिसमें चैतन्य का नाम लिया। साफ है कि यह गिरफ्तारी से बचने की कोशिश थी।
अब उन्हीं बयानों का इस्तेमाल पूर्व सीएम और उनके बेटे को फंसाने के लिए किया जा रहा है। चार्जशीट के अनुसार, अनवर ढेबर जो रायपुर के पूर्व महापौर और कांग्रेस नेता एजाज ढेबर का भाई है उसे कथित शराब सिंडिकेट का सरगना बताया गया है। चैतन्य पर आरोप है कि उन्होंने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और संपकों का इस्तेमाल कर इस सिंडिकेट से कमाए पैसों को ठिकाने लगाया।







