
Sharab Ghotala रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) कोर्ट में एक और चालान पेश करने की तैयारी में है। 2100 पन्नों के इस चालान में घोटाला में 28 आबकारी अधिकारियों भूमिका बताई गई है।
जांच एजेंसी ने बताया कि यह चालान विधि विभाग से अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद दाखिल किया जा रहा है। इसमें पूरे घोटाले के पीछे सक्रिय सिंडिकेट का ताना-बाना उजागर किया गया है। आरोप है कि इन अफसरों ने संगठित गिरोह बनाकर हर साल करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की और सरकारी तंत्र का खुलकर दुरुपयोग किया।
Sharab Ghotala हर महीने 70 करोड़ की वसूली
EOW की रिपोर्ट के अनुसार शराब में हर महीने 70 करोड़ की अवैध कमाई की जा रही थी। साल 2019 से 2023 के बीच शराब सप्लायरों से जिला आबकारी अधिकारियों ने 319 करोड़ रुपये की वसूली की, जिसे सिंडिकेट तक पहुंचाया गया। अप्रैल 2019 से जून 2022 तक अवैध शराब बेचकर 280 करोड़ रुपये जुटाए गए। इस अवधि में करीब 60 लाख पेटी अवैध शराब की बिक्री की गई, जिसकी कीमत लगभग 2,174.60 करोड़ रुपये आंकी गई ।
जानिए- शराब घोटाला में लखमा को कितना मिलता था हिस्सा
इस घोटाले के केंद्र में रहे पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पर गंभीर आरोप सामने आए हैं, चालान के मुताबिक, हर महीने मंत्री लखमा के रायपुर स्थित सरकारी बंगले में लगभग 3.5 करोड़ रुपये नकद पहुंचाए जाते थे। यह रकम मिठाई और सामान जैसे कोडवर्ड में भेजी जाती थी। रकम आबकारी विभाग के अधिकारियों और एजेंटों की मिलीभगत से सरकारी गाड़ियों में लाकर बंगले तक पहुंचाई जाती थी
त्रिपाठी और दास कराते थे मंत्री से फाइल साइन
आरोपों के अनुसार लखमा मंत्री रहते हुए विभाग से जुड़े डिस्टलरियों से शराब खरीद, निविदा प्रक्रिया, होलोग्राम आपूर्तिकर्ता, ट्रांसपोर्टर, मैनपावर व कैश कलेक्शन एजेंसी के चयन, CSMCL और बेवरेज कॉर्पोरेशन के गोदाम संचालन के साथ जिला स्तर पर पदस्थापना जैसे नीतिगत निर्णयों पर अंतिम मंजूरी देते थे। प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाठी और आबकारी आयुक्त निरंजन दास विभागीय फाइलों पर दस्तखत के लिए नियमित रूप से मंत्री आवास जाते थे।
Sharab Ghotala ऐसे हुआ शराब घोटाला
ईओडब्ल्यू के अनुसार विभाग ने 5 फरवरी 2019 को एक आदेश जारी किया। इसके जरिए CSMCL में पदस्थ अधिकारियों के शराब दुकानों की जांच पर रोक लगा दी गई। यह आदेश तत्कालीन आबकारी मंत्री लखमा की स्वीकृति के बाद जारी किए गए। यही आदेश सरकारी शराब दुकानों में बिना ड्यूटी पेड के शराब की समानांतर बिक्री को संस्थागत संरक्षण देने का माध्यम बना।
नई नीति में कमीशन वसूली का खेल
ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस शासन के दौरान वर्ष 2020-21 में FL-100 और 10B लाइसेंस प्रणाली लागू कर विदेशी शराब की आपूर्ति से निर्माताओं को हटाकर चुनिंदा एजेंसियों के माध्यम से सप्लाई कराई गई। इससे सरकार को करोड़ों का नुकसान और सिंडीकेट को बड़ा लाभ हुआ। वर्ष 2019-20 में देशी शराब के रेट में 75 प्रति पेटी और 2020-21 में 43.50 प्रति पेटी की बढ़ोतरी की गई, जो डिस्टलरियों द्वारा कमीशन के रूप में वापस सिंडीकेट को दी जाती थी।




