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Smart Meters ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित ने गिनाई स्मार्ट मीटर की खुबियां और फायदें: Over स्मार्ट कहे जाने पर दिया, यह जवाब

Smart Meters  रायपुर। बिजली का स्मार्ट मीटर क्या वास्तव में ओवर स्मार्ट है? क्या स्मार्ट मीटर से केवल बिजली वितरण कंपनी को फायदा हो रहा है? स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को क्या कोई लाभ होगा? इन सभी सवालों के साथ ही ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही तमाम तरह की चर्चाओं और भ्रांतियों को आज दूर करने का प्रयास किया।

सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर गुरुवार को डॉ. रोहित यादव ने एक प्रेसवार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में ऊर्जा के क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पॉवर सेक्टर में कैसे नई तकनीकों का उपयोग करके उपभोक्ता सेवा और गुणवत्ता में सुधार किया जा रहा है।

प्रदेश में 65 लाख बिजली उपभोक्ता

डॉ. रोहित यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सभी श्रेणी के 65 लाख उपभोक्ता हैं। इनमें 15 लाख बीपीएल भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बिजली आम लोगों से जुड़ा मुद्दा है। इसको लेकर किसी तरह का भ्रम न हो इसके लिए लगातार प्रयास किया जाता है।

विद्युतीकरण की स्थिति

ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश के 19 हजार गांवों का विद्युतीकरण हो चुका है। करीब 831 गांवों तक ग्रिड से बिजली पहुंचाने में समस्या आ रही था, ऐसे गांवों में सोलर के जरिये बिजली पहुंचाई गई है।

पीएम सूर्यघर योजना 55 हजार प्लांट प्रगति पर

डॉ. रोहित यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में 13वें स्थान पर है, कुछ महीने पहले हम 18वें स्थान पर थे। उन्होंने बताया कि योजना के लिए राज्य में एक  लाख 46 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है। इनमें से 32 हजार 500 के यहां सोलर रुफ टॉप लाए जा चुके हैं, 55 हजार प्रगति पर है। योजना में शामिल 15 हजार परिवारों का बिजली बिल जीरो हो गया है।

सरकारी भवनों में इस वजह से नहीं लग पा रहा सोलर प्लांट

सरकारी कार्यालयों और भवनों में योजना के तहत सोलर रुफ टॉप नहीं लाए जाने पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। बताया कि सरकारी भवनों के लिए  किसी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए अलग कार्य योजना पर काम चल रहा है। सरकारी भवनों और कार्यालयों में भी सोलर रुफ टॉप लगेगें।

आरडीएसएस योजना में सातवें स्थान पर

पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना  (Revamped Distribution Sector Scheme – RDSS) आरडीएसएस को लेकर ऊर्जा सचिव ने बताया कि इस केंद्रीय योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में सातवें स्थान पर है। इसी योजना के तहत स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर को लेकर कई तरह की बातें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर स्थापित करने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर है।

स्मार्ट मीटर है क्या

डॉ. रोहित यादव ने बताया कि अभी डिजिटल मीटर हैं, इसमें दिक्कत यह है कि रीडिंग करने के लिए रीडर जाता है, रीडिंग को पढ़कर टाइप करता है फिर बिल बनता है, अधिकांश मीटर रीडर परिश्रम से काम करते हैं, लेकिन कहीं कहीं गड़बड़ी हो जाती है। वहीं, स्मार्ट मीटर में एक सिम कार्ड लगा है रीडिंग हर 30 मिनट में कंपनी के सर्वर पर आ जाता है। इससे उपभोक्ता को भी फायदा है।

क्यों लगा रहे हैं स्मार्ट मीटर

इस पर ऊर्जा सचिव ने बताया कि रीडिंग लेने के लिए रीडर पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा। बिलिंग में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं रहेगी।

रियल टाइम रीडिंग

गर्मी के मौसम में ट्रांसफार्मरों पर ओवर लोडिंग होगी, समय रहते पता चल जाए तो क्षमता बढ़ा सकते हैं। कहां ओवर लोडिंग हो रही है पता चलना चाहिए। इसके लिए ट्रांसफार्मर पर भी स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं, लोड बढ़ते ही इसकी सूचना कंट्रोल रुम में पहुंच जाती है है। इससे वहां लोड बढ़ाने समेत अन्य कार्यों को करने में आसानी होगी। इससे लाइन लास और बिजली चोरी को कंट्रोल किया जा सकता है।

अलर्ट भी जनरेट करेगा

उन्होंने बताया कि उपभोक्ता हर 30 मीनट में अपनी खपत देख सकते हैं। ज्यादा खपत होने पर अलर्ट भी जारी किया जाएगा। उन्होंने टाइम ऑफ डे टैरिफ की जानकारी देते हुए बताया कि अभी दिन में कभी भी बिजली जलाए,  एक ही रेट लगता है, लेकिन बिजली कंपनी अलग-अलग कीमत पर खरीदती है। दिन में बिजली सस्ती रहती है, लेकिन पीक आवर (सुबह और शाम के दो दो घंटे)में बिजली 10 रुपए प्रति यूनिट तक खरीदनी पड़ती है।

उपभोक्ताओं को रियायत देने पर विचार

उन्होंने बताया कि पीक ऑवर में बिजली की खपत नियंत्रित और कम करने वाले उपभोक्ताओं को बिल में कुछ रियायत देने की योजना पर विचार किया जा रहा है। योजना है कि पीक ऑवर में जिस उपभोक्ता के यहां ज्यादा लोड दिखेगा उसे मैसेज भेजा जाएगा।

शासकीय कार्यालयों में स्मार्ट मीटर

उन्होंने बताया कि शासकीय कार्यालय में विकासखंड तक स्मार्ट मीटर लग चुका है। ग्राम पंचायतों में भी 55 प्रतिशत हो गया है। इसके और तेजी से किया जा रहा है।

शासकीय विभागों की बिजली क्यों नहीं काटी जाती

सरकारी विभागों का भारीभरकम बिल बकाया होने के बाद भी बिजली नहीं काटे जाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि वह बिल किसी कॉलेज, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक प्रकाश और पानी का हो सकता है, यह सब भी आम लोगों से जुड़ा है। इसी वजह से उनकी बिजली काटने से पहले संवेदनशील रहते हैं। उन्होंने बताया कि शासकीय कार्यालयों के लिए प्री पेड बिलिंग का सिस्टम लागू किया जा रहा है।

पांच दिन के लिए बहाल हो जाएगी बिजली

ऊर्जा सचिव ने बताया कि स्मार्ट मीटर में ऑटोमेटिक बिजली काटने की व्यवस्था, लेकिन काटने से पहले अलर्ट जाएगा। इसके बाद भी बिजली कटता है तो एक नीले रंग का बटन दबा देगें तो पांच दिन बिजली फिर आ जाएगी।

आम लोगों के लिए प्रीपेड नहीं

उन्होंने जोर देते हुए स्पष्ट किया कि प्रीपेड बिलिंग केवल शासकीय भवनों के लिए आम लोगों के लिए लागू करने की कोई योजना नहीं है।

ज्यादा बिल आने की शिकायत

ज्यादा बिल आने की शिकायतों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक उपभोक्ता का 65 हजार रुपए बिल आ गया था शिकायत के बाद जांच की गई तो पता चला कि उन्होंने केवल 40 वॉट का कलेक्शन लिया था, जबकि उनके यहां का लोड 1340 वॉट था। इतना ही नहीं चार साल में केवल चार बार बिल का भुगतान किया था। डॉ. रोहित यादव ने बताया कि अभी तक सब काम मैन्यूवल चल रहा था, अब पूरा डेटा एकत्र हो गया है।

चेक मीटर की सुविधा

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी उपभोक्ता को लगाता है कि स्मार्ट मीटर तेज चल रहा है तो चेक मीटर लगाने की व्यवस्था है। इसमें कंपनी स्मार्ट मीटर के साथ पुराना डिजिटल मीटर भी लगा देती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऐसे 1870 स्थान पर मीटर लगाए गए थे, कहीं भी स्मार्ट मीटर के तेज चलने की सही नहीं पाई गई।

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