
रायपुर: छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए कड़े तेवर दिखाए हैं। नवा रायपुर में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ई-ऑफिस (e-Office) में फाइलें बिना स्पष्ट अभिमत और नियमों के स्वीकार नहीं की जाएंगी।
बैठक में पिछले साल के बजट और नए वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। श्री बोरा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुँचना चाहिए।
समय के पाबंद रहें कर्मचारी (Be Punctual)
प्रमुख सचिव ने आधार फेस अटेंडेंस सिस्टम (Aadhaar Face Attendance) की समीक्षा करते हुए समय पर दफ्तर आने वाले कर्मचारियों की सराहना की। इसके विपरीत (On the contrary), जो कर्मचारी ड्यूटी के समय में लापरवाही बरत रहे हैं, उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक की मुख्य बातें (Key Highlights):
- बजट लक्ष्य: आगामी वित्तीय वर्ष में व्यय का लक्ष्य 68% से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने का टारगेट।
- बड़ी उपलब्धि: केंद्र सरकार से ‘धरती आबा योजना’ और ‘एकलव्य विद्यालयों’ के लिए भारी-भरकम बजट प्राप्त हुआ है।
- ई-ऑफिस अनिवार्य: फाइलों के त्वरित निराकरण के लिए स्पष्ट नियमों के साथ प्रस्तुतीकरण जरूरी।
- संग्रहालय विकास: आदिवासी संग्रहालय और शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय की आय-व्यय की समीक्षा।
विकास को मिलेगी रफ्तार (Acceleration of Growth)
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में विभाग बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विशेष रूप से (Specifically), छत्तीसगढ़ को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए 732 करोड़ और 21 नए एकलव्य स्कूलों के लिए 915 करोड़ रुपये मिले हैं।
प्रमुख सचिव ने कहा कि इन फंड्स का सही इस्तेमाल छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों की तस्वीर बदल देगा। अंततः (Ultimately), विभाग का लक्ष्य शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।







