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भटके कदमों को मिला मुख्यधारा का मरहम: सुकमा में CM साय ने लिखी ‘पुनर्वास से विकास’ की नई इबारत

सुकमा नक्सल पुनर्वास

Sukma Naxal Rehabilitation रायपुर/सुकमा: बस्तर की फिजाओं में अब बारूद की गंध नहीं, बल्कि बदलाव (Transformation) की महक है। सुकमा जिला, जो कभी संघर्षों के लिए जाना जाता था, आज शांति और विश्वास का नया अध्याय लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Center) का दौरा कर यह संदेश दिया कि राज्य सरकार भटके हुए लोगों को गले लगाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध (Committed) है।

सुकमा पुनर्वास कार्यक्रम: मुख्य आकर्षण (Key Highlights)

  • डिजिटल कनेक्टिविटी: 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को स्मार्टफोन का वितरण किया गया।
  • सरकारी रोजगार: पुलिस विभाग में 20 और जिला प्रशासन में 95 युवाओं को नियुक्ति पत्र (Appointment Letters) सौंपे गए।
  • आवास का सपना: प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 25 परिवारों को घर की चाबियां दी गईं।
  • आर्थिक सहायता: मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को हर महीने ₹10,000 का स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
  • महिला सशक्तिकरण: 115 महिलाएं विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर (Self-reliant) बन रही हैं।
  • कॉफी टेबल बुक: ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ पुस्तक का विमोचन।

संवाद से बढ़ा साहस: अपनों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्र में रह रहे लोगों से बहुत ही आत्मीय संवाद (Heartfelt Interaction) किया। उन्होंने न केवल उनके अनुभवों को सुना, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा (Mainstream) से जुड़कर नया जीवन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले 2392 लोग इस बात का प्रमाण हैं कि शांति की राह ही असली प्रगति की राह है।

डिजिटल क्रांति और कौशल विकास की सौगात

सरकार केवल नाम के लिए पुनर्वास नहीं कर रही, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर (Self-reliant) बना रही है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान:

कॉफी टेबल बुक का विमोचन: बदलती तस्वीर की कहानी

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। यह पुस्तक उन प्रेरणादायक कहानियों (Inspirational Stories) का संग्रह है, जो नक्सलवाद का अंधेरा छोड़कर उजाले की ओर बढ़े हैं। पुनर्वास केंद्र में वर्तमान में सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चलाने जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण (Skill Development Training) दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और सांसद महेश कश्यप सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बने।

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