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Vijay Sharma अब खिलखिला रहा है बस्‍तर, डिप्‍टी ने CM बताया- कैसे 50 साल की समस्‍या 2 वर्ष में हो गई समाप्‍त, जानिए- नक्‍सलवाद के खात्‍में का किसे दिया श्रेय

Vijay Sharma रायपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्‍तीसगढ़ अब सशस्‍त्र नक्‍सलवाद के दंश से मुक्‍त हो गया है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे पिछले पांच दशकों से प्रदेश को डस रही नक्सल समस्या को केंद्र और राज्‍य की भाजपा सरकार ने मात्र दो साल के भीतर समाप्ति की कगार पर ला खड़ा किया है। विजय शर्मा ने इस बड़ी सफलता का श्रेय बस्तर की जनता और जवानों के शौर्य को दिया है।

सरकार बदली तो बदल गया ‘संकल्प’

विजय शर्मा ने कहा कि दिसंबर 2023 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद सिस्टम या अधिकारी नहीं बदले, बल्कि सरकार का ‘संकल्प’ बदल गया। उन्होंने बताया, “संकल्प लेना साहस का काम है, लेकिन उसे धरातल पर उतारना सामर्थ्य का। जनवरी 2024 में अमित शाह जी के साथ हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया कि देश के कुल नक्सलवाद का 75% हिस्सा और 90% सशस्त्र नक्सली केवल छत्तीसगढ़ में थे।”

अमित शाह का रोडमैप और तकनीक का कमाल

गृह मंत्री ने खुलासा किया कि जब अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की घोषणा की, तो उन्हें भी आश्चर्य हुआ था। लेकिन जब गृह मंत्री ने ‘मल्टीपल डायमेंशन’ वाला रोडमैप दिखाया, तो जीत सुनिश्चित लगने लगी।

“हमने तकनीक आधारित इंटेलिजेंस को इतना मजबूत किया कि घने जंगलों के भीतर भी नक्सली गतिविधियां स्पष्ट दिखने लगीं। इसी का नतीजा रहा कि हमारे ऑपरेशनों में जवानों को खरोंच तक नहीं आई और बड़ी संख्या में नक्सली न्यूट्रलाइज हुए।” — विजय शर्मा, गृह मंत्री

बस्तर की जनता ने छोड़ा ‘लाल आतंक’ का साथ

विजय शर्मा ने कहा कि इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय बस्तर की जनता को जाता है। उन्होंने अब ‘लाल आतंक’ के बजाय विकास (सड़क, बिजली, पानी, मोबाइल टावर) को चुन लिया है। उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब नक्सली मारे जा रहे थे, तब विपक्ष इसे ‘फर्जी’ बता रहा था, लेकिन बाद में नक्सलियों ने खुद पर्चा जारी कर मौतों की पुष्टि की।

‘सरेंडर’ नहीं, अब होगा ‘ससम्मान पुनर्वास’

राज्य सरकार ने अपनी रणनीति में मानवीय दृष्टिकोण को भी जोड़ा है। गृह मंत्री ने बताया:

  • सम्मानजनक वापसी: अब ‘सरेंडर’ शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता, बल्कि इसे ‘ससम्मान पुनर्वास’ कहा जाता है।
  • सीधा संवाद: नक्सलियों से बात करने के लिए बारकोड जारी किए गए और वीडियो कॉल तक की पेशकश की गई।
  • बस्तर ओलंपिक: बस्तर पंडूम और ओलंपिक जैसे आयोजनों के जरिए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा गया।

आंकड़ों में सफलता की कहानी

पिछले दो वर्षों में साय सरकार की कार्रवाई के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • पुनर्वास (मुख्यधारा में वापसी): 3,000 नक्सली
  • गिरफ्तारी: 2,000 नक्सली
  • न्यूट्रलाइज (मारे गए): 536 नक्सली

“अब खिलखिला रहा है बस्तर”

गृह मंत्री ने अंत में भावुक होते हुए कहा कि आज बस्तर के गांवों में लोग खिलखिलाकर हंस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब जाकर आजादी महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद कोई ‘सामाजिक-आर्थिक समस्या’ नहीं थी, बल्कि बंदूक के दम पर सत्ता हथियाने की एक विचारधारा थी, जिस पर भारतीय लोकतंत्र ने विजय प्राप्त की है।

“अभी भी समय है, मुख्यधारा में लौट आएं, सरकार आपके पुनर्वास के लिए तैयार है।”

यह वाक्य केवल एक संदेश नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक ‘सुनहरा अवसर’ है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं। सरकार की इस अपील के पीछे छिपे मुख्य उद्देश्यों को हम इस प्रकार समझ सकते हैं:

सम्मान के साथ नई शुरुआत

गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि अब ‘सरेंडर’ जैसे अपमानजनक शब्दों के बजाय ‘ससम्मान पुनर्वास’ की नीति अपनाई जा रही है। इसका अर्थ है कि मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्ति को समाज में अपराधी की तरह नहीं, बल्कि एक नागरिक की तरह स्वीकार किया जाएगा।

विकास की गारंटी

पुनर्वास नीति के तहत सरकार कई लाभ प्रदान कर रही है, जैसे:

  • आर्थिक सहायता: रोजगार और स्वरोजगार के लिए वित्तीय मदद।
  • आवास और शिक्षा: बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा और परिवार के लिए रहने की व्यवस्था।
  • सुरक्षा: मुख्यधारा में आने के बाद व्यक्ति और उसके परिवार की पूरी सुरक्षा।

‘बंदूक’ बनाम ‘लोकतंत्र’

जैसा कि मंत्री जी ने कहा, समस्या का समाधान हिंसा नहीं बल्कि संवाद है। बस्तर के गांव-गांव तक अब सड़क, बिजली और मोबाइल टावर पहुँच रहे हैं। ऐसे में विकास की इस दौड़ में शामिल होने के लिए यह सही समय है।

यह अपील नक्सलियों के लिए एक एग्जिट गेट (Exit Gate) की तरह है। जब बस्तर की जनता खुद विकास की मांग कर रही है और लोकतंत्र को चुन चुकी है, तो सशस्त्र संघर्ष का कोई भविष्य शेष नहीं रह जाता। यह आह्वान समाज के हर उस व्यक्ति के लिए है जो भटकाव की राह पर है।

यह वाक्य छत्तीसगढ़ सरकार की उस ‘उदार’ और ‘दृढ़’ नीति का परिचायक है, जहाँ एक हाथ में सुरक्षा बलों का वज्र है, तो दूसरे हाथ में पुनर्वास की कोमलता।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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