
ACB रायपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) ने 26 साल पुराने एक बड़े गबन मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। ब्यूरो ने ‘सहकारी आवास संघ मर्यादित भोपाल’ के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा को गिरफ्तार किया है । यह पूरी कार्रवाई वर्ष 2000 में दर्ज अपराध क्रमांक 19/2000 के तहत की गई है ।
गबन कांड: एक नजर में
- घोटाले की राशि: 1 करोड़ 86 लाख रुपये।
- फर्जीवाड़ा: 186 फर्जी सदस्यों के नाम पर लिया गया था लोन ।
- गिरफ्तारी: तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा गिरफ्तार ।
- रिमांड: 07 अप्रैल 2026 तक पूछताछ के लिए पुलिस की हिरासत में ।
क्या है पूरा मामला?
जांच में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 1995 से 1998 के बीच शासन की योजना के तहत जरूरतमंदों को मकान निर्माण के लिए ऋण दिया जाना था । इस दौरान ‘आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर’ के 186 सदस्यों के नाम पर 1-1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया ।
कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये की इस राशि का आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेजों और फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए बंदरबांट कर लिया । जब विभाग ने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया, तो न तो बताए गए स्थलों पर मकान मिले और न ही वे सदस्य वहां मौजूद थे जिनके नाम पर लोन लिया गया था ।
ऐसे रचा गया आपराधिक षड्यंत्र
ब्यूरो की जांच के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया था:
मुख्य खिलाड़ी: तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा, तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी और आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू ने मिलकर सरकारी पैसे का गबन किया ।
फर्जीवाड़ा: प्रदीप कुमार निखरा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कूटरचित दस्तावेजों (Forged Documents) के जरिए फर्जी लोन तैयार किए ।
पूर्व की गिरफ्तारियां: इस मामले में ब्यूरो ने पहले ही 18 मार्च 2026 को दो अन्य आरोपियों—थावरदास माधवानी और बसंत कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया था ।
7 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर आरोपी
गिरफ्तार आरोपी प्रदीप कुमार निखरा को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 07 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है । इस प्रकरण में धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं (120बी, 406, 409, 420, 467, 468, 471 IPC एवं 13(1)(सी), 13(2) PC Act) के तहत मामला दर्ज है ।
बता दें कि इस केस में दो अन्य नामजद आरोपियों की मौत हो चुकी है । ब्यूरो अब रिमांड के दौरान आरोपी से अन्य कड़ियों और गबन की गई राशि की वसूली के संबंध में पूछताछ करेगा।







