
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा बदलाव उस समय देखने को मिला, जब राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री Ajit Jogi का निधन हुआ। उनके निधन के बाद उनके पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले Marwahi विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हुआ, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा।
🔹 जोगी के गढ़ में चुनावी मुकाबला
मरवाही लंबे समय तक अजीत जोगी का मजबूत गढ़ रहा था। उनके व्यक्तिगत प्रभाव और जनाधार के चलते यहां चुनाव अक्सर एकतरफा माना जाता था। लेकिन उनके निधन के बाद पहली बार यह सीट खुली और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।
उपचुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी। इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। चुनावी मैदान में मुद्दों के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव भी एक अहम फैक्टर रहा, क्योंकि जोगी का नाम और उनकी विरासत अब भी मतदाताओं के बीच प्रभावशाली थी।
🔹 कांग्रेस की रणनीति और जीत
इस उपचुनाव में Indian National Congress ने मजबूत रणनीति अपनाई। पार्टी ने स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और संगठनात्मक मजबूती के दम पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस उम्मीदवार को स्पष्ट बढ़त मिली और उन्होंने जीत दर्ज कर इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखा।
🔹 भाजपा और अन्य दलों की चुनौती
भारतीय जनता पार्टी ने भी इस चुनाव में पूरी ताकत लगाई और इसे सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत के रूप में पेश करने की कोशिश की। हालांकि, उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। वहीं, अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा।
🔹 चुनाव के प्रमुख मुद्दे
उपचुनाव के दौरान स्थानीय विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, वनाधिकार और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। इसके अलावा, जोगी परिवार की विरासत और उनके प्रति लोगों का भावनात्मक लगाव भी मतदान को प्रभावित करता नजर आया।
🔹 राजनीतिक महत्व
मरवाही उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति के लिए एक संकेतक भी था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अजीत जोगी के बाद इस क्षेत्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।







