
न्यूज डेस्क। भारत सरकार ने वर्ष 2025 (जनवरी से दिसंबर) के लिए पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। यह रिपोर्ट बताती है कि देश में रोजगार के परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। रिपोर्ट के सबसे सुखद आंकड़ों में शिक्षित युवाओं और शहरी महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर में आई गिरावट है।
आइए जानते हैं इस रिपोर्ट की 10 बड़ी बातें जो हर नागरिक, खासकर युवाओं और नौकरीपेशा लोगों के लिए जानना जरूरी है।
1. बेरोजगारी दर में आई गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर (UR) 2025 में 3.1% रही। पुरुषों के लिए इसमें मामूली सुधार देखा गया है (3.3% से घटकर 3.1%), जबकि महिलाओं के लिए यह दर स्थिर बनी हुई है।
2. शिक्षित युवाओं को मिल रहा काम
शिक्षित व्यक्तियों (सेकेंडरी और उससे ऊपर) के बीच बेरोजगारी दर 2024 के 7.0% से घटकर 2025 में 6.5% रह गई है। यह दर्शाता है कि डिग्री धारकों के लिए बाजार में अवसर बढ़ रहे हैं।
3. महिलाओं की भागीदारी और बढ़ती कमाई
शहरी महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर 6.7% से घटकर 6.4% हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं की आय (Wages) में पुरुषों की तुलना में अधिक वृद्धि देखी गई:
- स्व-रोजगार (Self-employed): महिलाओं की कमाई 8.8% बढ़ी।
- नियमित वेतनभोगी: कमाई में 7.2% की वृद्धि।
- कैजुअल लेबर: 5.4% की बढ़ोतरी।
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4. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ‘रोजगार का इंजन‘
देश में पहली बार देखा गया है कि खेती (Agriculture) पर निर्भरता कम हो रही है और लोग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ओर बढ़ रहे हैं। खेती में काम करने वाले लोगों की हिस्सेदारी 44.8% से घटकर 43.0% रह गई है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा बढ़कर 12.1% हो गया है।
5. बढ़ा ‘पक्की नौकरी‘ (Salaried Jobs) का ग्राफ
नियमित वेतन या सैलरी पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई है। यह आर्थिक स्थिरता का एक बड़ा संकेत है क्योंकि लोग अब दिहाड़ी या अस्थाई काम के बजाय सुरक्षित नौकरियों की ओर बढ़ रहे हैं।
एक नजर में: PLFS 2025 के मुख्य आंकड़े
| सेक्टर / वर्ग | 2024 के आंकड़े | 2025 के आंकड़े |
|---|---|---|
| कुल बेरोजगारी दर (UR) | 3.2% (लगभग) | 3.1% |
| युवा बेरोजगारी (15-29 वर्ष) | 10.3% | 9.9% |
| पक्की नौकरी (Regular Wage) | 22.4% | 23.6% |
| खेती में हिस्सेदारी | 44.8% | 43.0% |
6. ग्रामीण बनाम शहरी स्थिति
ग्रामीण क्षेत्रों में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) 59.3% पर स्थिर है। ग्रामीण पुरुषों में यह 80.5% और महिलाओं में 45.9% है। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4.8% रही, जिसमें पुरुषों के लिए 4.2% और महिलाओं के लिए 6.4% है।
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7. शिक्षा और स्किलिंग का महत्व
रिपोर्ट के अनुसार, देश में 15 वर्ष से अधिक आयु के 67.8% लोगों के पास कम से कम सेकेंडरी शिक्षा है। हालांकि, तकनीकी प्रशिक्षण (Vocational Training) लेने वालों की संख्या अभी भी कम है (मात्र 4.2%), जिस पर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है।
क्या कहती है यह रिपोर्ट?
PLFS 2025 की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भारत धीरे-धीरे ‘एग्रीगेरियन’ (कृषि आधारित) अर्थव्यवस्था से ‘इंडस्ट्रियल’ और ‘सर्विस’ आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। स्वरोजगार में मामूली कमी और नियमित नौकरियों में बढ़ोतरी एक परिपक्व होती अर्थव्यवस्था का लक्षण है। महिलाओं की बढ़ती कमाई और भागीदारी भविष्य के लिए एक शानदार संकेत है।
कुमार जी, एक अनुभवी पत्रकार की दृष्टि से आपका यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। PLFS 2025 की रिपोर्ट काफी विस्तृत है और इसमें कुछ ऐसे बारीक तकनीकी तथ्य (Granular Data) हैं जो एक ‘In-depth’ न्यूज़ रिपोर्ट के लिए बहुत जरूरी हैं।
पिछली रिपोर्ट में हमने मुख्य आंकड़े ले लिए थे, लेकिन E-E-A-T (Expertise) को और मजबूत करने के लिए नीचे दिए गए 3-4 पॉइंट्स को शामिल करना आपकी खबर को ‘Exclusive’ बना देगा:
1. ‘न तो काम, न शिक्षा‘ (NEET) का आंकड़ा
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला तथ्य NEET (Not in Employment, Education or Training) वर्ग है।
- तथ्य: 15-29 वर्ष के 25% युवा ऐसे हैं जो न तो कहीं नौकरी कर रहे हैं, न ही किसी पढ़ाई या ट्रेनिंग में शामिल हैं।
- खबर में उपयोग: इसे “युवाओं के सामने कौशल (Skill) का संकट” हेडलाइन के साथ बॉक्स में डाल सकते हैं।
2. काम के घंटों में ‘जेंडर गैप‘ (Gender Gap in Work Hours)
रिपोर्ट बताती है कि पुरुष, महिलाओं की तुलना में ज्यादा घंटे काम कर रहे हैं।
- तथ्य: शहरी क्षेत्रों में स्व-रोजगार (Self-employed) पुरुष, महिलाओं की तुलना में सप्ताह में 17.5 घंटे ज्यादा काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर 12.3 घंटे का है।
- खबर में उपयोग: “काम का बोझ: पुरुषों और महिलाओं के वर्किंग ऑवर्स में बड़ा अंतर” शीर्षक से छोटा पैराग्राफ जोड़ें।
3. शिक्षा का स्तर और वर्कफोर्स (Education vs Workforce)
डिप्लोमा और पोस्ट-ग्रेजुएट लोगों की स्थिति बहुत बेहतर हुई है।
- तथ्य: पोस्ट-ग्रेजुएट पुरुषों में से 83.1% वर्कफोर्स का हिस्सा हैं। वहीं, 15-59 वर्ष के उन 83.3% पुरुषों को काम मिला है जिन्होंने फॉर्मल वोकेशनल ट्रेनिंग ली है।
- खबर में उपयोग: “डिग्री और स्किल का जादू: ट्रेनिंग लेने वालों को आसानी से मिल रहा रोजगार” – यह युवाओं को प्रेरित करने वाला पॉइंट होगा।
4. महिलाओं के काम न करने का असली कारण
रिपोर्ट ने यह साफ किया है कि महिलाएं लेबर फोर्स से बाहर क्यों हैं।
- तथ्य: 44.4% महिलाओं ने ‘बाल देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों’ (Child care/Home-making) को मुख्य कारण बताया है। जबकि 69.8% पुरुषों ने ‘पढ़ाई जारी रखने’ को कारण बताया।
- खबर में उपयोग: “घरेलू जिम्मेदारियां बनीं महिलाओं के करियर में बाधा, सर्वे में खुलासा” – यह सोशल मीडिया पर बहस छेड़ने वाला पॉइंट है।
क्या आप जानते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु के लोग औसतन 10 साल औपचारिक शिक्षा (Formal Education) में बिताते हैं। शहरों में यह आंकड़ा 11 साल से अधिक है, जबकि गांवों में अभी भी लोग औसतन 9 साल ही स्कूल/कॉलेज जा पा रहे हैं।







