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संसद में अमित शाह की चुनौती: भूपेश बघेल का नाम लेकर बोले- ‘प्रूफ दूं क्या, हां बोलोगे तो फंस जाओगे’

Amit Shah on Bhupesh Baghel, Naxalism in Chhattisgarh.

नई दिल्ली/रायपुर। संसद के मानसून सत्र में नक्सलवाद के मुद्दे पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की सियासत में भूचाल ला दिया है। शाह ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह सबूत मांगेंगे तो वह फंस जाएंगे। शाह ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन के दौरान नक्सल विरोधी अभियानों में जानबूझकर देरी की गई।

प्रूफ दूं क्या… हां बोलोगे तो फंस जाओगे”

सदन में चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल का जिक्र किया। जब विपक्ष ने उनके दावों पर हंगामा किया, तो शाह ने तल्ख अंदाज में कहा, मुझे किसी व्यक्ति के सामने कुछ साबित नहीं करना है। भूपेश बघेल को पूछो, प्रूफ दूं क्या यहां पर? अगर हां बोलेंगे तो बोलूंगा, वरना फंस जाओगे।” शाह ने आगे कहा कि 2019 में ही नक्सलवाद को खत्म करने का खाका तैयार हो गया था, लेकिन छत्तीसगढ़ में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे लागू करने में सहयोग नहीं किया और नक्सलियों को ‘कवच’ प्रदान किया।

जनवरी 2024 के बाद बदली तस्वीर

गृह मंत्री ने आंकड़ों के साथ बताया कि झारखंड, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्य दिसंबर 2024 से पहले ही लगभग नक्सल मुक्त हो गए थे। उन्होंने कहा, एकमात्र छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य था जहां कई जिले प्रभावित रहे। जनवरी 2024 में जैसे ही राज्य में भाजपा की सरकार आई, नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई। मैं खुद चुनाव के दूसरे ही महीने वहां गया और आज परिणाम सबके सामने है।”

नक्सली हिंसा के दिन अब लद गए

अमित शाह ने नक्सलियों की विचारधारा पर चोट करते हुए कहा कि यह कोई वैचारिक लड़ाई नहीं बल्कि निर्दोषों की हत्या का खेल है। उन्होंने कहा:

  • नक्सलियों ने पुलिस से लूटे हथियारों से आदिवासियों, महिलाओं और बच्चों का खून बहाया।
  • संविधान और राज्य की वैधता को किसी भी ‘अन्याय’ के नाम पर चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • वामपंथियों ने जानबूझकर थानों और स्कूलों को जलाकर ‘सुरक्षा का वैक्यूम’ पैदा किया ताकि उनका आतंक बना रहे।

31 मार्च 2026: अंतिम प्रहार की तारीख

शाह ने सदन में तीन महत्वपूर्ण तारीखों का जिक्र किया— 20 अगस्त 2019 (प्लानिंग), 24 अगस्त 2024 (समीक्षा) और 31 मार्च 2026 (लक्ष्य)। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार का संकल्प है कि 2026 तक भारत के नक्शे से नक्सलवाद का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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