
रायपुर। केंद्र सरकार महिला आरक्षण को जमीन पर उतारने के लिए संसद का विशेष सत्र (Special Session) बुलाने जा रही है। 131वें संविधान संशोधन विधेयक के जरिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव (Transformation) होने वाला है। इस बिल का सबसे दिलचस्प और बड़ा असर छत्तीसगढ़ की राजनीति पर पड़ने वाला है।
छत्तीसगढ़ में बदल जाएगा सीटों का गणित मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अभी विधानसभा की 90 और लोकसभा की 11 सीटें हैं। लेकिन महिला आरक्षण और नए परिसीमन (Delimitation) के लागू होते ही राज्य की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। प्रस्तावित बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा की सीटें बढ़कर 120 हो जाएंगी, वहीं लोकसभा की सीटें 15 होने की संभावना है।
महिलाओं के हाथ में होगी सत्ता की चाबी विधेयक के प्रावधानों के तहत छत्तीसगढ़ में बढ़ी हुई सीटों पर महिलाओं का दबदबा रहेगा। यह कदम महिला सशक्तिकरण (Empowerment) की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
छत्तीसगढ़ पर होने वाले मुख्य प्रभाव (Key Impacts):
- सीटों में इजाफा: विधानसभा की कुल सीटें 90 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
- महिला कोटा: बढ़ी हुई सभी 30 विधानसभा सीटों पर केवल महिला विधायक ही चुनी जाएंगी।
- लोकसभा का समीकरण: लोकसभा सीटों की संख्या 11 से बढ़कर 15 हो जाएगी, जिसमें 4 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- संवैधानिक बदलाव: सरकार ने इसके लिए अनुच्छेद-81 और अनुच्छेद-82 में संशोधन (Amendment) का प्रस्ताव दिया है।
2011 की जनगणना बनेगा आधार? ताजा इनपुट के अनुसार, सरकार 2011 की जनगणना (Census) को परिसीमन का आधार बनाने पर विचार कर रही है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच इसे लेकर टकराव (Conflict) की स्थिति बनी हुई है। सरकार का तर्क है कि अगली जनगणना और उसके बाद के परिसीमन में काफी समय लग सकता है, इसलिए महिलाओं की भागीदारी में देरी न हो, इसके लिए यह त्वरित फैसला (Quick Decision) जरूरी है।
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लोकसभा में होंगे 850 सदस्य देश स्तर पर देखें तो परिसीमन के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 850 करने का प्रस्ताव है। इसमें से 815 सीटें राज्यों से होंगी जिनका सीधा चुनाव होगा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए यह संख्या वृद्धि राजनीतिक प्रतिनिधित्व (Representation) को और अधिक मजबूत करेगी।
महिला आरक्षण विधेयक लागू होने से छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में नई हलचल शुरू हो गई है। नए परिसीमन से न केवल सीटों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्धारण (Policy Making) में महिलाओं की भूमिका भी निर्णायक (Decisive) होगी।
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