
न्यूज डेस्क। भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। मोदी सरकार ने 2047 तक परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) की क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुँचाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके लिए न सिर्फ भारी निवेश किया जा रहा है, बल्कि नए कानूनों के जरिए प्राइवेट सेक्टर को भी आमंत्रित किया गया है।
परमाणु ऊर्जा मिशन: 20,000 करोड़ का मेगा प्लान
भारत की बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए सरकार ने Nuclear Energy Mission को टॉप प्रायोरिटी पर रखा है। केंद्रीय बजट 2025-26 में इस मिशन के लिए ₹20,000 करोड़ का भारी-भरकम फंड आवंटित किया गया है।
इस निवेश का मुख्य उद्देश्य Small Modular Reactors (SMRs) का विकास करना है। ये छोटे रिएक्टर कम जगह में और कम समय में तैयार हो जाते हैं, जिससे देश के कोने-कोने तक स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) पहुँचाना आसान हो जाएगा।
क्या है SHANTI Act, 2025? (बदलाव की नई लहर)
परमाणु क्षेत्र में अब तक केवल सरकारी कंपनियों का एकाधिकार था, लेकिन SHANTI Act (The Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act, 2025) ने गेम बदल दिया है।
- प्राइवेट भागीदारी (Private Participation): इस कानून के तहत अब निजी क्षेत्र की कंपनियां परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निवेश कर सकेंगी।
- आधुनिक फ्रेमवर्क: यह कानून भारत के दशकों पुराने परमाणु नियमों को आधुनिक बनाता है।
- सुरक्षा मानक: निजी कंपनियों के आने के बाद भी सुरक्षा की कमान सरकार और नियामक संस्थाओं के पास ही रहेगी।
100 GW क्षमता: कैसे पूरा होगा यह विशाल लक्ष्य?
वर्तमान में भारत की परमाणु क्षमता लगभग 8.78 GW है। इसे 2047 तक 100 GW तक ले जाने के लिए सरकार मल्टी-लेवल स्ट्रेटेजी (Multi-level Strategy) पर काम कर रही है:
- स्वदेशी SMRs: कम से कम 5 स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर 2033 तक चालू करने का लक्ष्य है।
- विदेशी सहयोग: रूस और अन्य देशों के साथ मिलकर 1000 MW के बड़े रिएक्टरों का निर्माण तेज किया जाएगा।
- भारत स्मॉल रिएक्टर (BSMR-200): भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) 200 मेगावाट के खास रिएक्टर डिजाइन कर रहा है।
- नेट जीरो विजन: यह पूरा मिशन भारत के 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन (Zero Emissions) के संकल्प को पूरा करने की रीढ़ है।
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हाइड्रोजन जनरेशन और भविष्य की तकनीक
यह मिशन सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं है। भारत ऐसे High-Temperature Gas-Cooled Reactors भी बना रहा है जिनका इस्तेमाल ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ (Green Hydrogen) बनाने में होगा। इससे ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्रीज को प्रदूषण मुक्त करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि SHANTI Act भारत के परमाणु क्षेत्र के लिए वही काम करेगा, जो 1991 के सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किया था।
1. आम आदमी को क्या फायदा? (The ‘So What?’ Factor)
खबर में यह बताना जरूरी है कि इस मिशन से आम नागरिक के जीवन पर क्या असर पड़ेगा:
- सस्ती बिजली: परमाणु ऊर्जा कोयले के मुकाबले लंबे समय में सस्ती बिजली (Cheaper Electricity) प्रदान करती है।
- 24/7 सप्लाई: सौर और पवन ऊर्जा के साथ समस्या यह है कि वे धूप या हवा पर निर्भर हैं, लेकिन परमाणु ऊर्जा बिना रुके दिन-रात बिजली (Uninterrupted Power) दे सकती है।
- प्रदूषण से राहत: शहरों में बढ़ते स्मॉग और प्रदूषण के बीच, यह ‘जीरो एमिशन’ वाला बिजली स्रोत है।
2. कोयला बनाम परमाणु ऊर्जा (A Quick Comparison Table)
एक छोटी सी टेबल खबर की Scannability बढ़ा देती है:
| फीचर | कोयला आधारित बिजली | परमाणु ऊर्जा (Nuclear) |
| प्रदूषण | बहुत ज्यादा (CO2 उत्सर्जन) | शून्य (Zero Emission) |
| ईंधन की मात्रा | लाखों टन कोयला चाहिए | कुछ किलो यूरेनियम/थोरियम |
| विश्वसनीयता | उच्च | अत्यधिक उच्च (24×7) |
| भविष्य | धीरे-धीरे खत्म हो रहा है | भारत का भविष्य (Sustainable) |
3. ‘थोरियम’ – भारत का छिपा हुआ खजाना (The Game Changer)
- भारत के पास दुनिया का लगभग 25% थोरियम भंडार है।
- अभी तक हम यूरेनियम के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थे, लेकिन कलपक्कम का नया रिएक्टर (PFBR) हमें उस रास्ते पर ले जाएगा जहाँ हम अपने समुद्र तट की रेत (Monazite sand) से बिजली बना सकेंगे। यह Energy Independence की असली कहानी है।
उत्तर: हाँ, भारत के नए रिएक्टर ‘पैसिव सेफ्टी सिस्टम’ से लैस हैं, जो बिजली कटने या मानवीय गलती होने पर अपने आप सुरक्षित तरीके से बंद हो जाते हैं।
उत्तर: ‘SHANTI Act 2025’ के बाद, सरकार के साथ पार्टनरशिप में निजी क्षेत्र के निवेश का रास्ता खुल गया है।







