
8th Pay Commission Salary Calculation न्यूज डेस्क। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की ओर से सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। नेशनल काउंसिल JCM (Staff Side) ने अपने हालिया मेमोरेंडम (Memorandum) में वेतन गणना के लिए एक ऐसा ‘वैज्ञानिक फॉर्मूला’ (Scientific Formula) प्रस्तावित किया है, जो स्वीकृत होने पर कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी का रास्ता साफ कर देगा।
वेतन गणना का नया फॉर्मूला: 3 के बजाय 5 यूनिट की मांग
अभी तक कर्मचारियों के वेतन की गणना ‘3 यूनिट’ (पति-पत्नी और एक बच्चा) के आधार पर की जाती थी। लेकिन जेसीएम ने मांग की है कि इसे बदलकर ‘5 यूनिट’ किया जाना चाहिए। इसमें कर्मचारी के साथ उसका जीवनसाथी, दो बच्चे और आश्रित माता-पिता (Dependents) को शामिल किया गया है। जेसीएम का तर्क है कि बढ़ती सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच 3 यूनिट का आधार अब तार्किक नहीं रह गया है।
कैलोरी मानक में बड़ा बदलाव: 2700 की जगह 3490 Kcal
खबर का सबसे तकनीकी और ठोस पक्ष डाइट चार्ट (Diet Chart) से जुड़ा है। मेमोरेंडम में कहा गया है कि वर्तमान में इस्तेमाल किया जाने वाला 2700 कैलोरी का मानक एक कामकाजी व्यक्ति के लिए अपर्याप्त है।
- नई मांग: बेहतर कार्यक्षमता और स्वास्थ्य के लिए प्रति यूनिट 3490 कैलोरी (Kcal) का वैज्ञानिक मानक अपनाया जाए।
- असर: कैलोरी मानक बढ़ने से भोजन की टोकरी (Food Basket) की लागत बढ़ेगी, जिससे सीधे तौर पर न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) में बड़ा उछाल आएगा।
न्यूनतम वेतन ₹69,000 और 3.83 फिटमेंट फैक्टर
इस नए वैज्ञानिक आधार पर गणना करते हुए, कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन को वर्तमान के ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 करने की पुरजोर वकालत की है। इसके लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) सुझाया गया है। यदि सरकार इस फॉर्मूले को मानती है, तो 1 जनवरी 2026 से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में लगभग 4 गुना तक का इजाफा (Significant Jump) हो सकता है।
8th Pay Commission Salary Calculation अन्य प्रमुख तकनीकी सिफारिशें
JCM ने केवल वेतन ही नहीं, बल्कि काम की परिस्थितियों में भी सुधार के बिंदु रखे हैं:
- वेतन संशोधन (Pay Revision): इसे 10 साल के लंबे अंतराल के बजाय हर 5 साल में किया जाना चाहिए।
- सालाना इंक्रीमेंट: वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को 3% से बढ़ाकर 6% (Annual Increment) करने का प्रस्ताव।
- प्रमोशन का लाभ: लेवल 1 से 2 के बीच के ग्रेड पे को खत्म कर सीधे उच्च वेतनमान में विलय (Merger) की मांग।
ब्याज मुक्त एडवांस और नई सुविधाएं
ज्ञापन में कर्मचारियों के कल्याण (Welfare) के लिए कई तरह के एडवांस की मांग की गई है:
- पर्सनल कंप्यूटर एडवांस: ₹2,00,000 तक का ब्याज मुक्त ऋण।
- हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA): घर बनाने के लिए ₹2 करोड़ तक का ब्याज मुक्त लोन।
- वाहन ऋण: फोर-व्हीलर के लिए ₹10,00,000 तक का एडवांस देने का सुझाव।
- छुट्टियां: कैजुअल लीव (CL) को बढ़ाकर 12 दिन और मैटरनिटी लीव को 240 दिन करने की मांग।
इन पे-स्केल्स का होगा आपस में विलय (Merger)
खबर में सबसे बड़ा एंगल पे-स्केल के एकीकरण का है। JCM ने कई स्तरों को आपस में मिलाने का प्रस्ताव दिया है:
- लेवल 2 और लेवल 3 को मिलाकर नया लेवल 3 बनाया जाए।
- लेवल 4 और लेवल 5 का विलय कर नया लेवल 5 बने।
- लेवल 7 और लेवल 8 को मिलाकर लेवल 8 में बदला जाए।
- लेवल 9 और लेवल 10 का विलय लेवल 10 में करने का प्रस्ताव है।
महंगाई भत्ता (DA) और अन्य सुविधाएं
कर्मचारी पक्ष का कहना है कि महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) सीधे तौर पर मुद्रास्फीति (Inflation) से जुड़ा होना चाहिए और इसकी गणना के लिए 6 महीने के औसत का उपयोग किया जाना चाहिए । इसके अलावा, जोखिम भरे कामों में लगे कर्मचारियों के लिए ‘रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस’ (Risk and Hardship Allowance) को बढ़ाकर न्यूनतम ₹10,000 प्रति माह करने की मांग की गई है।
प्रमुख मांगें: जो आपके वेतन पर डालेंगी सीधा असर
ज्ञापन में न केवल वेतन, बल्कि भत्तों और इंक्रीमेंट के नियमों में भी बदलाव के सुझाव दिए गए हैं:
- सालाना इंक्रीमेंट (Annual Increment): वर्तमान में वार्षिक वेतन वृद्धि 3% है, जिसे बढ़ाकर 6% करने की मांग की गई है ।
- पे-स्केल का विलय (Merger of Pay Scales): लेवल 2 और 3, लेवल 4 और 5, और लेवल 7 और 8 को आपस में मिलाने का प्रस्ताव है ।
- मकान किराया भत्ता (HRA): शहरों की श्रेणी के आधार पर HRA को 30%, 35% और 40% करने का सुझाव दिया गया है ।
- पेंशनभोगियों को राहत: 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनर्स को भी संशोधित पे-स्ट्रक्चर का लाभ देने की बात कही गई है ।
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