
रायपुर (chaturpost.com): छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार (Corruption) और रिश्वतखोरी के खिलाफ प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अब जमीन पर असर दिखाने लगी है। पिछले कुछ वर्षों में जांच एजेंसियों ने जिस तरह से जाल बिछाया है, उससे भ्रष्ट तंत्र में दहशत का माहौल है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सवा सात साल में कुल 199 अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
राजस्व विभाग बना भ्रष्टाचार का मुख्य केंद्र (Main Hub)
आंकड़ों पर गौर करें तो पकड़े गए भ्रष्ट कर्मियों में हर दूसरा व्यक्ति राजस्व विभाग (Revenue Department) से जुड़ा है। जमीन का नामांतरण (Mutation), सीमांकन (Demarcation) और मुआवजा वितरण जैसे कामों के बदले मोटी रकम वसूलना यहां आम बात हो गई थी।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- कुल गिरफ्तारियां: 2019 से मार्च 2026 तक कुल 199 अधिकारी जेल भेजे गए।
- राजस्व विभाग का दबदबा: गिरफ्तार होने वालों में एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी सबसे ज्यादा हैं।
- हॉटस्पॉट जिले: वर्ष 2025 में सूरजपुर (10), मुंगेली (6), रायपुर और रायगढ़ (5-5) में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई।
- 2026 की शुरुआत: इस साल के शुरुआती 3 महीनों में ही 15 भ्रष्ट कर्मी दबोचे जा चुके हैं।

साल-दर-साल गिरफ्तारी का ग्राफ (Yearly Data)
- 2019 17
- 2020 22
- 2021 14
- 2022 18
- 2024 53
- 2025 60 (सर्वाधिक)
- 2026 (मार्च तक) 15
बड़े घोटालों पर कसता कानूनी शिकंजा (Legal Action)
प्रदेश में केवल छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बड़े सिंडिकेट (Syndicate) पर भी प्रहार हुआ है। सरकार ने आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामलों में निलंबित आईएएस समीर विश्नोई और रानू साहू जैसे रसूखदारों पर भी कड़ा एक्शन लिया है।
इन बड़े घोटालों की चल रही है जांच:
- शराब घोटाला (Liquor Scam): 3,200 करोड़ रुपये के इस घोटाले में 51 आरोपियों पर शिकंजा कसा है।
- महादेव एप (Mahadev App): 20,000 करोड़ रुपये की सट्टेबाजी के मामले में प्रमोटरों की संपत्ति कुर्क की गई है।
- कोल लेवी घोटाला (Coal Levy Scam): 570 करोड़ रुपये के इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
- भारतमाला परियोजना: 500 करोड़ के मुआवजा घोटाले में तत्कालीन एसडीएम समेत कई गिरफ्तार।
शिक्षा और तकनीकी विभागों में भी ‘कमीशनखोरी’ (Commission Culture)
भ्रष्टाचार का यह जाल (Network) केवल जमीन के कागजों तक सीमित नहीं है। शिक्षा विभाग (Education Department) में ट्रांसफर-पोस्टिंग और पेंशन जारी करने के नाम पर भी अवैध वसूली का खेल चल रहा था। वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) में इंजीनियरों द्वारा ठेकेदारों से ‘ओके सर्टिफिकेट’ देने के बदले कमीशन (Commission) वसूलने के मामले भी उजागर हुए हैं।
चतुर विचार: छत्तीसगढ़ सरकार की यह त्वरित कार्रवाई (Prompt Action) दर्शाती है कि ईओडब्ल्यू और एसीबी को अब पहले से अधिक प्रशासनिक स्वतंत्रता दी गई है, जिससे जांच की पारदर्शिता (Transparency) बढ़ी है।







