
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) ने एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने राज्य के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि यदि कंपनी की डिस्पेंसरी या अस्पतालों में दवा उपलब्ध (Availability) नहीं है, तो पेंशनर्स को वह दवा मुफ्त में नहीं दी जाएगी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यदि पेंशनर बाहर से दवा खरीदते हैं, तो उन्हें उसका पैसा वापस (Reimbursement) भी नहीं मिलेगा। इसे सीधे तौर पर कंपनी की अपनी जिम्मेदारी (Responsibility) से पीछे हटने के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है नया आदेश? (The New Circular)
हाल ही में जारी परिपत्र क्रमांक 01-01/1997 (दिनांक 15 APR 2026) के अनुसार, कंपनी ने अपनी पुरानी चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजना के नियमों की व्याख्या (Explanation) की है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि:
- पेंशनर्स को केवल अस्पताल में उपलब्धता के आधार पर ही दवाएं मुफ्त मिलेंगी।
- नियमित कर्मचारियों के लिए ‘लोकल पर्चेस’ की व्यवस्था है, लेकिन पेंशनर्स के लिए ऐसी कोई गारंटी नहीं है।
- यदि अस्पताल में दवा स्टॉक में नहीं है, तो कंपनी उसे उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं है।
पेंशनर्स के साथ ‘दोहरा मापदंड’
बिजली कंपनी के इस फैसले से सेवानिवृत्त कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। एक तरफ कार्यरत कर्मचारियों के लिए दवा न होने पर बाजार से खरीदने और पैसे वापस पाने का प्रावधान है, वहीं दूसरी ओर जीवन भर सेवा देने वाले बुजुर्गों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
अक्सर सरकारी डिस्पेंसरी में आवश्यक दवाओं (Essential Medicines) का टोटा रहता है। ऐसे में यह नया नियम पेंशनर्स की जेब पर सीधा डाका डालने जैसा है।
पेंशनर्स में नाराजगी
- जिम्मेदारी से बचाव: कंपनी ‘लोकल पर्चेस’ की व्यवस्था बहाल करने में पूरी तरह विफल (Failure) साबित हुई है।
- मुफ्त इलाज का दावा फेल: कागजों पर मुफ्त दवा का वादा है, लेकिन ‘उपलब्धता’ की शर्त ने इसे मुश्किल बना दिया है।
- आर्थिक बोझ: गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों को अब महंगी दवाएं बाजार से खरीदनी होंगी।
- नीतिगत भेदभाव: नियमित और सेवानिवृत्त कर्मियों के बीच चिकित्सा लाभों को लेकर भेदभाव (Discrimination) स्पष्ट दिख रहा है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी का यह आदेश मानवीय दृष्टिकोण से भी सवालों के घेरे में है। जिस उम्र में स्वास्थ्य सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी समय प्रशासन ने ‘उपलब्धता’ का बहाना बनाकर पेंशनर्स को अधर में लटका दिया है। अब देखना यह होगा कि पेंशनर एसोसिएशन इस आदेश के खिलाफ क्या कदम उठाता है।

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