
Power Company रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों में पदोन्नति (Promotion) का विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है । छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16 अप्रैल 2024 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में 17 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के बाद अब अगली संभावित तारीख 13 अप्रैल 2026 तय की गई है ।
Supreme Court Update अब तक क्या हुआ? (Case History & Status)
इस महत्वपूर्ण मामले (Significant Case) की कानूनी यात्रा काफी लंबी रही है। संघ की याचिका पर पहली सुनवाई 24 फरवरी 2025 को हुई थी । इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कई तारीखों पर सुनवाई हो चुकी है:
- पिछली सुनवाई: 17 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट की 6 नंबर कोर्ट में सूचीबद्ध (Listed) था ।
- आगामी सुनवाई (Next Hearing): कोर्ट में अगली सुनवाई 13 अप्रैल 2026 को होने की प्रबल संभावना (Possibility) है।
- नोटिस और जवाब: कोर्ट ने इस याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है । वर्तमान में कुछ प्रतिवादियों (Respondents) द्वारा जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है ।
- अब तक की सुनवाई तारीखें: 24 फरवरी 2024, 22 जुलाई 2025, 14 अगस्त 2025, 07 अक्टूबर 2025, 19 जनवरी 2026 और 13 मार्च 2026
कोर्ट का अंतरिम आदेश: नियुक्तियों पर क्या होगा असर?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पहले ही स्पष्ट निर्देश (Directions) जारी किए हैं:
- प्रक्रिया जारी रहेगी: कोर्ट ने राज्य सरकार और बिजली कंपनी को चयन प्रक्रिया और पदोन्नति जारी रखने की अनुमति दी है ।
- अंतिम फैसले के अधीन: सभी नियुक्तियां और प्रमोशन इस याचिका के अंतिम परिणाम (Final Outcome) पर निर्भर करेंगे
- अनिवार्य शर्त: विभाग को हर प्रमोशन ऑर्डर में यह स्पष्ट लिखना होगा कि यह नियुक्ति कोर्ट के फैसले के अधीन है ।
अवमानना याचिका का भी है पेंच (Contempt Petition Details)
पदोन्नति विवाद के साथ-साथ कोर्ट में एक अवमानना याचिका (Contempt Petition No. 494/2025) भी लंबित है ।
- · यह याचिका कोर्ट के 24 फरवरी 2025 के आदेश के कथित उल्लंघन (Violation) को लेकर दायर की गई है ।
- · इसमें कुछ सरकारी अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है, जिनसे आदेशों के पालन को लेकर जवाब मांगा गया है।
जानिए- क्या है पदोन्नति विवाद और हाईकोर्ट का फैसला
दरअसल, पावर कंपनियों में विद्युत मंडल के समय से पदोन्नति में आरक्षण दिया जा रहा था। हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को अनुचित करार देते हुए अपने फैसले में 2004 की ग्रेडेशन लिस्ट के हिसाब से प्रमोशन देने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने आरक्षण का लाभ लेकर प्रमोट हुए अफसरो और कर्मियों को डिमोट करने के लिए भी कहा है।







