रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल लाने वाले ‘1500 करोड़ के लेन-देन’ वाले वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। रायपुर पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट से साफ हो गया है कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी था और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से भाजपा नेताओं की छवि बिगाड़ने के लिए बनाया गया था।
पुलिस की जांच में इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड एनएसयूआई (NSUI) के प्रदेश प्रवक्ता असलम मिर्जा और रणनीति मीडिया फर्म के संचालक आकाश जोशी को बताया गया है।
क्यों रची गई इतनी बड़ी साजिश?
पुलिस चार्जशीट के अनुसार, इस आपराधिक षड्यंत्र के पीछे बदला और राजनीतिक लाभ दोनों शामिल थे। मुख्य आरोपी आकाश जोशी, जो पूर्व में सीएमओ (CMO) का सोशल मीडिया देख रहा था, उसका 1 करोड़ रुपए का बिल भुगतान अटक गया था। साथ ही, उसका काम दूसरी कंपनी को दे दिया गया था। इसी गुस्से में उसने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ फर्जी कंटेंट तैयार करने का प्लान बनाया।
ऐसे काम करता था यह ‘सिंडिकेट’
पुलिस ने मोबाइल और पेन ड्राइव की फॉरेंसिक जांच के बाद इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया है:
आकाश जोशी: एंटी-बीजेपी कंटेंट तैयार कर अंकित दुबे को भेजता था।
अंकित दुबे: कंटेंट को व्यवस्थित कर जावेद तक पहुँचाता था।
जावेद: AI टूल्स का इस्तेमाल कर फर्जी आवाज और वीडियो तैयार करता था।
असलम मिर्जा (NSUI प्रवक्ता): वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की जिम्मेदारी संभालता था।
यश डागा: वीडियो को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाने में मदद करता था।
जांच में खुलासा: जब असलम ने अंकित से पूछा कि वह भाजपा से जुड़ा होने के बावजूद ऐसा क्यों कर रहा है, तो अंकित ने बताया कि आकाश जोशी का भुगतान रुकने के कारण वे भाजपा नेताओं को निशाना बना रहे हैं।
विशाल नेटवर्क और बड़े नेताओं की छवि पर हमला
बताते चलें कि 19 दिसंबर 2025 को रायपुर उत्तर सीट से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज कराई थी। इस फर्जी वीडियो में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, पवन साय, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नितिन नबीन जैसे बड़े नामों का इस्तेमाल कर 1500 करोड़ के कलेक्शन का झूठा दावा किया गया था।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी थे गुमराह
पुलिस की जांच में यह भी पाया गया कि इस फर्जी वीडियो के जरिए कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी भाजपा नेताओं को निशाना बनाया था। ऐसा माहौल बनाया गया जैसे संगठन के अंदरूनी कलह के कारण यह वीडियो लीक हुआ है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी और यह गिरोह पहले भी ‘बिजली बिल हाफ’ जैसे मुद्दों पर फर्जी वीडियो बना चुका है।
वर्तमान स्थिति: पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की कानूनी कार्यवाही जारी है।
🛡️ सावधान: AI Deepfake और फर्जी वीडियो को कैसे पहचानें?
आजकल आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके किसी भी नेता या व्यक्ति की आवाज और चेहरा बदलकर फर्जी वीडियो बनाना आसान हो गया है। खुद को और समाज को गुमराह होने से बचाने के लिए इन 5 बातों का ध्यान रखें:
- अप्राकृतिक चेहरे के हाव-भाव: वीडियो को ध्यान से देखें। क्या बोलने वाले की पलकें सामान्य रूप से झपक रही हैं? क्या होंठों की मूवमेंट (Lip-sync) आवाज के साथ पूरी तरह मैच कर रही है?
- अजीब आवाज और टोन: AI द्वारा बनाई गई आवाज अक्सर थोड़ी रोबोटिक या बिना किसी मानवीय उतार-चढ़ाव (Emotions) वाली हो सकती है। आवाज में अचानक आने वाले बदलावों पर गौर करें।
- बैकग्राउंड और लाइटिंग: डीपफेक वीडियो में अक्सर चेहरे की लाइटिंग और बैकग्राउंड की लाइटिंग अलग-अलग दिखती है। चेहरे के किनारों (Edges) पर धुंधलापन भी एक बड़ा संकेत है।
- विश्वसनीय स्रोतों की जांच: अगर कोई वीडियो बहुत सनसनीखेज दावा कर रहा है, तो उसे शेयर करने से पहले बड़ी न्यूज़ वेबसाइट्स या आधिकारिक सरकारी हैंडल्स (जैसे @RaipurPolice) पर क्रॉस-चेक जरूर करें।
- रिवर्स इमेज सर्च: वीडियो के स्क्रीनशॉट लेकर गूगल रिवर्स इमेज सर्च (Google Reverse Image Search) करें। इससे पता चल जाएगा कि मूल वीडियो पुराना है या किसी और संदर्भ में था।
Chaturpost की अपील: किसी भी संदिग्ध वीडियो को बिना जांचे फॉरवर्ड न करें। आपकी एक सतर्कता किसी बड़ी साजिश को नाकाम कर सकती है।

