रायपुर। बस्तर की फिजाओं में अब बारूद की गंध नहीं, बल्कि अपनों के लौटने की उम्मीदें महक रही हैं। 31 मार्च 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हुआ जब बस्तर संभाग को पूरी तरह से ‘नक्सल मुक्त’ घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के ठीक दो दिन बाद, राज्य सरकार ने उन हजारों परिवारों के पुनर्वास की कवायद शुरू कर दी है, जिन्हें दशकों तक नक्सली हिंसा और ‘लाल आतंक’ के खौफ ने अपनी जड़ों और पुश्तैनी जमीनों से दूर कर दिया था।
मंत्रालय (महानदी भवन) में अपर मुख्य सचिव (गृह), मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की पहली बैठक में इन विस्थापितों की सुरक्षित और सम्मानजनक घर वापसी के लिए एक ‘ब्लू प्रिंट’ तैयार किया गया।
नक्सली हिंसा ने छीना था आशियाना, अब सरकार देगी सहारा
दशकों चले नक्सली संघर्ष के दौरान दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के हजारों ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए सीमावर्ती राज्यों—तेलंगाना और आंध्र प्रदेश—के जंगलों में जाकर बस गए थे। नक्सली भय के कारण ये लोग अपनी खेती और पहचान दोनों खो चुके थे। अब जबकि बस्तर से आतंक का साया हट चुका है, सरकार ने इनके पुनर्वास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है।
विस्थापन का दर्द: आंकड़ों की जुबानी
सर्वे के अनुसार, नक्सलवाद के कारण विस्थापित हुए परिवारों की संख्या चौंकाने वाली है:
- तेलंगाना में शरणार्थी: दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के 19,709 लोग (4,345 परिवार) वर्तमान में तेलंगाना के 467 गांवों में रह रहे हैं।
- आंध्र प्रदेश में शरणार्थी: इन तीनों जिलों के 11,389 लोग (2,594 परिवार) आंध्र के 184 गांवों में जीवन बसर कर रहे हैं।
- कुल विस्थापित: कुल 31,098 व्यक्ति (6,939 परिवार) अपनी माटी से दूर हैं, जिन्हें अब वापस लाने की योजना है।
छत्तीसगढ़ से अन्य राज्यों में प्रवासित परिवारों का विवरण
| राज्य एवं मूल जिला | प्रभावित ग्रामों की संख्या | परिवारों की संख्या | कुल व्यक्ति |
|---|---|---|---|
| तेलंगाना प्रदेश में प्रवासित | |||
| जिला दंतेवाड़ा | 60 | 618 | 2,654 |
| जिला सुकमा | 293 | 2,733 | 12,026 |
| जिला बीजापुर | 114 | 994 | 5,029 |
| तेलंगाना कुल योग | 467 | 4,345 | 19,709 |
| आंध्र प्रदेश में प्रवासित | |||
| जिला दंतेवाड़ा | 25 | 125 | 568 |
| जिला सुकमा | 155 | 2,462 | 10,787 |
| जिला बीजापुर | 04 | 07 | 34 |
| आंध्र प्रदेश कुल योग | 184 | 2,594 | 11,389 |
| कुल महायोग (दोनों राज्य) | 651 | 6,939 | 31,098 |
मिशन ‘पुनर्वास’: सुरक्षित और समृद्ध बस्तर की ओर
बैठक में एसीएस,पिंगुआ ने स्पष्ट किया कि पुनर्वास केवल लोगों को वापस लाना नहीं है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन देना है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- जमीनी स्तर पर सर्वे: कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है कि ये लोग मूलतः किन गांवों के थे और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
- नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, राजस्व और रोजगार जैसे विभागों को तत्काल नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वापसी के साथ ही ग्रामीणों को पट्टा, राशन कार्ड, और खेती के साधन मिल सकें।
- सीमावर्ती राज्यों से समन्वय: बस्तर कमिश्नर,डोमन सिंह और आईजी सुंदरराज पी. को पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों से संपर्क कर सूची का मिलान करने को कहा गया है।
लाल गलियारे से विकास के पथ तक
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल प्रमुख अधिकारियों, जिनमें वन विभाग की एसीएस , ऋर्चा शर्मा और प्रमुख सचिव,सोनमणि बोरा शामिल थे, ने इस बात पर जोर दिया कि विस्थापितों को वापस बसाने के लिए अधोसंरचना (Infrastructure) और सुरक्षा का माहौल तैयार है।
| विभाग | पुनर्वास में मुख्य भूमिका |
|---|---|
| 🚩 राजस्व एवं गृह | विस्थापितों की पैतृक भूमि की पहचान, नई जमीन का आवंटन और नक्सल मुक्त बस्तर में उनकी पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना। |
| 🎓 शिक्षा एवं कौशल विकास | वापस लौटने वाले बच्चों का स्कूलों में तत्काल दाखिला और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आधुनिक रोजगार प्रशिक्षण (Skill India)। |
| 🌾 कृषि एवं वन | खेती के लिए बीज, उपकरण और खाद की सहायता। साथ ही लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण के जरिए आजीविका के साधन उपलब्ध कराना। |
| 🏠 पंचायत एवं ग्रामीण विकास | प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत पक्के मकानों का निर्माण और मनरेगा (MGNREGA) के जरिए गांव में ही रोजगार की गारंटी। |
| 💉 स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी | गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण और ‘जल जीवन मिशन’ के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति। |

