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VB-GRAM-G छत्तीसगढ़ में पंचायत से राज्य स्तर तक बड़े आंदोलन की तैयारी: 10 जनवरी से होगा शुरू, पायलट की मौजूदगी में बनी रणनीति 

VB-GRAM-G छत्तीसगढ़ में पंचायत से राज्य स्तर तक बड़े आंदोलन की तैयारी: 10 जनवरी से होगा शुरू, पायलट की मौजूदगी में बनी रणनीति

VB-GRAM-G रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बड़े आंदोलन की तैयारी में है। प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट की मौजूदगी में गुरुवार को इस आंदोलन की रणनीति तय की गई। कांग्रेस प्रदेश में 10 जनवरी से मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू करने जा रही है। यह संग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चलेगा।

मनरेगा अब कानून नहीं योजना

प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने बैठक को संबोधित करते हुए  बताया कि पूरा विपक्ष मनरेगा के संशोधन के विरोध में है। इस मामले में भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा मनरेगा को खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि गांव में जो भूमिहीन लोग है वे मनरेगा में संशोधन से प्रभावित होंगे। पहले यह कानून था अब यह योजना बना दिया।

अब नहीं रहेगा संवैधानिक अधिकार

सचिन पायलट ने कहा कि मनरेगा पहले संवैधानिक अधिकार था। यह दुनिया में यह अकेला कानून था जो रोजगार को संवैधानिक अधिकार देता है। पहले 15 दिन रोजगार नहीं देने पर 16वें दिन भत्ते का प्रावधान था। इसे खत्म कर दिया गया है।

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मनरेगा के बजट में 65 प्रतिशत की कटौती

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने पहले मनरेगा को कांग्रेस की विफलता का स्मारक बताया था, फिर इसके बजट में कटौती किया। 65 प्रतिशत कटौती कर दिया, केंद्र सरकार ने 100 दिन के बदले मनरेगा में राष्ट्रीय औसत काम देने का 37 कार्य दिवस है। छत्तीसगढ़ में यह औसत मात्र 28 दिन था, वर्तमान में छत्तीसगढ़ बजट भी कम दिया, काम भी बंद किया, जिसके छत्तीसगढ़ से लगभग 7.5 लाख लोग पलायन कर असम, महाराष्ट्र, यूपी, कश्मीर जैसे राज्य गये है। हमारी मांग है 400 रू. प्रतिदिन मनरेगा की मजदूरी किया जाए तथा मनरेगा का संशोधन वापस लो।

लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना है

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि मनरेगा बचाओ आंदोलन आम आदमी तथा मजदूरों के हित की लड़ाई है। हमें इसको गंभीरता से लेना है तथा केंद्र को बाध्य करना है कि वह मनरेगा बचाओ कानून वापस ले। मनरेगा की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना है।

जनता के बीच लेकर जाएंगे

पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा के प्रावधानों तथा वर्तमान संशोधनों को हमें जनता के बीच लेकर इस संशोधन से होने वाले नुकसान को बताना होगा।

मनरेगा बचाओ संग्राम

10 जनवरी जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस: सभी DCC कार्यालयों में जिला स्तर पर अभियान के औपचारिक शुभारंभ के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जाएगा और प्रस्तावित कानून के ग्रामीण रोजगार और आजीविकाओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को मीडिया को बताया जाएगा।

11 जनवरी 2026-एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध : जिला मुख्यालयों या प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, जैसे महात्मा गांधी या डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमाओं के पास, पार्टी नेताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों की भागीदारी के साथ एक दिवसीय उपवास किया जाएगा।

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12 जनवरी से 29 जनवरी 2026 पंचायत स्तर पर जनसंपर्क : सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर की चौपालें और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस चरण के दौरान माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रावधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा श्रमिकों तक पहुंचाए जाएंगे। साथ ही विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण भी किया जाएगा।

30 जनवरी 2026 – वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना : वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर जोर दिया जाएगा।

31 जनवरी से 6 फरवरी 2026 जिला स्तरीय मनरेगा बचाओ धरना : जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों पर धरने आयोजित किए जाएंगे, जिनके बाद जी रामजी विधेयक को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

7 फरवरी से 15 फरवरी 2026 राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव : PCC के नेतृत्व में राज्य स्तर पर विधानसभाओं का घेराव किया जाएगा, जिसमें अधिकतम मोबिलाइजेशन के माध्यम से केंद्र सरकार की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की नीति और राज्यों पर डाले जा रहे बोझ को उजागर किया जाएगा।

16 फरवरी से 25 फरवरी 2026 क्षेत्रीय AICC रैलियां निकाली जाएगी।

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