Weather रायपुर। छत्तीसगढ़ के मौसम का मिजाज बेचैनी बढ़ने वाला हो गया है। तेज बारिश का दौर रुक गया है, लेकिन हवा में नमी बढ़ गई है। इससे उमस बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रविवार को राज्य के अधिकांश स्थानों पर मौसम शुष्क रहा। कहीं कहीं हल्की बारिश हुई। खास करके बस्तर संभाग और राजनांदगांव में थोड़ी तेज बारिश हुई है। वहां 60 मिलीमीटर यानी 6 सेमी वर्षा दर्ज की गई है।
राजनांदगांव -6, गंडई, भानुप्रतापपुर -5, बारसूर, कोंटा, बेलगहना, ओरछा, कवर्धा, छुईखदान, अकलतरा -4. लोरमी, जगदलपुर, अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़, साल्हेवारा-3, नानगुर, बलौदा बाजार, अर्जुन्दा, बोड़ला, डोंगरगांव, देवभोग, माकड़ी, दुर्गकोंदल, सहसपुरलोहारा, लवन, गुंडरदेही, पामगढ़, लोहंडीगुड़ा, पंढरिया -2 तथा कुछ और स्थानों पर इससे कम वर्षा हुई है।
छत्तीसगढ़ में सोमवार को आमतौर पर मौसम शुष्क रहने की संभावना है। कुछ एक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग ने राज्य में गरज के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी दी है।
राज्य की हवा में नमी बढ़ने की संभावना है। नमी की मात्रा 77 से 92 प्रतिशत तक जा सकती है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार नमी बढ़ने से दोपहर के बाद बारिश होने की संभावना बनती है, हालांकि इससे उमस बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है।
दक्षिण-पश्चिम दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा 31°N/74°E, भटिंडा, फातिमाबाद, पिलानी, अजमेर, दौसा, भुज और 23°N/68°E से होकर गुजर रही है।
म्यांमार-दक्षिण बांग्लादेश तटों से सटे उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण, जो औसत समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर तक फैला हुआ है, बना हुआ है।
इसके प्रभाव में, अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाब का क्षेत्र बनने की संभावना है।
25 सितंबर के आसपास पूर्वी मध्य और उससे सटे उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक और नया निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए, इसके 26 सितंबर के आसपास दक्षिण ओडिशा-उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों से दूर उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक अवदाब में बदलने की प्रबल संभावना है।
इसके 27 सितंबर के आसपास दक्षिणी ओडिशा-उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों को पार करने की प्रबल संभावना है।
उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और समीपवर्ती म्यांमार-दक्षिण बांग्लादेश तटों से होते हुए उत्तरी तमिलनाडु और समीपवर्ती दक्षिण आंध्र प्रदेश तटों तक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण से लेकर मध्य बंगाल की खाड़ी के पार औसत समुद्र तल से 3.1 और 5.8 किमी ऊपर तक एक गर्त बना हुआ है।