Weather रायपुर। छत्तीसगढ़ में ठंड फिर बढ़ गई है। ठंड का सबसे ज्यादा असर सरगुजा संभाग में देखा जा रहा है। वहां के अधिकांश स्थानों का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है। सरगुजा का 6 तो जशपुर का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री पहुंच गया है।
इस बीच राज्य के दक्षिणी हिस्से में बारिश की संभावना बन रही है। दरअसल, बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है। इसी वजह से हवा के साथ नमी आ सकती है। इससे बस्तर संभाग में कहीं- कहीं हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
जशपुरनगर जिले में गुरुवार की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। रातभर चली बर्फीली हवाओं और साफ आसमान के कारण तापमान इतनी तेजी से गिरा कि कई वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया। नवंबर के महीने में पहली बार पारा 3 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया। जिले में
सुबह खेतों की ओर निकले किसान हैरान रह गए। धान की बालियों, पत्तों और मेड़ों पर जमी ओस रातभर में बर्फ में बदल गई थी। खेतों पर मानो एक सफेद चादर बिछी हुई थी।
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले एक दशक में नवंबर में पाला पड़ने का यह पहला मौका है। गम्हरिया, मनोरा, सोनक्यारी, सन्ना और पंडरापाठ क्षेत्रों में पाले का सबसे ज्यादा असर दिखा। घास और सब्जियां तक जमकर सफेद पड़ गईं।
अधपकी धान की फसल पर पाले की चोट साफ नजर आने लगी है। बर्फीली परत दानों को सिकोड़ रही है, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। मटर, टमाटर, आलू और पत्तेदार सब्जियों में भी ठंड की मार तेज होती जा रही है।
किसानों का कहना है कि अगर एक-दो दिन और पाला पड़ा तो 30-40 प्रतिशत तक नुकसान संभावित है। सुबह फसल हाथ में लेते ही बर्फ जैसी सख्ती महसूस हो रही थी। ठंड का असर कम करने के लिए किसानों ने रातभर खेतों में अलाव जलाए और धुआं फैलाया। सुबह-सुबह सिंचाई करके मिट्टी का तापमान बढ़ाने की कोशिश भी जारी है।