
कोरबा। छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था एक बार फिर बड़े संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। प्रदेशभर में कार्यरत संविदा विद्युत कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने नई ‘लाइन परिचारक (संविदा) मानव संसाधन नीति-2025’ को कर्मचारी विरोधी बताते हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है।
संविदा कर्मचारी संघ का आरोप है कि नई नीति के जरिए कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता लगभग बंद कर दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी नौकरी देने के बजाय आउटसोर्सिंग और संविदा व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अब इस मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। वहीं दूसरी ओर, भीषण गर्मी के बीच संभावित हड़ताल को लेकर आम लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है।
10 साल सेवा के बाद भी नहीं मिलेगा नियमितीकरण?
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि नई नीति में संविदा कर्मचारियों को नियमित करने या रिक्त पदों पर समायोजित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया है।
कर्मचारियों के अनुसार, हजारों रिक्त पद होने के बावजूद प्रबंधन नियमित भर्ती करने के बजाय संविदा व्यवस्था पर निर्भर रहना चाहता है। इससे कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो गया है।
Meanwhile (इस बीच), कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी केवल श्रम का उपयोग कर रही है लेकिन उन्हें स्थायित्व और सुरक्षा नहीं देना चाहती।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल, “लाइन परमिट” को बताया जानलेवा
संविदा कर्मचारी संघ ने सबसे गंभीर आरोप सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि नई नीति के तहत उन पर जबरन लाइन परमिट लेकर जोखिम भरे कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है।
संघ का दावा है कि पर्याप्त अनुभव और सुरक्षा संसाधनों के बिना हाई वोल्टेज लाइन पर काम करना किसी भी कर्मचारी की जान के लिए खतरा बन सकता है।
कर्मचारियों की प्रमुख आपत्तियां
- नियमितीकरण का प्रावधान खत्म
- आउटसोर्सिंग को बढ़ावा
- जोखिम भरे कार्य का दबाव
- सुरक्षा उपकरणों की कमी
- लाइन परमिट को लेकर जबरन जिम्मेदारी
संघ ने साफ कहा है कि यदि किसी दुर्घटना में कर्मचारी की जान जाती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी पावर कंपनी प्रबंधन की होगी।
5000 से ज्यादा पद खाली, फिर भी भर्ती नहीं
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि विद्युत वितरण और पारेषण कंपनियों में पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक:- वितरण कंपनी में 5000 से अधिक पद रिक्त हैं
- पारेषण कंपनी में भी बड़ी संख्या में पद खाली
- करीब 2500 संविदा कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत
- मैदानी स्तर पर सुधार कार्य प्रभावित
However (हालांकि), कर्मचारियों का आरोप है कि इन रिक्त पदों पर भर्ती करने के बजाय आउटसोर्सिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।
गर्मी में हड़ताल से बढ़ सकती है जनता की परेशानी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो इसका सीधा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है।
भीषण गर्मी के दौरान बिजली फाल्ट, मेंटेनेंस और लाइन सुधार जैसे अधिकांश मैदानी कार्य संविदा कर्मचारी ही संभालते हैं। ऐसे में आंदोलन लंबा चला तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली कटौती बढ़ सकती है।
संभावित असर
- बिजली फाल्ट सुधार में देरी
- ग्रामीण क्षेत्रों में लंबी कटौती
- मेंटेनेंस कार्य प्रभावित
- शिकायत निवारण की रफ्तार धीमी
- गर्मी में उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ने की आशंका
आंदोलन की पूरी रूपरेखा जारी
संविदा कर्मचारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है। संघ का कहना है कि यदि सरकार और प्रबंधन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो प्रदेशव्यापी कामबंद आंदोलन होगा।
आंदोलन का शेड्यूल
22 जून 2026 से: पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन।
“तानाशाही रवैये से मजबूर हुए कर्मचारी”
संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने कहा कि कर्मचारियों ने कई बार द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से अपनी समस्याएं रखने की कोशिश की, लेकिन प्रबंधन ने सकारात्मक पहल नहीं की।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन का रवैया लगातार तानाशाहीपूर्ण रहा है, जिसके कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
Furthermore (इसके अलावा), संघ ने शासन-प्रशासन को भी इस संबंध में आधिकारिक सूचना भेज दी है।
सरकार पर भी उठे सवाल
संविदा संघ के अध्यक्ष हरिचरण साहू ने कहा कि सरकार को पूरी स्थिति की जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन को उचित दिशा-निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वर्ष 2021-22 की तरह बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
संघ का कहना है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की मांगों पर समाधान निकालना चाहिए ताकि औद्योगिक शांति बनी रहे और आम जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
क्या है कर्मचारियों की मुख्य मांग?
संविदा कर्मचारियों की सबसे बड़ी और एकसूत्रीय मांग नियमितीकरण है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा देने वाले कर्मचारियों को स्थायी किया जाए और रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए।
कर्मचारियों की मांगें
- संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण
- रिक्त पदों पर समायोजन
- सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण
- जोखिम भरे कार्यों में स्पष्ट सुरक्षा नीति
- आउटसोर्सिंग नीति पर रोक
बिजली व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की आशंका
प्रदेश में पहले से कर्मचारियों की कमी और बढ़ते बिजली लोड के बीच यह आंदोलन सरकार और पावर कंपनी प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं आम जनता की नजर अब सरकार और प्रबंधन की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।





