
रायपुर/नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह इलाका जिसे दशकों तक ‘अबूझ’ यानी रहस्यमयी (Mysterious) माना जाता था, वहां आज विकास का Digital Sunrise हुआ है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड (Tahkadond) में पहली बार मोबाइल नेटवर्क के सिग्नल पहुंचे हैं।
यह केवल एक टावर की स्थापना नहीं है, बल्कि सदियों के संचार सन्नाटे (Communication Silence) को चीरकर निकलने वाली विकास की एक नई गूंज है।
पहाड़ों की चढ़ाई से मिली आजादी (Freedom from Heights)
अबूझमाड़ के इस दुर्गम क्षेत्र में अब तक स्थिति यह थी कि ग्रामीणों को एक फोन कॉल करने के लिए जान जोखिम में डालकर ऊंची पहाड़ियों पर चढ़ना पड़ता था। No Signal Zone होने के कारण दुनिया से इनका संपर्क पूरी तरह कटा हुआ था। ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा के करीब 400 ग्रामीणों के लिए मोबाइल पर बात करना किसी सपने जैसा था।
टावर लगने के बाद अब Connectivity घर की दहलीज तक पहुंच गई है। अब यहां के युवाओं को सिग्नल खोजने के लिए मीलों पैदल नहीं चलना पड़ता।
आपातकालीन सेवाओं के लिए बनी जीवनरेखा (Lifeline for Emergency)
इस डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। पहले नेटवर्क न होने के कारण 108 Ambulance को सूचना देना असंभव था, जिससे गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था।
मुख्य लाभ जो ग्रामीणों को मिलेंगे:
- त्वरित स्वास्थ्य सेवा (Quick Healthcare): अब ग्रामीण आपात स्थिति में तुरंत एम्बुलेंस बुला सकेंगे।
- मातृ-शिशु सुरक्षा: समय पर सूचना मिलने से संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा मिलेगा।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: अब ग्रामीण सीधे अपने मोबाइल पर सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
अबूझमाड़ की बदलती सामाजिक-आर्थिक तस्वीर
अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में मोबाइल टावर की स्थापना शासन की Last Mile Delivery यानी अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह केवल बात करने का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार (Market Access) खोजने और युवाओं के लिए जानकारी (Information) के नए द्वार खोलने का जरिया है।
ग्रामीणों ने इस पहल पर भारी उत्साह (Excitement) व्यक्त किया है। उनका कहना है कि मोबाइल नेटवर्क आने से उन्हें महसूस हो रहा है कि वे भी अब देश की मुख्यधारा (Mainstream) का हिस्सा बन गए हैं।
निष्कर्ष: विकास का नया अध्याय
छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन का यह प्रयास सिद्ध करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो भौगोलिक बाधाएं (Geographical Barriers) विकास के रास्ते में नहीं आ सकतीं। ताहकाडोंड में गूंजी मोबाइल की घंटी दरअसल अबूझमाड़ के स्वर्णिम भविष्य की दस्तक है।
यह भी पढ़ें- ‘दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ में छत्तीसगढ़ का नंबर 1 जिला बना, चने की रिकॉर्ड खरीदी
संपादकीय टिप्पणी (Editor’s Note): Chaturpost.com हमेशा जमीनी स्तर की उन खबरों को आप तक पहुंचाता है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाती हैं। बस्तर और छत्तीसगढ़ की ऐसी ही खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।







