
Chaturpost News Desk | नवा रायपुर
Chhattisgarh Development Projects: छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों (Infrastructure Development) को लेकर प्रशासनिक हलकों से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग (High-Level Review Meeting) ली। इस बैठक में उन्होंने ई-प्रगति पोर्टल (E-Pragati Portal) में दर्ज राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक और बिंदुवार समीक्षा की।
समीक्षा के दौरान कार्यों की धीमी गति को लेकर मुख्य सचिव का कड़ा रुख देखने को मिला। उन्होंने अधिकारियों को दोटूक शब्दों में कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं के कार्यों में तत्काल तेजी लाई जाए। इसके साथ ही, काम के रास्ते में आ रही किसी भी प्रकार की बाधाओं को तुरंत दूर कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट (Progress Report) प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के विकास कार्यों में बेवजह की देरी अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों (Construction Agencies) पर नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
E-Pragati Portal की ये 5 प्रमुख परियोजनाएं हैं मुख्य रडार पर
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक (Review Meeting) में विशेष रूप से ‘ई-प्रगति पोर्टल’ पर रजिस्टर्ड राज्य की 5 अति-महत्वपूर्ण और संवेदनशील परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर बेहद गहराई से चर्चा की गई। प्रशासन का पूरा ध्यान इन प्रोजेक्ट्स को समय सीमा (Deadline) के भीतर पूरा करने पर है।
इन 5 प्रमुख परियोजनाओं में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:
- वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर): कामकाजी महिलाओं के लिए बन रहा यह हॉस्टल सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से बेहद अहम है।
- वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर): बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में निर्माणाधीन महिला छात्रावास परियोजना।
- 4G स्टेशन DVN मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर): ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में निर्बाध कनेक्टिविटी (Seamless Connectivity) सुनिश्चित करने के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद जरूरी है।
- मोबाइल टॉवर हेतु विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर): मोबाइल टॉवरों को बिजली आपूर्ति देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम।
- सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद जिला): किसानों और सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण नहर परियोजना (Canal Project)।
साप्ताहिक मॉनिटरिंग के लिए आया नया नियम: फोटो जियोटैग करना होगा अनिवार्य
मुख्य सचिव ने बैठक में केवल निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए एक नया और कड़ा डिजिटल सिस्टम भी लागू करने को कहा है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों (Line Departments) को कड़ाई से निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर फोटो जियोटैग (Photo Geo-tag) के साथ अनिवार्य रूप से अपलोड करें।
इसके परिणामस्वरूप, अब कोई भी अधिकारी या ठेकेदार कागजों पर झूठा दावा नहीं कर पाएगा। फोटो जियोटैगिंग के जरिए कंट्रोल रूम में बैठे वरिष्ठ अधिकारी कार्यों की वास्तविक जमीनी स्थिति की पारदर्शी मॉनिटरिंग (Transparent Monitoring) कर सकेंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े 21 जिलों के कलेक्टर्स: कड़े एक्शन की तैयारी
इस महा-समीक्षा बैठक का दायरा कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (IT Department), जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग (Industry and Commerce Department) के तमाम वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे।
इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing – VC) के माध्यम से राज्य के 21 जिलों के कलेक्टर सीधे इस बैठक से जुड़े रहे। मुख्य सचिव ने स्क्रीन पर एक-एक कलेक्टर से उनके जिले की रिपोर्ट मांगी। बैठक में शामिल प्रमुख जिले इस प्रकार हैं:
- बस्तर संभाग के संवेदनशील क्षेत्र: बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा एवं कोण्डागांव।
- ऊर्जा और औद्योगिक बेल्ट: कोरबा और रायगढ़।
- मैदानी और नवगठित जिले: बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, गरियाबंद, कबीरधाम, मुंगेली और बलौदाबाजार।
- सरगुजा संभाग के पहाड़ी क्षेत्र: बलरामपुर, जशपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सरगुजा और सूरजपुर।
- राजनांदगांव क्षेत्र के नए जिले: मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई।
क्यों गेम-चेंजर साबित होगी यह सख्त मॉनिटरिंग?
प्रशासनिक विशेषज्ञों (Administrative Experts) के अनुसार, छत्तीसगढ़ जैसे विकासशील राज्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) का समय पर पूरा होना अर्थव्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक है। अक्सर देखा जाता है कि समन्वय (Coordination) की कमी और फाइलों के अटकने से परियोजनाएं सालों-साल लेट हो जाती हैं, जिससे बजट भी बढ़ जाता है।
Chhattisgarh Development Projects की इस तरह सीधे मुख्य सचिव स्तर पर साप्ताहिक और दैनिक मॉनिटरिंग होने से न केवल लालफीताशाही (Red Tapism) खत्म होगी, बल्कि निचले स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही (Accountability) भी तय होगी। बिलासपुर के हॉस्टल्स और गरियाबंद की नहर परियोजना जैसी जनहित की योजनाएं जल्द पूरी होने से सीधे तौर पर आम जनता, महिलाओं और किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा। अब देखना होगा कि मुख्य सचिव की इस क्लास के बाद मैदानी स्तर पर काम की रफ्तार में कितना बदलाव आता है।







