Power Sector

India Energy Investment: भारत के ऊर्जा क्षेत्र में रिकॉर्ड $170 बिलियन का महा-निवेश, चीन को पछाड़ दुनिया हैरान

न्‍यूज डेस्‍क। अंतरराष्‍ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency – IEA) की ताजा ‘वर्ल्ड एनर्जी इन्वेस्टमेंट 2026’ रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) में इस साल एक नया इतिहास रचने जा रहा है। साल 2026 में भारत का कुल ऊर्जा निवेश (India Energy Investment) रिकॉर्ड 170 बिलियन डॉलर (लगभग 14.2 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है।

पिछले पांच वर्षों में, भारत ने ऊर्जा निवेश के मामले में हर साल औसतन 11% की शानदार सालाना वृद्धि (Annual Growth) दर्ज की है। चीन को छोड़ दिया जाए, तो भारत इस समय वैश्विक ऊर्जा मांग (Global Energy Demand) में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि भारत के इस ऐतिहासिक कदम से देश की तस्वीर कैसे बदलने वाली है।

सोलर पावर में बंपर उछाल: 5 साल पहले ही हासिल किया बड़ा लक्ष्य

भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) यानी नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी कल्पना विकसित देशों ने भी नहीं की थी। भारत ने साल 2025 में ही अपनी कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50% हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों (Non-Fossil Sources) से हासिल करने का ‘नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन’ (NDC) लक्ष्य पूरा कर लिया। सबसे खास बात यह है कि यह टारगेट समय से पूरे पांच साल पहले ही हासिल कर लिया गया।

IEA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) आधारित बिजली उत्पादन में लगाए जाने वाले हर एक डॉलर के मुकाबले क्लीन एनर्जी और न्यूक्लियर पावर (Nuclear Power) में पूरे तीन डॉलर का निवेश कर रहा है। यह अनुपात (Investment Ratio) पिछले पांच साल पहले की तुलना में दोगुना हो चुका है।

ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टोरेज की बड़ी चुनौती

भले ही भारत क्लीन एनर्जी की क्षमता (Renewable Capacity) को तेजी से बढ़ा रहा है, लेकिन वास्तविक बिजली उत्पादन (Electricity Generation) में आज भी कोयला (Coal) का दबदबा कायम है। सोलर और विंड एनर्जी (Wind Energy) की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह मौसम पर निर्भर करती है।

इस उतार-चढ़ाव (Intermittency) को संभालने और बिजली की बर्बादी (Renewable Energy Curtailment) को रोकने के लिए भारत को अपने ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर (Grid Infrastructure Upgrade) को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करना होगा। इसके लिए सरकार और प्राइवेट कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं।

न्यूक्लियर पावर में प्राइवेट सेक्टर की एंट्री और बैटरी स्टोरेज में भारी गिरावट

अब देश में प्राइवेट कंपनियों को 49% तक विदेशी इक्विटी भागीदारी (Foreign Equity Participation) के साथ परमाणु रिएक्टर और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) बनाने और संचालित करने की अनुमति मिल गई है। भारत का लक्ष्य साल 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।

इसके अलावा, भारत में बैटरी स्टोरेज टैरिफ (Battery Storage Tariffs) में भारी गिरावट देखी गई है:

  • 2023 का टैरिफ: ₹14,700 प्रति MW प्रति माह
  • 2025 का टैरिफ: ₹3,000 प्रति MW प्रति माह से भी कम
  • असर: टैरिफ गिरने से एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) के टेंडर 2025 में 100 GWh को पार कर गए, जो 2023 की तुलना में 10 गुना से भी ज्यादा हैं।
  • हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स: साल के दौरान स्वीकृत 63 GW की कुल क्षमता में से आधे से अधिक प्रोजेक्ट्स हाइब्रिड (विंड, सोलर और स्टोरेज का मिश्रण) थे।

ग्रिड और ट्रांसमिशन नेटवर्क पर $26 बिलियन का दांव

भारत में बिजली को एक राज्य से दूसरे राज्य तक बिना किसी रुकावट के पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (Transmission and Distribution) नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। साल 2026 में इस क्षेत्र में निवेश 15% की सालाना वृद्धि के साथ 26 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

इसमें ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (Green Energy Corridor) जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स को ब्लेंडेड फाइनेंसिंग मॉडल (Blended Models) के तहत फंड किया जा रहा है, जिसमें 30% इक्विटी और 70% लोन बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों (Multilateral Financial Institutions) से लिया जा रहा है।

कोयला और रिफाइनिंग क्षेत्र में भी तेजी: आत्मनिर्भरता की ओर कदम

एक तरफ जहां क्लीन एनर्जी पर जोर है, वहीं भारत अपनी वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन (Coal Supply) भी बढ़ा रहा है।

  • कोयला निवेश 2026: $13 बिलियन होने की उम्मीद है।
  • उत्पादन लक्ष्य: भारत का लक्ष्य 2030 तक सालाना 1.5 बिलियन टन कोयला उत्पादन करना है, जो वर्तमान में लगभग 1 बिलियन टन है।
  • तेल रिफाइनिंग (Oil Refining Capacity): रिफाइनिंग निवेश में पिछले 5 वर्षों में 23% की सालाना बढ़ोतरी हुई है। देश 2030 तक अपनी रिफाइनing क्षमता को 15% तक बढ़ाने की राह पर है। हालांकि, भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यातक (Exporter) है, लेकिन कच्चे तेल (Crude Oil) के लिए यह अब भी आयात पर निर्भर है।

कच्चे तेल की खोज और उत्पादन (Exploration and Production) में 2020 से आ रही 7% की गिरावट को रोकने के लिए सरकार ने एक नया लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क (New Licensing Framework) भी पेश किया है।

मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर असर

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ा है। मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से होने वाली क्रूड सप्लाई प्रभावित हुई। इसी वजह से मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) को सप्लाई में व्यवधान के कारण ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) घोषित करना पड़ा था।

इस आयात निर्भरता को कम करने के लिए, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने एक महत्वाकांक्षी $20 बिलियन के डीपवाटर ड्रिलिंग प्रोग्राम (Deepwater Drilling Programme) का प्रस्ताव रखा है। भारत का मुख्य लक्ष्य इस क्षेत्र में $100 बिलियन का निवेश आकर्षित करना है।

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और घरेलू मोर्चे पर बदलाव

मांग (Demand Side) की बात करें तो भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV Investment) में निवेश अभी भी अपेक्षाकृत कम यानी 2 बिलियन डॉलर के आसपास है, जो कुल वाहन बिक्री का लगभग 5% है।

लेकिन एक दिलचस्प ट्रेंड यह देखा गया कि घरेलू स्तर पर एलपीजी (LPG) सप्लाई में व्यवधान के कारण लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप्स (Induction Cookstoves) को तेजी से अपनाया। यह दिखाता है कि ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं अब भारतीय परिवारों को बिजली से चलने वाले उपकरणों (Household Electrification) की तरफ मोड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

भविष्य का आउटलुक (Future Outlook) और चुनौतियां

“साल 2035 तक, इमर्जिंग मार्केट्स और डेवलपिंग इकोनॉमीज (EMDEs) में होने वाले कुल ऊर्जा निवेश की बढ़ोतरी का आधा से ज्यादा हिस्सा (More than half) अकेले भारत से आने की उम्मीद है।” – इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA)

हालांकि, इस राह में सबसे बड़ी चुनौती हाई फाइनेंसिंग कॉस्ट (High Financing Cost) यानी ऊंचे वित्तपोषण की लागत है। रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी पूंजी (Capital-Intensive Projects) की जरूरत होती है, और लोन पर ऊंची ब्याज दरें भारत के इस एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) की रफ्तार के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो सकती हैं।

साफ है कि भारत दुनिया का नया एनर्जी पावरहाउस बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है, जहां ग्रीन एनर्जी और पारंपरिक ऊर्जा का एक अनोखा संतुलन देखने को मिल रहा है।

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यह रिपोर्ट इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के ‘वर्ल्ड एनर्जी इन्वेस्टमेंट 2026′ डेटा पर आधारित है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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