कर्मचारी हलचल

बड़ा सवाल: Old Pension Scheme की बहाली के लिए क्या एक मंच पर आएंगे CG के सभी 9 हजार बिजली कर्मचारी संगठन?

कोरबा/रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कंपनी (Chhattisgarh State Power Companies) में इस समय एक ही सवाल सबसे बड़ा बनकर गूंज रहा है— क्या Old Pension Scheme (पुरानी पेंशन योजना) यानी OPS की बहाली के लिए बिजली कंपनी के सभी कर्मचारी संगठन अपनी आपसी खींचतान भुलाकर एक मंच पर आएंगे? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि प्रदेश के लगभग 9,000 कर्मचारी-अधिकारी पिछले कई वर्षों से पुरानी पेंशन लागू नहीं होने के कारण अपने भविष्य (Future Security) को लेकर गहरे असमंजस में हैं। 2004 के बाद नियुक्त (Appointed after 2004) इन कर्मियों के बुढ़ापे और सामाजिक सुरक्षा (Social Security) की यह लड़ाई अब श्रेय लेने की होड़ (Credit War) में उलझती नजर आ रही है।

छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-01 (Chhattisgarh Vidyut Karmachari Sangh Federation-01) के महासचिव श्री आरसी चेट्टी (General Secretary RC Chetty) ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवा (Emergency Service) और जोखिम वाले विद्युत उद्योग (Risk-prone Power Industry) में काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा का कोई उचित मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि उनकी तुलना शिक्षाकर्मियों से भी बदतर स्तर पर की जाने लगी है।

कंपनियों में अलग-अलग अंशदान की राशि (NPS Fund Distribution)

महासचिव श्री चेट्टी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2004 के पश्चात विद्युत कंपनियों में नियुक्त कर्मचारी-अधिकारियों की संख्या और उनकी National Pension System (NPS) अंशदान राशि अलग-अलग कंपनियों में भिन्न है। वर्तमान में तीनों कंपनियों के एनपीएस धारक कर्मचारियों की कुल संख्या लगभग 9,000 है और इनका कुल 1900 करोड़ रुपये बाजार में जमा है:

  • विद्युत वितरण कंपनी (Discom/Distribution Company): इसमें लगभग 5,500 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनका कुल अंशदान 1000 करोड़ रुपये है।
  • विद्युत उत्पादन कंपनी (Genco/Generation Company): यहाँ लगभग 2,500 कर्मचारी हैं, जिनका अंशदान 600 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है।
  • विद्युत पारेषण कंपनी (Transco/Transmission Company): यहाँ लगभग 1,000 कर्मचारी हैं, जिनका कुल अंशदान 300 करोड़ रुपये जमा है।

राजनीतिक फुटबॉल बना पुरानी पेंशन का मुद्दा (Political Conflict)

विद्युत क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पूर्व सरकार ने वर्ष 2022 में ही Old Pension Scheme लागू करने संबंधी अधिसूचना और आदेश (Notification and Executive Orders) जारी कर दिए थे। इस संबंध में अनेक दिशा-निर्देश जारी कर शासकीय कर्मियों के पेंशन कोष के लिए बाकायदा ‘पेंशन संचालनालय’ (Directorate of Pension) का गठन भी किया गया था।

कंपनी एक्ट (Company Act) के तहत गठित छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी का साल 2001 से ही पंजीकृत पेंशन व ग्रेच्युटी ट्रस्ट (Registered Pension & Gratuity Trust) है। इसके माध्यम से वर्तमान में 16 हजार से अधिक पेंशनभोगी (Pensioners) पुरानी पेंशन का लाभ नियमित रूप से ले रहे हैं।

शासन की घोषणा के अनुरूप कंपनी प्रबंधन ने अपनी बोर्ड बैठक में पुरानी पेंशन की मांग पर सैद्धांतिक सहमति (Theoretical Approval) मांगी थी। कंपनी प्रबंध निदेशक-ट्रांसमिशन कंपनी को ऊर्जा विभाग (Energy Department) की ओर से पत्र के जरिए सहमति मिलने के बाद यह मामला पिछले 3 वर्षों से केवल एक फाइलों का मुद्दा बनकर रह गया है।

श्रेय लेने की होड़ में उलझा कर्मचारियों का भविष्य

विद्युत कंपनी के संचालक मंडल (Board of Directors) को ही इस विषय पर अंतिम निर्णय (Final Decision) लेना है, लेकिन श्रेय लेने की राजनीति के कारण कुछ लोगों ने इसे शासन के पाले में डाल दिया है। इसके चलते यह एक विशुद्ध राजनीतिक मुद्दा (Political Issue) बनकर रह गया है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर उन 9,000 परिवारों को भुगतना पड़ रहा है जो सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-01 ने स्पष्ट किया है कि यदि सभी क्षेत्रीय विद्युत संयंत्रों (Regional Power Plants) और मुख्यालयों में सभी संवर्ग के 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारी-अधिकारी 50-50 की संख्या में शामिल होकर एक मजबूत संघर्ष मंच का गठन करें, तभी प्रबंधन पर दबाव बनाया जा सकता है।

बिजली कर्मियों की प्रमुख मांगें और रणनीति (Key Points & Strategy)

विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-01 के महासचिव श्री आरसी चेट्टी के वक्तव्य और वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर कर्मचारियों की मुख्य मांगें (Core Demands) और आगामी रणनीति (Action Plan) इस प्रकार हैं:

  • 🎯 एक सूत्रीय मांग पर एकजुटता (Single Point Agenda): सभी अलग-अलग संगठनों और गुटों को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और श्रेय लेने की होड़ (Credit War) को पूरी तरह छोड़ना होगा। 2004 के बाद नियुक्त सभी 9000 कर्मचारियों का एकमात्र लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ Old Pension Scheme (पुरानी पेंशन योजना) को बहाल कराना होना चाहिए।
  • 🤝 11 सदस्यीय हाई पावर कमेटी का गठन (High-Power Committee): प्रबंधन (Management) और शासन स्तर पर सीधे तौर पर अपनी बात मजबूती से रखने और प्रभावी संवाद (Effective Negotiation) स्थापित करने के लिए एक ’11 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति’ का गठन किया जाएगा। यह कमेटी सभी शामिल सदस्यों में से ही चुनी जाएगी, जो सीधे बिजली कंपनी के संचालक मंडल से वार्ता करेगी।
  • 📊 50-50 फॉर्मूला और संयुक्त मोर्चा (Joint Protest Strategy): आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए सभी क्षेत्रीय विद्युत संयंत्रों (Power Plants) और विद्युत मुख्यालयों (Headquarters) में 2004 के पश्चात नियुक्त कर्मचारी-अधिकारियों की 50-50 प्रतिशत की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके जरिए कर्मचारी-अधिकारी पुरानी पेंशन मंच’ का गठन कर एक व्यापक और एकजुट आंदोलन छेड़ा जाएगा।
  • 🛑 ₹1900 करोड़ के एनपीएस फंड की सुरक्षा (NPS Fund Security): वर्तमान में विद्युत वितरण, उत्पादन और पारेषण कंपनियों के कर्मचारियों का कुल 1900 करोड़ रुपया नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत बाजार के जोखिमों में फंसा हुआ है। रणनीति के तहत इस फंड को पूरी तरह सुरक्षित करने और इसे शासकीय भविष्य निधि (GPF) के खाते में ट्रांसफर करवाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक दबाव बनाया जाएगा।
  • 📢 ट्रस्ट के माध्यम से तत्काल क्रियान्वयन (Implementation via Trust): चूंकि कंपनी एक्ट के तहत विद्युत कंपनी का साल 2001 से ही अपना पंजीकृत पेंशन व ग्रेच्युटी ट्रस्ट (Registered Pension & Gratuity Trust) काम कर रहा है, जिसके जरिए पहले से ही 16 हजार से अधिक पेंशनर्स लाभ पा रहे हैं। इसलिए कर्मचारियों की मांग है कि ऊर्जा विभाग की सैद्धांतिक सहमति के आधार पर संचालक मंडल (Board of Directors) को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के तुरंत आदेश जारी करने चाहिए।

Chatur विचार

छत्तीसगढ़ को लगातार देश में विद्युत क्षेत्र में अग्रणी (Leader in Power Sector) बनाए रखने और राज्य के विकास को गति देने वाले इन विद्युत कर्मियों की मांग पूरी तरह न्यायसंगत प्रतीत होती है। जब राज्य के अन्य शासकीय विभागों और नगरीय निकायों के लगभग 2 लाख 92 हजार से अधिक कर्मचारियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है, तो फिर बिजली कंपनियों के साथ यह दोहरा मापदंड क्यों? अब देखना होगा कि छत्तीसगढ़ का ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनी का संचालक मंडल इस दिशा में कब तक ठोस और कल्याणकारी निर्णय लेता है।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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