कर्मचारी हलचल

आंदोलन पर पॉवर कंपनी का अल्‍टीमेटम: हड़ताल पर एक्शन, नो वर्क नो पे लागू, होगी ब्रेक-इन-सर्विस

रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CPTCL) ने आगामी दिनों में होने वाले विरोध प्रदर्शन (Protest) और सामूहिक अवकाश (Mass Casual Leave) को लेकर एक बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) कार्यालय, रायपुर द्वारा 18 जून 2026 को एक आधिकारिक परिपत्र (Official Circular) जारी किया गया है । इस परिपत्र के माध्यम से तीनों बिजली कंपनियों के सभी विभाग प्रमुखों को कड़े दिशा-निर्देश भेजे गए हैं , ताकि राज्य में बिजली जैसी लोकोपयोगी और आवश्यक सेवाओं (Essential Services) की निरंतरता में कोई बाधा न आए ।

क्यों हो रही है बिजली कर्मियों की हड़ताल? (Chhattisgarh Power Strike Reason)

दरअसल, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है । संगठन द्वारा प्रबंधन और सरकार को सौंपे गए नोटिस के अनुसार, आंदोलन को दो चरणों में क्रियान्वित किया जाना तय किया गया है:

  • पहला चरण (One Day Mass Leave): दिनांक 22 जून 2026 को संघ से जुड़े सभी अधिकारी और कर्मचारी एक दिवसीय सामूहिक अवकाश पर रहकर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करने वाले हैं ।
  • दूसरा चरण (Indefinite Strike): यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो इसके बाद आगामी 06 जुलाई 2026 से सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश और उग्र विरोध प्रदर्शन (Indefinite Strike) पर चले जाएंगे ।

बिजली विभाग के कर्मचारियों के इस बड़े फैसले के बाद से ही राज्य की विद्युत व्यवस्था और ग्रिड डिमांड (Grid Demand) के प्रबंधन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, जिसके बाद CPTCL प्रबंधन को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा है ।

हड़ताल में शामिल होने पर क्या होगी कार्रवाई? (Strict Action and No Work No Pay)

CPTCL द्वारा जारी सर्कुलर (Circular) में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि बिना पूर्व स्वीकृति (Prior Approval) के कार्यालयीन समय में सामूहिक अवकाश पर जाना या किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन और हड़ताल (Strike and Protests) में भाग लेना पूरी तरह से अवैध और प्रतिबंधित है ।

सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत “कदाचरण” की श्रेणी में आएगा यह कृत्य

पावर कंपनी (Power Company) ने अपने आदेश में पूर्ववर्ती मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के पुराने नियमों का हवाला दिया है । परिपत्र के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 6 एवं नियम 7 के प्रावधानों के अंतर्गत सरकारी या अर्ध-शासकीय कर्मचारियों द्वारा किसी भी प्रकार का प्रदर्शन, हड़ताल, या “स्वीकृत होने के पूर्व अवकाश पर प्रस्थान” करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है ।

यदि कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन कर इस आंदोलन (Chhattisgarh Power Strike) का हिस्सा बनता है, तो इसे आधिकारिक तौर पर कदाचरण” (Misconduct) की श्रेणी में गिना जाएगा और संबंधित कर्मचारी सीधे तौर पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) के पात्र होंगे ।

औद्योगिक नियोजन नियम के तहत माना जाएगा “दीर्घ दुराचरण”

न केवल सिविल सेवा नियम, बल्कि CPTCL ने श्रम कानूनों और औद्योगिक नियमों (Labor Laws) का हवाला देकर भी कर्मचारियों को चेताया है । छत्तीसगढ़ औद्योगिक नियोजन (स्थाई आदेश) नियम 1963 की धारा-12(1) “के” व “एल” के प्रावधानों के तहत वर्तमान में प्रचलित कानूनों का उल्लंघन करके हड़ताल पर जाना, दूसरों को भड़काना या उकसाना, अथवा अवैध हड़ताल को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी तरह का सहयोग करना दीर्घ दुराचरण” (Major Misconduct) माना जाता है । इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को सेवा से निष्कासित तक किया जा सकता है ।

मुख्यालय भेजी जाएगी हड़ताली कर्मचारियों की सूची (Submission of Employee List)

प्रबंधन ने सभी विभाग प्रमुखों और क्षेत्रीय अधिकारियों को इस संबंध में सख्त मॉनिटरिंग (Strict Monitoring) करने के निर्देश दिए हैं ।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन से माँगा सहयोग

चूंकि विद्युत उद्योग (Power Utility) को एक लोकोपयोगी और अत्यंत आवश्यक सेवा (Public Utility and Essential Service) माना गया है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता । राज्य में औद्योगिक शांति और ग्रिड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी बिजली कंपनियों को स्थानीय जिला प्रशासन (District Administration) और पुलिस प्रशासन (Police Department) से निरंतर समन्वय बनाए रखने को कहा गया है ।

यदि आंदोलनकारी कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेने या शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रयास करते हैं, तो पुलिस प्रशासन के सहयोग से मौके पर ही सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ।

इस परिपत्र की प्रतियां छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग के सचिव, ऊर्जा विभाग के सचिव, श्रमायुक्त, सहायक श्रमायुक्त सहित तीनों बिजली कंपनियों (पॉवर ट्रांसमिशन, जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन) के प्रबंध निदेशकों और स्टाफ ऑफिसर्स को भी आवश्यक कार्रवाई और सूचनार्थ प्रेषित कर दी गई हैं । अब देखना यह होगा कि CPTCL के इस बेहद कड़े रुख के बाद छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ अपने प्रस्तावित 22 जून के सामूहिक अवकाश के फैसले पर अडिग रहता है या बैकफुट पर आता है ।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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