कर्मचारी हलचल

विष्‍णुदेव साय कैबिनेट की 23 जून को प्रस्‍तावित बैठक में आ सकता है धारा 49 खत्म करने और 2% DA DR बढ़ाने का प्रस्‍ताव?

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों और सरकारी कर्मचारियों के लिए आगामी 23 जून 2026 की तारीख बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ (Indian State Pensioners Federation) के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने राज्य की विष्णु देव साय सरकार से एक बेहद संवेदनशील और बड़ी मांग की है।

महासंघ ने मांग की है कि 23 जून को प्रस्तावित मंत्रिपरिषद (Cabinet Meeting) की बैठक में मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 (MP Reorganisation Act, 2000) की विवादित धारा 49 (Section 49) को हमेशा के लिए हटाने (Viloopit) की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया जाए। इसके साथ ही, केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य के कर्मचारियों और एमपी सीजी पेंशनर्स (MP CG Pensioners) को जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) और महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) देने पर भी मुहर लगाई जाए।

क्यों पिछले 25 वर्षों से पेंशनर्स के गले का फांस बनी है ‘धारा 49’?

न्यूज़ एडिटर डेस्क के विश्लेषण के अनुसार, साल 2000 में जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ नया राज्य बना, तब से लेकर आज तक यानी पिछले 25 सालों से यह धारा एमपी सीजी पेंशनर्स (MP CG Pensioners) के लिए सबसे बड़ी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना की वजह बनी हुई है।

इस नियम के तहत छत्तीसगढ़ सरकार जब भी अपने बुजुर्ग पेंशनर्स की महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी करना चाहती है, तो उसे कानूनी रूप से मध्य प्रदेश सरकार की लिखित सहमति (Mutual Consent) लेनी अनिवार्य होती है। इसी तरह जब मध्य प्रदेश सरकार अपने पेंशनर्स का आर्थिक लाभ बढ़ाती है, तो उसे छत्तीसगढ़ से अनुमति लेनी पड़ती है। इस जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया (Administrative Delay) और दोनों राज्यों के वित्त विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण लाखों बुजुर्गों को समय पर उनका हक नहीं मिल पाता।

पेंशनर्स महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव का कहना है कि:

“धारा 49 के कारण दोनों राज्यों की सहमति की यह अनिवार्य शर्त लाखों पेंशनरों के समय पर भुगतान में सबसे बड़ी बाधा (Major Obstacle) है। इसके चलते बुजुर्गों को हर बार भारी आर्थिक नुकसान और अनावश्यक कानूनी चक्करों का सामना करना पड़ता है।”

साढ़े 5 लाख परिवारों का हक: “पेंशन कोई खैरात या अनुकंपा नहीं”

महासंघ के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मिलाकर लगभग साढ़े पांच लाख से अधिक पेंशनर और परिवार पेंशनर (Family Pensioners) इस अजीबोगरीब कानूनी पेच का शिकार हैं। यह बुजुर्ग समाज पिछले ढाई दशकों से क्षेत्रीय असमानता (Regional Inequality) और वित्तीय घाटा झेलने को मजबूर है।

वीरेन्द्र नामदेव ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को याद दिलाते हुए कहा कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त (Retired) हुए इन कर्मचारियों के लिए पेंशन कोई सरकारी अनुकंपा (Compassionate Ground) या दान नहीं है। यह इन कर्मचारियों का जीवनभर की सेवा के बदले अर्जित किया गया मौलिक अधिकार (Earned Right) है। इसलिए लोकतांत्रिक सरकारों को इस संवेदनशील विषय (Sensitive Issue) पर अब बिना किसी देरी के त्वरित कदम उठाने चाहिए।

धारा 49 को विलोपित (खत्म) करने का पूरा रोडमैप

इस धारा को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सरकार को एक तय प्रक्रिया से गुजरना होगा। महासंघ ने इसका पूरा कानूनी ड्राफ्ट और चरणबद्ध तरीका स्पष्ट किया है:

1.वित्त विभागों का साझा मसौदा:चरण 1.

सबसे पहले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों के वित्त विभाग (Finance Departments) इस धारा को हटाने के लिए कानूनी संशोधन का एक आधिकारिक मसौदा (Draft Bill) तैयार करेंगे।

2.कैबिनेट से प्रशासनिक स्वीकृति:चरण 2.

इसके बाद इस संयुक्त प्रस्ताव को आगामी 23 जून की कैबिनेट बैठक में रखकर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रिपरिषद से सैद्धांतिक मंजूरी दिलाई जाएगी।

3.विधानसभा से विशेष प्रस्ताव:चरण 3.

कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं (State Assemblies) के आगामी सत्र में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कराया जाएगा।

4.केंद्र सरकार की अंतिम मुहर:चरण 4.

राज्य विधानसभाओं से पास होने के बाद इस वैधानिक प्रस्ताव को भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। चूंकि यह संसद द्वारा पारित मूल अधिनियम का हिस्सा है, इसलिए केंद्र सरकार (Central Government) की अंतिम मंजूरी के बाद ही यह बाध्यता हमेशा के लिए समाप्त हो सकेगी।

2% डीए और डीआर के भुगतान पर भी टिकी हैं निगाहें

धारा 49 के स्थायी समाधान के अलावा, महासंघ ने तात्कालिक राहत (Immediate Relief) के रूप में एक और बड़ी मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी है। केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 से अपने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA Hike) और पेंशनर्स के लिए 2 प्रतिशत महंगाई राहत (DR Hike) की घोषणा की थी।

छत्तीसगढ़ के राज्य कर्मचारियों और एमपी सीजी पेंशनर्स (MP CG Pensioners) को अभी तक इस 2% बढ़ोतरी का लाभ नहीं मिल सका है। महासंघ ने पुरजोर मांग की है कि राज्य के सीमित संसाधनों और महंगाई के इस दौर को देखते हुए, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 23 जून की मंत्रिपरिषद की बैठक में इस 2% अतिरिक्त डीए-डीआर भुगतान के आदेश पर भी हस्ताक्षर करें।

क्या साय सरकार रचेगी इतिहास? उम्मीदें बरकरार

पेंशनर्स महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एक बेहद संवेदनशील और जन-हितैषी नेता हैं। वे कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के हितों को सर्वोपरि रखते हुए आगामी कैबिनेट बैठक में इन दोनों प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेंगे।

यदि 23 जून को धारा 49 को विलोपित करने का प्रस्ताव पास होता है, तो यह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के इतिहास में साढ़े पांच लाख परिवारों को वित्तीय स्वतंत्रता और मानसिक शांति देने वाला एक ऐतिहासिक कदम (Historic Milestone) साबित होगा।

प्रमुख बिंदु: एक नज़र में (Highlights)

  • 23 जून 2026: छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बहुप्रतीक्षित बैठक में पेंशनर्स के मुद्दों पर आ सकता है बड़ा फैसला।
  • 25 साल का इंतजार: मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 को हटाने की मांग तेज।
  • 5.5 लाख प्रभावित: दोनों राज्यों के साढ़े पांच लाख से ज्यादा पेंशनर्स आपसी सहमति के फेर में झेल रहे हैं नुकसान।
  • 2% वित्तीय लाभ: जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत डीए-डीआर तत्काल लागू करने का मुख्यमंत्री से विशेष आग्रह।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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