
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों (State Power Companies) में काम करने वाले हजारों अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। साल 2004 के बाद नियुक्त हुए बिजली कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) का लाभ दिलाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया गया है। शुक्रवार को राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में प्रदेश के विभिन्न अधिकारी और कर्मचारी संगठनों की एक ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण बैठक (Historical Meeting) आयोजित की गई।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में बिजली कंपनियों के सभी छोटे-बड़े संगठनों ने अपनी आपसी दूरियां भुलाकर एक सुर में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करवाने का संकल्प लिया। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार है जब बिजली विभाग के तमाम संगठन एक छत के नीचे आकर सरकार के खिलाफ इस तरह एकजुट हुए हैं।
‘विद्युत अधिकारी-कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली अधिकार मंच‘ का गठन
बैठक में सबसे बड़ा फैसला लेते हुए सर्वसम्मति से एक नए संयुक्त मोर्चे का ऐलान किया गया, जिसे “विद्युत अधिकारी-कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली अधिकार मंच” (OPS Restoration Forum) नाम दिया गया है।
बैठक में मौजूद सभी 12 संगठनों के पदाधिकारियों ने एक आवाज में कहा कि पुरानी पेंशन उनका अधिकार है और वे इसे लेकर ही रहेंगे। इस दौरान कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह संयुक्त एवं चरणबद्ध संघर्ष (Phase-wise Protest) जारी रहेगा। कर्मचारियों की यह एकजुटता इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग के भीतर एक बड़ा आंदोलन खड़ा होने जा रहा है।
आंदोलन की रूपरेखा: 12 संगठनों की बनेगी कोर कमेटी
इस महा-आंदोलन (Mass Movement) को सही दिशा देने और आगामी रणनीति (Future Strategy) तैयार करने के लिए बैठक में कुछ बेहद कड़े और व्यावहारिक निर्णय लिए गए:
मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन, याद दिलाई जाएगी ‘सैद्धांतिक सहमति‘
कर्मचारी नेताओं ने बैठक में याद दिलाया कि 6 अक्टूबर 2023 को मुख्यमंत्री की तरफ से पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) लागू करने के संबंध में एक सैद्धांतिक सहमति (Theoretical Approval) दी गई थी। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी कंपनी प्रबंधन (Company Management) द्वारा इसके आधिकारिक आदेश या आवश्यक निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए ‘अधिकार मंच’ सबसे पहले मुख्यमंत्री के नाम एक सूत्रीय मांग का ज्ञापन सौंपेगा। अगर इसके बाद भी बिजली कंपनी प्रबंधन ने आदेश जारी नहीं किए, तो प्रांतीय (State Level) और क्षेत्रीय स्तर (Regional Level) पर व्यापक जनजागरण अभियान (Public Awareness Campaign) और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
इन 12 संगठनों के 72 प्रतिनिधियों ने दिखाया दम
रायपुर में आयोजित हुई इस बैठक की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें बिजली विभाग के हर तबके का प्रतिनिधित्व देखने को मिला। बैठक का सफल संचालन शब्बीर मेमन ने किया।
बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरे और संगठन:
- अभियंता संघ: मनोज वर्मा और प्रतीक शुक्ला
- पत्रोपाधी संघ: श्रीकांत बड़गैया
- फेडरेशन-01: आर.सी. चेट्टी एवं सुरेंद्र शुक्ला
- जनता यूनियन: अनिल द्विवेदी एवं अजय बाबर
- बिजली कर्मचारी महासंघ: संजय तिवारी एवं नवरतन बरेठ
- विद्युत कर्मचारी संघ (इंटक-56): एन.पी. मिश्रा एवं राम इकबाल
- आरक्षित वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ: आर.एल. ध्रुव एवं हर्षवर्धन पाटले
- तकनीकी कर्मचारी एकता यूनियन: जितेंद्र मालाकार एवं श्रीकांत सिंह ठाकुर
- तकनीकी कर्मचारी संघ: जीतराम खूंटे एवं नरेश भास्कर
- डॉक्टर्स एसोसिएशन: डॉ. निलेश सिंह
- कर्मचारी ऑफिसर्स एसोसिएशन: गोपाल गोहिल
- कार्यालयीन कर्मचारी संघ बस्तर: धर्मेंद्र देवांगन एवं योगेंद्र कश्यप
इस बैठक में कुल 72 प्रतिनिधियों (Representatives) ने हिस्सा लिया और सभी ने एक सुर में हस्ताक्षर कर इस अधिकार मंच को अपनी स्वीकृति दी।
एडिटर टेक: क्यों गंभीर है यह बिजली कर्मियों का गुस्सा?
एक न्यूज़ एडिटर के नजरिए से देखें तो छत्तीसगढ़ में बिजली कर्मचारियों का यह कदम राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। छत्तीसगढ़ के बिजली कर्मी आवश्यक सेवाओं (Essential Services) के अंतर्गत आते हैं। यदि इनका आंदोलन उग्र होता है, तो राज्य की विद्युत आपूर्ति (Power Supply) पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। साल 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों में अपने भविष्य और सामाजिक सुरक्षा (Social Security) को लेकर भारी असुरक्षा का भाव है। 12 संगठनों का एक साथ आना यह साबित करता है कि अब यह लड़ाई केवल कागजी नहीं रही, बल्कि धरातल पर उतरने के लिए तैयार है।







