
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण और पारेषण कंपनियों (Power Sector) में सेवाएं दे रहे हजारों संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले कई वर्षों से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे प्रदेश के लगभग 2,500 संविदा विद्युत कर्मी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। अपनी एक सूत्रीय मांग “नियमितीकरण/सिविलियन/समायोजन” को लेकर प्रदेशभर के कर्मचारी 1 जुलाई 2026 से नवा रायपुर स्थित तुता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव (Indefinite Protest) शुरू करने जा रहे हैं।
क्यों मजबूर हुए कर्मचारी? (The Core Issue)
विद्युत कंपनियों में कार्यरत ये संविदा कर्मचारी पिछले एक दशक से भी अधिक समय से अल्प वेतन (Low Salary) में जोखिम भरा कार्य कर रहे हैं। चाहे भीषण गर्मी हो, भारी बारिश हो या कड़ाके की ठंड, बिजली विभाग की रीढ़ बनकर ये कर्मचारी 24×7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में अपनी जान की बाजी लगाते हैं।
इसके बावजूद, इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन द्वारा बार-बार आश्वासन (Promises) तो दिए गए, लेकिन धरातल पर नियमितीकरण की नीति का कहीं अता-पता नहीं है।
प्रबंधन की चेतावनी का नहीं हुआ असर
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारी पहले ही 22 जून 2026 से हड़ताल (Strike) पर हैं। प्रबंधन ने इस बीच कई बार सख्ती दिखाई और अस्थायी व्यवस्था (Alternative Arrangement) के लिए निर्देश भी जारी किए।
संघ के अध्यक्ष हरि चरण साहू का स्पष्ट मानना है कि सरकार की इस नीति ने कर्मचारियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति निर्बाध रहे, लेकिन यदि हमारी मांगों को अनसुना किया गया, तो आने वाले दिनों में उत्पन्न होने वाली किसी भी अव्यवस्था के लिए शासन-प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।”
क्या होगा तुता में? (Strategic Action Plan)
1 जुलाई की सुबह 11 बजे से नवा रायपुर का तुता धरना स्थल प्रदेशभर के कर्मचारियों के हुजूम से भर जाएगा। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार की ओर से नियमितीकरण/सिविलियन/समायोजन का लिखित आदेश (Written Order) जारी नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन किसी भी सूरत में वापस नहीं लिया जाएगा।
सरकार से क्या है उम्मीद? (Expertise & Trust)
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से विशेष आग्रह किया है। संघ का यह तर्क है कि विद्युत विभाग में लाइन कर्मचारियों की भारी कमी है। ऐसे में अनुभवी संविदा कर्मियों को नियमित करना न केवल मानवीय दृष्टिकोण से सही है, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता (Efficiency) बढ़ाने के लिए भी आवश्यक है।
- ईमानदार जीवन की अपेक्षा: कर्मचारी चाहते हैं कि वे एक सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
- जिम्मेदारी का अहसास: कर्मचारी आपातकालीन सेवाओं को बाधित नहीं करना चाहते, लेकिन उनकी उपेक्षा उन्हें कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य कर रही है।
“वहीं, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने दिनांक 23 जून 2026 को एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि हड़ताल में शामिल लाइन परिचारकों (संविदा) को तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने की सूचना दी जाए। कंपनी ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनकी संविदा नियुक्ति एक माह के भीतर समाप्त मानी जाएगी। इसके साथ ही, प्रबंधन ने हड़ताल की अवधि के दौरान कार्य सुचारू रखने के लिए उतनी ही संख्या में या उससे 10-20% अधिक अनुभवी लोगों को अस्थायी आधार पर नियुक्त करने की अनुमति भी दे दी है, साथ ही हड़ताली कर्मचारियों के वेतन में कटौती करने का भी निर्देश जारी किया है.”







