कर्मचारी हलचल

बड़ी खबर: Medical allowance बढ़ोतरी पर सरकार का अंतिम फैसला, पेंशनर्स को ₹3000 FMA के लिए करना होगा यह काम!

चतुरपोस्ट न्‍यूज डेस्‍क।  भारत के लाखों पेंशनर्स (Central Government Pensioners) के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। लंबे समय से फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (Fixed Medical Allowance) यानी एफएमए में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे बुजुर्गों की उम्मीदों को सरकार ने एक नया रास्ता दिखाया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पेंशनर्स की इस मांग का अंतिम समाधान अब आगामी 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के जरिए ही निकाला जाएगा।

संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) की मजबूत सिफारिशों और कर्मचारी संगठनों (Staff Side) के भारी दबाव के बावजूद, सरकार ने इस मामले को फिलहाल टाल दिया है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अब भत्ते में संशोधन (Revision) की कोई भी प्रक्रिया देश के अगले पे-कमिशन के व्यापक ढांचे के भीतर ही तय की जाएगी। आइए इस पूरी रिपोर्ट में सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि आखिर इस पूरे मामले पर प्रशासनिक बैठकों (Administrative Meetings) में क्या-क्या हुआ।

क्या है पेंशनर्स की मुख्य मांग? (The Core Demand)

वर्तमान नियमों के अनुसार, जो केंद्रीय पेंशनर्स गैर-सीजीएचएस (Non-CGHS) क्षेत्रों में रह रहे हैं, उन्हें आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) के खर्चों के लिए हर महीने मात्र 1,000 का फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस मिलता है।

बढ़ती महंगाई का असर: पिछले कुछ वर्षों में दवाइयों की कीमतों और इलाज के खर्च (Healthcare Costs) में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से पेंशनर्स और स्टाफ साइड लगातार इस भत्ते को ₹1,000 से बढ़ाकर 3,000 प्रति माह करने की पुरजोर मांग (Vigorous Demand) कर रहे हैं।

इस मांग को संसदीय स्थायी समिति का भी समर्थन मिला था, जिसने माना था कि आज के समय में ₹1,000 की यह राशि स्वास्थ्य संबंधी समकालीन आवश्यकताओं (Contemporary Healthcare Needs) को पूरा करने के लिए काफी नहीं है।

49वीं जेसीएम बैठक में हुआ भारी गतिरोध (The Staff Side’s Stance)

इस देरी को लेकर पेंशनर्स और कर्मचारी संगठनों में काफी नाराजगी है। 11 मई 2026 को कैबिनेट सचिव (Cabinet Secretary) की अध्यक्षता में आयोजित 49वीं नेशनल काउंसिल (JCM) की बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस और तनाव (Palpable Tension) देखने को मिला। कर्मचारी पक्ष ने तर्क दिया कि इस मामले को 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के पास भेजना पूरी तरह से अनुचित है क्योंकि इसके लिए जरूरी जमीनी काम (Groundwork) पहले ही पूरा किया जा चुका है।

स्टाफ साइड ने बैठक में प्रमुख रूप से ये बातें रखीं:

  • पुराने समझौते (Prior Agreements): श्री सी. श्रीकुमार और स्टाफ साइड के सचिव ने रेखांकित किया कि पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoP&PW) के साथ पिछली चर्चाओं के दौरान ₹3,000 की बढ़ोतरी “लगभग तय” (Almost Settled) हो चुकी थी।
  • वित्त मंत्रालय का स्पीड ब्रेकर (Ministry of Finance Roadblock): कर्मचारी पक्ष ने आरोप लगाया कि तमाम सहमतियों के बावजूद, वित्त मंत्रालय द्वारा अंतिम मंजूरी को रोक दिया गया। ऐसे में ऐन वक्त पर इस मामले को 8वें वेतन आयोग की तरफ मोड़ना पेंशनर्स के लिए एक बड़ा झटका (Frustrating Setback) है।

सरकार का रुख: 8वें वेतन आयोग के रास्ते ही मिलेगी राहत (The Government’s Position)

दूसरी तरफ, सरकार पिछले एक साल से इस रणनीति पर कायम है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA Increase) में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी केवल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के माध्यम से ही की जाएगी। उच्च स्तरीय बैठकों (High-Level Meetings) का रिकॉर्ड भी इसी बात की गवाही देता है:

  • 34वीं स्कोवा बैठक (11 मार्च 2025): व्यय विभाग (Department of Expenditure) ने पहली बार आधिकारिक तौर पर संकेत दिया था कि FMA को ₹3,000 करने के मुद्दे को 8वें वेतन आयोग के विचारार्थ विषयों (Terms of Reference – ToR) में शामिल किया जाएगा। इसके बाद स्कोवा (SCOVA) स्तर पर इस एजेंडे को बंद कर दिया गया था।
  • 49वीं एनसी जेसीएम बैठक (11 मई 2026): इस हालिया बैठक में DoP&PW के सचिव ने फिर से इसी बात को दोहराया। उन्होंने समझाया कि चूंकि वर्तमान ₹1,000 की सीमा 7वें वेतन आयोग (7th CPC) की सिफारिशों का परिणाम थी, इसलिए इसमें कोई भी अगला बदलाव स्वाभाविक रूप से 8वें वेतन आयोग के अधिकार क्षेत्र में ही आता है।

अंतिम निर्णय (Final Decision): जेसीएम के अध्यक्ष (कैबिनेट सचिव) ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित एसोसिएशन अब फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस में बढ़ोतरी के इस मामले को सीधे 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के समक्ष उठाएं। इसके बाद मंत्रालयों द्वारा स्पष्ट की गई स्थिति को देखते हुए अन्य संबंधित मांगों को बंद मान लिया गया।

महत्वपूर्ण समयरेखा और निर्णय (Key Timeline & Decisions)

पाठकों की सुविधा के लिए हमने इस पूरे घटनाक्रम को नीचे दी गई तालिका में संकलित किया है:

बैठक / कार्यक्रमतारीख (Date)FMA को लेकर मुख्य परिणाम (Core Outcome)
34वीं स्कोवा (SCOVA) बैठक11 मार्च, 2025व्यय विभाग ने सूचित किया कि FMA बढ़ोतरी को 8वें CPC के Terms of Reference में शामिल किया जाएगा; एजेंडा बंद।
8th CPC Terms of Reference03 नवंबर, 2025वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव के पैरा 2(a) के तहत आयोग को भत्तों और लाभों की समीक्षा करने का अधिकार दिया गया।
49वीं नेशनल काउंसिल (JCM)11 मई, 2026कैबिनेट सचिव ने संगठनों को निर्देश दिया कि वे FMA बढ़ोतरी का मामला सीधे 8वें वेतन आयोग के पास ले जाएं।

वैकल्पिक राहत: स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी बड़ी सौगात!

भले ही फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) के मामले को आगे के लिए टाल दिया गया हो, लेकिन सरकार ने पेंशनर्स को एक अन्य मोर्चे पर बड़ी राहत दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health & Family Welfare) ने सीजीएचएस नेटवर्क (CGHS Network) के विस्तार की घोषणा की है, जिसमें ये कदम शामिल हैं:

  • 29 नए वेलनेस सेंटर: देश भर में पेंशनर्स की सुविधा के लिए 29 नए वेलनेस सेंटर (Wellness Centres) खोले जा रहे हैं।
  • कैशलेस इलाज के समझौते: एम्स (AIIMS) और अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (Institutes of National Importance) के साथ कैशलेस इलाज के लिए नए समझौता ज्ञापनों (MoAs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

आगे का रास्ता: 8वें वेतन आयोग का वास्तविक जनादेश (The Mandate)

अब गेंद पूरी तरह से 8वें वेतन आयोग के पाले में है। 3 नवंबर 2025 को जारी वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, आयोग के पास इस मांग की समीक्षा करने का पूरा कानूनी अधिकार है।

टर्म्स ऑफ रेफरेंस का पैरा 2(a): आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह विभिन्न विभागों की समकालीन कार्यात्मक आवश्यकताओं, युक्तिकरण (Rationalization) और विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वेतन, भत्तों (Allowances) और नकद या वस्तु के रूप में मिलने वाले अन्य लाभों में वांछनीय और व्यावहारिक बदलावों की सिफारिश करे।

Chatur विचार

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस में तुरंत राहत पाने का इंतजार थोड़ा लंबा हो गया है। हालांकि यह प्रशासनिक रूप से स्वीकार किया जा चुका है कि ₹1,000 की मौजूदा राशि की समीक्षा (Review) होनी जरूरी है, लेकिन अंतरिम उपाय (Interim Measure) के तौर पर तुरंत कोई वित्तीय राहत नहीं मिलेगी। अब सभी पेंशनर एसोसिएशनों को ₹3,000 मासिक भत्ते की अपनी मांग और संसदीय समिति की सिफारिशों को सीधे 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने मजबूती से पेश करने के लिए तैयार रहना होगा।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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