
न्यूज डेस्क। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रही ‘Modified Assured Career Progression’ (MACP) और नियमित प्रमोशन (Regular Promotion) के बीच वेतन निर्धारण (Pay Fixation) को लेकर जारी विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गया है।
हाल ही में कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई नेशनल काउंसिल (JCM) की 49वीं बैठक (11 मई 2026) में सरकार ने इस संरचनात्मक विसंगति (Structural Anomaly) पर अपना रुख स्पष्ट किया है। DoP&T के आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (O.M. No. 3/1/2025-JCA) के अनुसार, सरकार ने अब इस मामले को पूरी तरह से 8th CPC के पाले में डाल दिया है।
क्या है पूरा विवाद और Pay Fixation का संकट?
मुख्य विवाद Item No. NC-49/8/26 के तहत दर्ज है। नियम के अनुसार, जब किसी कर्मचारी को उच्च जिम्मेदारियों वाले पद पर प्रमोट किया जाता है, तो Fundamental Rule (FR) 22(1)(a)(1) के तहत उन्हें एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि (Financial Increment) का लाभ मिलना चाहिए।
हालांकि, वर्तमान नियमों में एक पेंच है। यदि कर्मचारी ने पहले ही MACP योजना का लाभ ले लिया है, तो उन्हें नियमित प्रमोशन के दौरान इस अतिरिक्त वेतन लाभ (Pay Fixation Benefit) से वंचित कर दिया जाता है।
स्टाफ साइड का तर्क (Argument): कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब एक कर्मचारी प्रमोशन लेता है, तो उसकी जिम्मेदारियां (Job Responsibilities) बढ़ जाती हैं। ऐसे में, वित्तीय लाभ (Financial Benefit) न देना एक बड़ी प्रशासनिक विसंगति है।
6th CPC vs 7th CPC: क्यों बढ़ी परेशानी?
JCM की बैठक में यह चर्चा हुई कि कैसे पे-कमीशन के बदलाव ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसे आप नीचे दी गई तालिका में समझ सकते हैं:
| विशेषता (Feature) | 6th CPC फ्रेमवर्क | 7th CPC फ्रेमवर्क |
| पे स्ट्रक्चर | ग्रेड पे + पे बैंड | एकीकृत पे मैट्रिक्स |
| फिक्सेशन लाभ | FR 22 के तहत स्वीकृत | कोई अतिरिक्त इंक्रीमेंट नहीं |
| प्रभावी प्रभाव | प्रमोशन पर वित्तीय प्रोत्साहन मिलता था | जिम्मेदारी बढ़ी, पर वेतन स्थिर रहा |
स्टाफ साइड के दिग्गज नेताओं की प्रमुख मांगें
बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार क्यों जरूरी है:
- श्री शिवाजी वसीरेड्डी: उन्होंने जोर देकर कहा कि पुरानी प्रणाली में प्रमोशन के बाद ग्रेड पे का अंतर मिलता था, जो नई प्रणाली में पूरी तरह गायब हो गया है।
- श्री अजय: इन्होंने बताया कि विभिन्न मंचों पर इस विसंगति को उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रणालीगत समाधान नहीं निकला।
- श्री सी. श्रीकुमार: उन्होंने दलील दी कि चूँकि 7th CPC ने ग्रेड पे सिस्टम को हटा दिया है, इसलिए प्रमोशन के बाद कम से कम एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट देना Justified (न्यायसंगत) है।
सरकार का फैसला: अब नजरें 8th CPC पर
सरकार ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए दो स्तरीय दृष्टिकोण (Two-fold approach) अपनाया है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के लिए नीतिगत ढांचा अब 8th CPC ही तैयार करेगा।
- Short-Term Relief: DoPT उन विशिष्ट मामलों की जांच करेगा जहाँ प्रशासनिक त्रुटि के कारण वेतन में भारी अंतर आया है।
- Long-Term Policy: वेतन वृद्धि के नियम (FR-22) में संशोधन को अब एक बड़ी नीतिगत पहल के रूप में देखा जा रहा है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि अब केंद्रीय कर्मचारियों की निगाहें 8th Pay Commission पर टिक गई हैं। उम्मीद है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशों में MACP के बाद प्रमोशन पर लगने वाली इस रोक को हटा सकता है।
कर्मचारियों के लिए आगे का रास्ता
यह एक Critical Stage है। यद्यपि सरकार ने अभी तत्काल राहत नहीं दी है, लेकिन मुद्दे को 8th CPC में शामिल करने का निर्णय यह दर्शाता है कि सरकार इस विसंगति को समाप्त करने के लिए तैयार है।
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आने वाले समय में, सभी यूनियन और कर्मचारी संगठन इस मुद्दे को 8th CPC की ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्राथमिकता के साथ शामिल कराने के लिए प्रयास करेंगे। यह न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि कार्य संस्कृति (Work Culture) को सुधारने के लिए भी आवश्यक है।







